Tamil Nadu Assembly Election 2026: तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर करवट लेती नजर आ रही है। विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है और पुराने समीकरण टूटते-बनते दिखाई दे रहे हैं। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे राजनीतिक दल अपनी रणनीति को धार देने में जुट गए हैं। इस बीच एक ऐसा संकेत सामने आया है, जिसने राज्य की राजनीति को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है।
चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन राजनीतिक चालें अभी से बिछाई जा रही हैं। गठबंधन, टूटन और नए चेहरों की एंट्री ने तमिलनाडु को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।
चुनाव से पहले बदलते गठबंधन
तमिलनाडु विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 10 मई 2026 को समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में सभी दलों के सामने यह सवाल खड़ा है कि आने वाले चुनाव में सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी। राज्य में लंबे समय से डीएमके और एआईएडीएमके के बीच सीधा मुकाबला होता रहा है, लेकिन अब तस्वीर वैसी नहीं रही। गठबंधनों में बदलाव और नए राजनीतिक प्रयोग इस चुनाव को अलग बना रहे हैं।
एनडीए में संभावित नई एंट्री
अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम के प्रमुख TTB दिनाकरण के भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने की चर्चा ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। माना जा रहा है कि दिनाकरण केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता पीयूष गोयल से मुलाकात कर सकते हैं।
पीयूष गोयल का तमिलनाडु दौरा भी इस घटनाक्रम को और अहम बना देता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों की दिशा तय करने वाली हो सकती है।
डीएमके के लिए दोबारा परीक्षा
साल 2021 में एमके स्टालिन के नेतृत्व में DMK ने प्रचंड जीत दर्ज कर सत्ता हासिल की थी। 234 सदस्यीय विधानसभा में डीएमके ने 133 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि उसके सहयोगी कांग्रेस को 18 सीटें मिली थीं।
अब पांच साल बाद स्टालिन सरकार को जनता के सामने अपने कामकाज का हिसाब देना होगा। सत्ता विरोधी लहर, महंगाई, रोजगार और केंद्र-राज्य संबंध जैसे मुद्दे इस बार चुनावी बहस का हिस्सा बन सकते हैं।
एआईएडीएमके की वापसी की कोशिश
दूसरी ओर, AIADMK एक बार फिर सत्ता में वापसी के लिए बेचैन है। 2021 के चुनाव में पार्टी को सिर्फ 66 सीटों से संतोष करना पड़ा था। बीजेपी के साथ गठबंधन के बावजूद AIADMK अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई थी।
अब बीजेपी से दूरी बनने के बाद एआईएडीएमके अपनी नई रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी नेतृत्व यह समझ चुका है कि केवल पुरानी राजनीति के सहारे सत्ता में वापसी आसान नहीं होगी।
सूबे में उभरती त्रिकोणीय लड़ाई
इस बार का चुनाव सिर्फ एनडीए बनाम इंडिया ब्लॉक तक सीमित नहीं दिख रहा। तमिल सिनेमा के बड़े सितारे थलपति विजय की राजनीतिक एंट्री ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। उन्होंने अपनी पार्टी तमिलागा वेट्ट्री कज़गम का गठन कर राजनीति में कदम रखा है।
विजय की लोकप्रियता खासकर युवाओं और शहरी मतदाताओं के बीच एक नया समीकरण बना सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी पार्टी किस हद तक डीएमके और एआईएडीएमके के वोट बैंक में सेंध लगा पाती है।
बीजेपी की रणनीति पर सबकी नजर
बीजेपी पिछले कुछ वर्षों से तमिलनाडु में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। हालांकि अब तक पार्टी को बड़ी चुनावी सफलता नहीं मिली है, लेकिन गठबंधन राजनीति के जरिए वह खुद को निर्णायक भूमिका में लाने की कोशिश में है।
यदि टीटीबी दिनाकरण एनडीए में शामिल होते हैं, तो इससे बीजेपी को राज्य में एक नया आधार मिल सकता है। साथ ही यह एआईएडीएमके और डीएमके दोनों के लिए नई चुनौती खड़ी कर सकता है।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 अभी दूर हैं, लेकिन सियासी सरगर्मी अभी से चरम पर है। गठबंधन की राजनीति, नए चेहरों की एंट्री और पुराने दिग्गजों की रणनीति यह तय करेगी कि जनता किसे सत्ता सौंपती है।