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अधीर रंजन चौधरी ओडिशा में बंगाली प्रवासी मजदूरों से मिलने जाएंगे, हमलों के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी

Adhir Ranjan Chowdhury Odisha Visit: बंगाली प्रवासी मजदूरों पर हमले के खिलाफ कांग्रेस नेता का दौरा
Adhir Ranjan Chowdhury Odisha Visit: बंगाली प्रवासी मजदूरों पर हमले के खिलाफ कांग्रेस नेता का दौरा (FB Photo)
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी बंगाली प्रवासी मजदूरों पर हो रहे हमलों के विरोध में 3-4 जनवरी को ओडिशा के संबलपुर जा रहे हैं। वह स्थानीय बंगाली मजदूरों से मिलेंगे और उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे। चौधरी ने जरूरत पड़ने पर बड़ा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दी है।
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कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य अधीर रंजन चौधरी ओडिशा के संबलपुर जिले का दौरा करने वाले हैं। यह दौरा बंगाली प्रवासी मजदूरों पर हो रहे हमलों और अत्याचारों के खिलाफ विरोध दर्ज करने के लिए किया जा रहा है। कांग्रेस नेता ने साफ कर दिया है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह इस मुद्दे को लेकर बड़ा आंदोलन शुरू करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

अधीर रंजन चौधरी 3 जनवरी 2026 की शाम को संबलपुर पहुंचेंगे। इसके बाद 4 जनवरी को वह स्थानीय बंगाली प्रवासी मजदूरों से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात का मकसद उनकी समस्याओं को सुनना और उन पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ ठोस कदम उठाना है।

ओडिशा में बंगाली मजदूरों की स्थिति

ओडिशा में बंगाली प्रवासी मजदूरों की संख्या काफी बड़ी है। ये मजदूर रोजी-रोटी की तलाश में पश्चिम बंगाल से ओडिशा आते हैं और निर्माण कार्य, खेती और अन्य छोटे-मोटे काम करते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से इन मजदूरों पर हमले और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आई हैं। स्थानीय लोगों और कुछ गुंडा तत्वों द्वारा इन निर्दोष मजदूरों को निशाना बनाया जा रहा है।

कई मामलों में बंगाली मजदूरों को धमकाया गया है, उनकी झोपड़ियों में आग लगाई गई है और कुछ मामलों में शारीरिक हिंसा भी की गई है। इन घटनाओं से बंगाली समुदाय में गहरा डर और असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है। कई परिवारों ने अपना काम-धंधा छोड़कर वापस बंगाल लौटने का फैसला भी किया है।

कांग्रेस का विरोध और समर्थन

कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से ले रही है। अधीर रंजन चौधरी पश्चिम बंगाल से आने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता हैं और उन्होंने हमेशा बंगाली समुदाय के हितों की रक्षा की है। उनका यह दौरा सिर्फ एक राजनीतिक कदम नहीं है बल्कि बंगाली मजदूरों को यह संदेश देना है कि वे अकेले नहीं हैं।

चौधरी ने अपने बयान में कहा है कि बंगाली प्रवासी मजदूर देश के नागरिक हैं और उन्हें किसी भी राज्य में काम करने का पूरा अधिकार है। उन पर हो रहे अत्याचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उन्होंने ओडिशा सरकार से इन घटनाओं पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

आंदोलन की चेतावनी

अधीर रंजन चौधरी ने साफ कर दिया है कि अगर ओडिशा सरकार बंगाली मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करती और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करती, तो वह राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल बंगाली समुदाय का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह मानवाधिकारों और संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों का मामला है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रवासी मजदूर हर राज्य की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देते हैं। उनकी मेहनत से निर्माण कार्य होते हैं, खेती-बाड़ी होती है और छोटे उद्योग चलते हैं। ऐसे में उन्हें सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए, न कि हमले और धमकियां।

समस्याओं का समाधान

अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि वह संबलपुर में बंगाली मजदूरों से सीधे मिलेंगे और उनकी समस्याओं को सुनेंगे। इसके बाद वह स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार से बात करेंगे। उनका उद्देश्य मजदूरों की सुरक्षा के लिए ठोस उपाय करवाना और दोषियों को सजा दिलवाना है।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएंगे। वह केंद्र सरकार से भी आग्रह करेंगे कि प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए राज्यों को सख्त निर्देश दिए जाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य में प्रवासियों के साथ भेदभाव या हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

सामाजिक और राजनीतिक असर

यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग भी लेता जा रहा है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार है और वहां के नेता भी इस मामले पर अपनी चिंता जाहिर कर रहे हैं। हालांकि अधीर रंजन चौधरी कांग्रेस से हैं, लेकिन उनका यह कदम पूरे बंगाली समुदाय की भावनाओं को आवाज देता है।

ओडिशा में बीजू जनता दल की सरकार है और अब तक राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन अधीर रंजन चौधरी के दौरे के बाद सरकार पर दबाव बढ़ना तय है। अगर सरकार ने तुरंत कार्रवाई नहीं की तो यह मामला और बड़ा हो सकता है।

प्रवासी मजदूरों के अधिकार

भारत के संविधान में हर नागरिक को देश के किसी भी हिस्से में रहने और काम करने का अधिकार है। प्रवासी मजदूर इसी अधिकार का इस्तेमाल करके दूसरे राज्यों में जाकर काम करते हैं। लेकिन कई बार उन्हें स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ता है। यह विरोध कभी भाषा के नाम पर होता है, कभी रोजगार के नाम पर और कभी क्षेत्रवाद के नाम पर।

ऐसे मामलों में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। प्रवासी मजदूरों को भी वही अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए जो स्थानीय लोगों को मिलता है। अगर कोई अपराध होता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरे समुदाय को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

आगे की राह

अधीर रंजन चौधरी का यह दौरा बंगाली मजदूरों के लिए उम्मीद की किरण है। उनकी मुलाकात के बाद यह देखना होगा कि ओडिशा सरकार क्या कदम उठाती है। अगर सरकार ने ठोस कार्रवाई की तो मामला सुलझ सकता है, लेकिन अगर नहीं तो कांग्रेस का आंदोलन और तेज हो सकता है।

इस पूरे मामले में सबसे जरूरी बात यह है कि प्रवासी मजदूरों को न्याय मिले और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो। यह केवल बंगाली मजदूरों का मुद्दा नहीं है बल्कि यह पूरे देश के प्रवासी मजदूरों के अधिकारों का सवाल है। इस मुद्दे को गंभीरता से लेना होगा और सभी राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके यहां रहने वाले प्रवासी मजदूर सुरक्षित रहें।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।