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वरिष्ठ भाजपा नेता राज पुरोहित का निधन, मुंबई की राजनीति में शोक की लहर

वरिष्ठ भाजपा नेता राज पुरोहित का निधन
वरिष्ठ भाजपा नेता राज पुरोहित का निधन (File Photo)
भाजपा के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व कैबिनेट मंत्री राज पुरोहित का 70 वर्ष की उम्र में मुंबई में निधन हो गया। उनके जाने से मुंबई भाजपा और राज्य की राजनीति में शोक है। लंबे राजनीतिक सफर और संगठनात्मक योगदान को याद किया जा रहा है।
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Raj Purohit Death: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व कैबिनेट मंत्री राज पुरोहित के निधन से राज्य की राजनीति में एक गहरा सन्नाटा पसर गया है। रविवार तड़के मुंबई के बॉम्बे अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। 70 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले राज पुरोहित न केवल भाजपा का एक मजबूत स्तंभ थे, बल्कि मुंबई की राजनीति में एक प्रभावशाली और बेबाक आवाज के रूप में भी पहचाने जाते थे।

उनके निधन की खबर सामने आते ही भाजपा कार्यकर्ताओं, समर्थकों और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई। खासकर मुंबई भाजपा के लिए यह क्षति बेहद भावनात्मक मानी जा रही है, क्योंकि राज पुरोहित लंबे समय तक पार्टी के संगठन और सरकार दोनों का अहम चेहरा रहे।

बीमारी से संघर्ष और अंतिम समय

मिली जानकारी के अनुसार, राज पुरोहित पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते उन्हें 15 जनवरी को मुंबई के बॉम्बे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही थी, लेकिन रविवार सुबह अचानक उनकी तबीयत और बिगड़ गई।

इलाज के दौरान डॉक्टरों ने हर संभव कोशिश की, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका। आखिरकार रविवार तड़के उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की सूचना मिलते ही अस्पताल परिसर और उनके निवास स्थान पर समर्थकों की भीड़ जुटने लगी।

बेटे की जीत की खुशी मातम में बदली

राज पुरोहित का निधन ऐसे समय हुआ है, जब उनके परिवार में खुशी का माहौल था। उनके पुत्र आकाश पुरोहित ने हाल ही में संपन्न हुए मुंबई महानगरपालिका चुनाव 2026 में वार्ड-221 इमामवाड़ा डोंगरी से जीत दर्ज की थी। परिवार और समर्थक इस जीत का जश्न मना रहे थे।

लेकिन पिता के अचानक निधन ने इस खुशी को गहरे मातम में बदल दिया। जिस घर में जीत की बधाइयों की गूंज थी, वहां अब शोक और खामोशी का माहौल है। यह घटना राजनीति की उस सच्चाई को भी सामने लाती है, जहां सफलता और दुख कई बार एक ही समय पर दस्तक देते हैं।

25 वर्षों का लंबा और प्रभावशाली राजनीतिक सफर

राज पुरोहित मुंबई भाजपा के एक कद्दावर और आक्रामक नेता माने जाते थे। उन्होंने 25 वर्षों से अधिक समय तक विधानसभा में जनता का प्रतिनिधित्व किया। वे मुंबादेवी और कुलाबा विधानसभा क्षेत्रों से 1990, 1995, 1999 और 2004 में विधायक चुने गए।

1995 से 1999 तक की गठबंधन सरकार में उन्होंने श्रम, दुग्ध विकास और संसदीय कार्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके अलावा आवास मंत्री के तौर पर उन्होंने मुंबई के किरायेदारों और मध्यम वर्ग के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। उनके कार्यकाल में लिए गए फैसले आज भी शहरी राजनीति में चर्चा का विषय रहते हैं।

संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका

मुंबई भाजपा के अध्यक्ष रहते हुए राज पुरोहित ने पार्टी संगठन को नई दिशा दी। उन्होंने गैर-मराठी मतदाताओं को भाजपा से जोड़ने और शहर में पार्टी का जनाधार बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

पार्टी के लिए मुश्किल दौर में भी वे मजबूती से खड़े रहे। कार्यकर्ताओं के बीच उनकी सीधी बात और स्पष्ट राय के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे। संगठन के भीतर उन्हें एक अनुशासित लेकिन संवेदनशील नेता के रूप में देखा जाता था।

आज होगी अंतिम विदाई

राज पुरोहित का पार्थिव शरीर बॉम्बे अस्पताल से उनके निवास स्थान पर लाया गया है। सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक उनके अंतिम दर्शन किए जा सकेंगे। इसके बाद दोपहर 1 बजे उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी।

उनका अंतिम संस्कार सोनापुर लेन श्मशान घाट में किया जाएगा। इस दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के मौजूद रहने की संभावना है। सभी उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए जुटेंगे।

राज पुरोहित का निधन सिर्फ एक नेता का जाना नहीं है, बल्कि मुंबई की राजनीति के एक दौर का अंत भी माना जा रहा है। उनकी बेबाक शैली, संगठन के प्रति निष्ठा और जनता से जुड़ाव हमेशा याद किया जाएगा। भाजपा और महाराष्ट्र की राजनीति में उनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।