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नोएडा में मजदूरों का बेकाबू प्रदर्शन: वेतन की मांग पर हिंसा, आग और पत्थरों से गूंजा शहर

नोएडा में मजदूरों का बेकाबू प्रदर्शन: वेतन की मांग पर हिंसा, आग और पत्थरों से गूंजा शहर
नोएडा में मजदूरों का बेकाबू प्रदर्शन: वेतन की मांग पर हिंसा, आग और पत्थरों से गूंजा शहर (Pic Credit- X @mohitlaws)

नोएडा में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया, जिससे शहर में अफरा-तफरी मच गई। आगजनी, पथराव और पुलिस कार्रवाई के बीच हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। आखिर कैसे शांतिपूर्ण विरोध ने लिया खतरनाक मोड़, जानिए पूरी कहानी।

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Noida Workers Protest: नोएडा में मजदूरों और फैक्ट्री कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने को लेकर शुरू हुआ शांतिपूर्ण प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया, जिसने पूरे शहर को हिला कर रख दिया। सोमवार को जो आवाज अपने हक की मांग से शुरू हुई थी, वह देखते ही देखते पथराव, आगजनी और झड़पों में बदल गई।

जानकारी के मुताबिक, करीब 80 स्थानों पर 40 हजार से अधिक मजदूर सड़कों पर उतर आए। कई जगहों पर सुरक्षाबलों के साथ उनकी झड़प हुई, तो कहीं सड़कों को जाम कर दिया गया। ऑफिस जाने वाले लोग घंटों ट्रैफिक में फंसे रहे, तो दुकानदारों ने डर के कारण अपने शटर गिरा दिए। कई परिवारों ने अपने बच्चों को घर से बाहर निकलने से रोक दिया।

गाड़ियों में आग और पथराव

स्थिति सबसे ज्यादा फेज-2 और सेक्टर 63 में बिगड़ी, जहां उग्र भीड़ ने गाड़ियों में आग लगा दी और पथराव किया। हालात काबू में लाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और भारी सुरक्षा बल तैनात करना पड़ा। अब तक इस मामले में करीब 300 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 100 से अधिक लोगों से पूछताछ जारी है।

मजदूरों की क्या है मांग ?

मजदूरों का कहना है कि उनकी लड़ाई सिर्फ वेतन को लेकर है। उनका आरोप है कि समान काम करने के बावजूद उन्हें हरियाणा के मुकाबले कम वेतन दिया जाता है। कई मजदूरों ने बताया कि वे 12-12 घंटे काम करते हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ 11 से 15 हजार रुपये ही मिलते हैं, जो बढ़ती महंगाई के दौर में बेहद कम है। उनकी मांग है कि न्यूनतम वेतन 20 से 25 हजार रुपये किया जाए, ताकि वे अपने परिवार का बेहतर ढंग से पालन-पोषण कर सकें।

मजदूरी बढ़ाने का ऐलान

इसी बीच राज्य सरकार ने मजदूरी बढ़ाने का ऐलान किया है। मेधा रूपम के अनुसार, संशोधित दरें 1 अप्रैल से लागू होंगी। हालांकि, सवाल अब भी बना हुआ है कि क्या यह बढ़ोतरी मजदूरों के गुस्से को शांत कर पाएगी?

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है।

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