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धीनाकरन की एनडीए में वापसी से एडप्पाडी पलानीस्वामी के साथ रिश्तों में आई नरमी

धीनाकरन की एनडीए में वापसी से एडप्पाडी पलानीस्वामी के साथ रिश्तों में आई नरमी
Dhinakaran NDA Return: धीनाकरन की एनडीए में वापसी, पलानीस्वामी के साथ नौ साल पुरानी दुश्मनी खत्म body (Photo: X/@DrLMurugan)

तमिलनाडु में राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं। अम्मा मक्कल मुन्नेत्र कषगम के संस्थापक टी.टी.वी. धीनाकरन की एनडीए में वापसी से एडप्पाडी पलानीस्वामी के साथ नौ साल पुराने तनावपूर्ण रिश्तों में सुधार के संकेत मिले हैं। दोनों नेताओं ने डीएमके को हराने के लिए एकजुट होने का संकेत दिया है।

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Asfi Shadab
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तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अम्मा मक्कल मुन्नेत्र कषगम यानी एएमएमके के संस्थापक टी.टी.वी. धीनाकरन ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए में शामिल होने का फैसला किया है। इस फैसले का स्वागत करते हुए अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम यानी एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। यह घटना दोनों नेताओं के बीच लगभग नौ साल से चल रहे तनाव को कम करने का संकेत देती है।

बुधवार को पलानीस्वामी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि धीनाकरन का यह कदम डीएमके की क्रूर सत्ता को खत्म करने और जयललिता के स्वर्णिम शासन को फिर से स्थापित करने की दिशा में है। उन्होंने कहा कि केवल लोगों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए सभी को मिलकर काम करना चाहिए और तमिलनाडु को डीएमके के पारिवारिक शासन से मुक्त कराना चाहिए। जवाब में एएमएमके के संस्थापक धीनाकरन ने भी पलानीस्वामी का धन्यवाद किया और उनकी सकारात्मक प्रतिक्रिया की सराहना की।

नौ साल पुरानी दुश्मनी का अंत

यह घटना दोनों नेताओं के बीच लगभग नौ साल से चल रहे तूफानी रिश्तों के खत्म होने का संकेत है। हालांकि फरवरी 2017 में जब ओ. पन्नीरसेल्वम ने पूर्व अंतरिम महासचिव वी.के. शशिकला के नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह किया था, तब पलानीस्वामी और धीनाकरन एक ही पक्ष में थे। लेकिन कुछ महीनों के भीतर ही दोनों अलग हो गए।

अप्रैल 2017 में धीनाकरन को चुनाव आयोग के अधिकारियों को रिश्वत देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस समय वह एआईएडीएमके अम्मा गुट के उप महासचिव थे और आरके नगर विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ने वाले थे। लेकिन चुनाव आयोग ने आखिरी समय में चुनाव रद्द कर दिया था। गिरफ्तारी से पहले ही कुछ कार्यकर्ताओं ने उनके आवास पर उनसे गर्मागर्म बहस की थी।

एएमएमके का जन्म

कुछ महीनों बाद जब धीनाकरन जमानत पर बाहर आए तो पलानीस्वामी की सरकार के लिए संकट खड़ा हो गया। करीब तीस विधायकों ने उनसे मुलाकात की। इसी बीच पन्नीरसेल्वम और पलानीस्वामी के गुट एक साथ आ गए। उन्नीस विधायक खुलकर पलानीस्वामी के नेतृत्व के खिलाफ आ गए। सितंबर में इनमें से अठारह विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया गया।

तीन महीने बाद धीनाकरन आरके नगर से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए। मार्च 2018 में उन्होंने अपनी खुद की पार्टी एएमएमके की स्थापना की। 2019 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने लगभग अकेले चुनाव लड़ा और नतीजा बहुत खराब रहा। हालांकि 2021 में उनकी पार्टी ने बीस विधानसभा क्षेत्रों में एआईएडीएमके और उसके सहयोगियों की हार में अहम भूमिका निभाई।

Dhinakaran NDA Return: धीनाकरन की एनडीए में वापसी, पलानीस्वामी के साथ नौ साल पुरानी दुश्मनी खत्म
Dhinakaran NDA Return: धीनाकरन की एनडीए में वापसी, पलानीस्वामी के साथ नौ साल पुरानी दुश्मनी खत्म body (Photo: X/@DrLMurugan)

एनडीए में शामिल होना और निकलना

जुलाई 2022 में जब पन्नीरसेल्वम को एआईएडीएमके से निकाला गया तो वह और धीनाकरन एक साथ आ गए। 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों भारतीय जनता पार्टी यानी भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा थे। लेकिन दोनों दक्षिण तमिलनाडु में रामनाथपुरम और थेनी से अपने चुनावी प्रयास में असफल रहे।

अप्रैल 2025 में जब एआईएडीएमके और भाजपा के बीच फिर से संबंध बने तो एएमएमके ने सितंबर में एनडीए छोड़ दिया। उन्होंने इसका कारण भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा पार्टी की लगातार उपेक्षा बताया था। लेकिन अब धीनाकरन ने फिर से एनडीए में शामिल होने का फैसला किया है जो तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा मोड़ है।

क्या होगा ओपीएस और शशिकला का

इस सवाल पर कि क्या यह सुलह एआईएडीएमके और एएमएमके के कार्यकर्ताओं के बीच काम करेगी, पूर्व एआईएडीएमके मंत्री एस. सेम्मलाई ने हां में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि धीनाकरन की स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया है। एएमएमके नेता ने कहा कि यह फैसला सहभागियों के बीच की लड़ाई को छोड़कर लिया गया है।

पूर्व मंत्री सेम्मलाई ने कहा कि अब तक एएमएमके नेता हमें विरोधी मानते थे लेकिन आज वह हमें सहभागी कह रहे हैं। यह एक बड़ा बदलाव है। एएमएमके के दो पदाधिकारियों ने कहा कि यह विकास लोगों की उम्मीदों के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि जो भी ताकतें कभी एआईएडीएमके का हिस्सा थीं, उन्हें एक साथ आना चाहिए।

उन्होंने कहा कि चूंकि उनकी पार्टी एम.जी. रामचंद्रन और जयललिता की याद को कायम रखने के लिए बनाई गई है, इसलिए एआईएडीएमके के साथ हाथ मिलाना स्वाभाविक है।
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h3>राजनीतिक हलकों में चर्चा

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि धीनाकरन, पन्नीरसेल्वम और शशिकला के बिना कावेरी डेल्टा और दक्षिणी जिलों की लगभग पचास विधानसभा सीटों पर एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले एनडीए की संभावनाओं पर बुरा असर पड़ेगा। एएमएमके संस्थापक की एनडीए में वापसी से इस धारणा का कुछ हद तक समाधान हो गया है।

लेकिन यह देखना बाकी है कि क्या अन्य दो लोगों को भी जगह दी जाएगी। पलानीस्वामी ने बार-बार अपने पूर्व सहयोगियों के खिलाफ अपनी राय व्यक्त की है। यह स्पष्ट नहीं है कि वह पन्नीरसेल्वम और शशिकला को भी गठबंधन में शामिल करने के लिए तैयार होंगे या नहीं।

तमिलनाडु में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति बना रहे हैं। ऐसे में धीनाकरन की एनडीए में वापसी एक बड़ा राजनीतिक कदम है। इससे डीएमके के खिलाफ विपक्ष की ताकत मजबूत हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम तमिलनाडु की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है। अगर सभी विपक्षी ताकतें एक साथ आती हैं तो डीएमके के लिए चुनौती बढ़ सकती है। लेकिन यह भी सच है कि इतने साल की दुश्मनी के बाद एकजुट होना आसान नहीं होगा।

कार्यकर्ताओं के बीच अभी भी कई सवाल हैं। लेकिन नेताओं का यह कदम साफ संकेत देता है कि वे सत्ता के लिए अपने पुराने मतभेद भुलाने को तैयार हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह गठबंधन कितना मजबूत होता है और इसका तमिलनाडु की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।