
छोटे बच्चों के बीच पहुंचे मोहन चरण माझी
Odisha Education: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने हाल ही में ‘खड़ी छुआन’ कार्यक्रम के जरिए जिस तरह बच्चों की शिक्षा की शुरुआत को एक उत्सव का रूप दिया, वह सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि राज्य की शिक्षा नीति और सोच को दर्शाता है। भुवनेश्वर में आयोजित इस कार्यक्रम में जब मुख्यमंत्री छोटे बच्चों के बीच पहुंचे, तो माहौल बिल्कुल औपचारिक नहीं था। वे बच्चों के साथ जमीन पर बैठ गए, उनका हाथ पकड़कर स्लेट पर “मां” और “बाप” लिखवाया और उनसे हंसी-मजाक के अंदाज में बातें कीं। बच्चों से उन्होंने पूछा कि सुबह क्या खाकर आए हो, मां-पिता का नाम क्या है—ताकि बच्चे डरें नहीं, बल्कि स्कूल को अपनापन महसूस करें। असल में इस पूरे कार्यक्रम का मकसद सिर्फ पढ़ाई शुरू कराना नहीं, बल्कि बच्चों के मन से “स्कूल का डर” खत्म करना है।
सम्मान और रुचि पैदा हो
Odisha Education: मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि सरकार चाहती है कि बच्चों में शिक्षा के प्रति डर नहीं बल्कि सम्मान और रुचि पैदा हो। इस अभियान को राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर चलाया है। इस साल करीब 5 लाख निमंत्रण पत्र अभिभावकों को भेजे गए ताकि वे अपने बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए प्रेरित हों। गांव से लेकर शहर तक ‘प्रवेश उत्सव’ और ‘खड़ी छुआन’ को एक त्योहार की तरह मनाया जा रहा है, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से बाहर न रह जाए।

रोचक पढ़ाई की सामग्री दिखाई
Odisha Education: कार्यक्रम में बच्चों को मुफ्त शैक्षणिक किट भी दी गईं और ‘निपुण ओडिशा’ व ‘पढ़िबा-गढ़िबा ओडिशा’ जैसी योजनाओं के तहत तैयार आधुनिक और रोचक पढ़ाई की सामग्री भी दिखाई गई। मुख्यमंत्री ने खुद इन प्रदर्शनों को देखा और बच्चों की बनाई पेंटिंग्स की सराहना की। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ‘खड़ी छुआन’ ओडिशा की बहुत पुरानी और पवित्र परंपरा है, जिसे अब सरकार ने आधिकारिक रूप से स्कूल शिक्षा से जोड़ दिया है। पहले यह परंपरा घरों या मंदिरों में होती थी, लेकिन अब इसे सरकारी स्तर पर मनाकर हर बच्चे तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
माझी की कहानी भी प्रेरणादायक
Odisha Education: अगर बात करें मोहन चरण माझी की, तो उनकी अपनी कहानी भी काफी प्रेरणादायक है। वे 2024 में ओडिशा के मुख्यमंत्री बने और इससे पहले एक शिक्षक के रूप में काम कर चुके हैं। यही कारण है कि बच्चों के बीच उनका व्यवहार एक नेता से ज्यादा एक शिक्षक जैसा दिखता है। वे संथाल जनजाति से आते हैं और साधारण परिवार से उठकर राज्य के शीर्ष पद तक पहुंचे हैं। राजनीति में आने से पहले उन्होंने गांव स्तर पर सरपंच के रूप में काम किया और धीरे-धीरे विधायक बने, फिर मुख्यमंत्री तक पहुंचे। उनकी राजनीति की खास बात यह मानी जाती है कि वे जमीनी स्तर के मुद्दों, खासकर शिक्षा और ग्रामीण विकास पर ज्यादा ध्यान देते हैं।
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शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और पारदर्शिता पर जोर
Odisha Education: हाल के महीनों में भी उन्होंने कई बार यह दोहराया है कि उनकी सरकार “लोगों के लिए काम करने वाली सरकार” बनाना चाहती है, जिसमें शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और पारदर्शिता पर जोर हो। ‘खड़ी छुआन’ जैसे कार्यक्रम इसी सोच का हिस्सा हैं, जहां शिक्षा को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि उसे संस्कृति, परंपरा और समाज से जोड़कर एक आंदोलन बनाने की कोशिश की जा रही है। इस पूरी पहल का संदेश साफ है-बच्चे जब पहली बार स्कूल आएं, तो वह उनके लिए डर या दबाव का नहीं, बल्कि खुशी और उत्साह का अनुभव हो। और शायद यही वजह है कि ओडिशा सरकार इस कार्यक्रम को हर साल और बड़े स्तर पर आयोजित करने की योजना बना रही है।