राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ का बड़ा निर्णय: नागपुर ग्रामीण जिला की सभी शाखाएं भंग, नई कार्यकारिणी जल्द गठित होगी
नागपुर।
राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण और संगठनात्मक रूप से बड़ा कदम उठाते हुए नागपुर ग्रामीण जिला की सभी शाखाओं को भंग करने का ऐलान किया है। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय बबनराव तायवाडे साहेब के स्पष्ट निर्देशों के तहत यह आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के अनुसार, 06 अक्टूबर 2025 से सभी वर्तमान पदाधिकारी अपने पदों से मुक्त माने जाएंगे।
अनुशासन और पारदर्शिता के लिए उठाया गया कदम
महासंघ की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह निर्णय केवल “पदमुक्ति” नहीं है, बल्कि यह संगठन में अनुशासन, पारदर्शिता, नवचेतना और मजबूती लाने के उद्देश्य से लिया गया एक रणनीतिक निर्णय है।
संगठन ने सभी पदाधिकारियों से अपील की है कि वे इस निर्णय को सकारात्मक दृष्टि से लें और आदेश का तुरंत पालन करें।
नई कार्यकारिणी का गठन जल्द
राष्ट्रीय अध्यक्ष बबनराव तायवाडे के मार्गदर्शन में नई और ऊर्जावान कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा। महासंघ का कहना है कि आने वाले दिनों में संगठन को युवा, सक्षम और अनुशासित नेतृत्व की आवश्यकता है, ताकि ओबीसी वर्ग के अधिकारों और सामाजिक न्याय की लड़ाई को और मजबूती दी जा सके।
महासंघ की भूमिका और संघर्ष की विरासत
राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ अब तक सामाजिक न्याय, आरक्षण और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए कई बड़े आंदोलन कर चुका है।
महासंघ ने बार-बार यह साबित किया है कि वह केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक सामाजिक चेतना आंदोलन है जो हाशिए पर रहे तबकों की आवाज़ बनकर उभरा है।
इस निर्णय के बाद महासंघ के कार्यकर्ताओं में जहां आश्चर्य है, वहीं संगठन के पुनर्गठन को लेकर नई उम्मीदें भी जगी हैं।
पद नहीं, कार्य से पहचान
महासंघ ने अपने बयान में यह भी दोहराया कि
“महासंघ का प्रत्येक कार्यकर्ता अपने पद से नहीं, बल्कि अपने कार्य और समर्पण से पहचाना जाता है।”
संगठन ने सभी कार्यकर्ताओं से आग्रह किया है कि वे किसी भी प्रकार की निराशा न रखें और पूरे मनोयोग से महासंघ के कार्यों में सहभागी बने रहें।
यह संगठनात्मक निर्णय महासंघ को और सशक्त बनाने तथा समाज में इसकी पकड़ को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
एकजुटता और समर्पण का आह्वान
राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे निष्ठा, एकजुटता और सहयोग के साथ संगठन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाएं।
महासंघ का मानना है कि किसी भी संगठन की असली ताकत उसके समर्पित कार्यकर्ताओं में निहित होती है, और यही भावना आने वाले दिनों में संगठन को नई दिशा देगी।