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UP SIR: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटे, ड्राफ्ट सूची जारी

UP SIR: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटे, ड्राफ्ट सूची जारी
UP SIR Voters Draft: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से 2.88 करोड़ नाम हटे, ड्राफ्ट जारी (File Photo)

उत्तर प्रदेश में एसआईआर अभियान के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी हुई है। इसमें 2.88 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। 17 जिलों में 20 प्रतिशत से अधिक कटौती हुई है। अब छह फरवरी तक लोग दावे और आपत्तियां दर्ज कर सकते हैं।

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Asfi Shadab
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उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को साफ और सही बनाने के लिए चलाया गया विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान अब अपने अहम पड़ाव पर पहुंच गया है। इस अभियान के तहत राज्य की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी गई है। इस ड्राफ्ट सूची में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। चुनाव से पहले मतदाता सूची में हुए इस बड़े बदलाव ने आम लोगों के साथ-साथ राजनीतिक दलों का भी ध्यान खींचा है।

इस अभियान का मकसद यह था कि मतदाता सूची में ऐसे नाम न रहें, जो अब सही नहीं हैं। इसमें उन लोगों के नाम हटाए गए हैं जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, जो दूसरे स्थान पर चले गए हैं, जो लंबे समय से मौजूद नहीं हैं या जिनके नाम दो बार दर्ज थे।

एसआईआर अभियान का उद्देश्य और प्रक्रिया

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर अभियान लंबे समय तक चला। इसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह सही करना था। इस प्रक्रिया में घर-घर जाकर जांच की गई, रिकॉर्ड देखे गए और पुराने आंकड़ों से मिलान किया गया। शुरुआत में यह अभियान 11 दिसंबर को पूरा होना था, लेकिन जब बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होते दिखे तो राज्य ने अतिरिक्त समय मांगा। इसके बाद यह प्रक्रिया 26 दिसंबर तक बढ़ाई गई।

इस अतिरिक्त समय में करीब नौ लाख नए फॉर्म भरे गए। इससे साफ है कि लोगों को अभी भी अपने नाम जुड़वाने का मौका मिला और कई लोगों ने इसका फायदा भी उठाया।

कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए

उत्तर प्रदेश में कुल 15.44 करोड़ मतदाता थे। एसआईआर अभियान के बाद 2 करोड़ 88 लाख 75 हजार 230 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह कुल मतदाताओं का लगभग 18.70 प्रतिशत है। यह संख्या काफी बड़ी मानी जा रही है।

हटाए गए नामों में अलग-अलग कारण सामने आए हैं। सबसे ज्यादा नाम उन लोगों के हैं जो स्थान बदल चुके हैं या लंबे समय से अनुपस्थित हैं। इसके अलावा मृत मतदाताओं और डुप्लीकेट नामों को भी हटाया गया है।

किस कारण से कितने नाम कटे

एसआईआर के आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक 2.17 करोड़ नाम ऐसे लोगों के हैं जो स्थानांतरित हो चुके हैं या अनुपस्थित पाए गए। इसके बाद 46.23 लाख नाम मृत मतदाताओं के हैं। 25.47 लाख नाम डुप्लीकेट पाए गए और 7.57 लाख ऐसे मतदाता हैं जिन्होंने जरूरी फॉर्म जमा नहीं किए।

इन आंकड़ों से साफ है कि लंबे समय से मतदाता सूची में सुधार की जरूरत थी, जिसे अब गंभीरता से किया गया है।

2003 की सूची से रिकॉर्ड न मिलने वाले मतदाता

इस अभियान में एक और अहम बात सामने आई है। करीब 1.04 करोड़ ऐसे मतदाता हैं जिनका रिकॉर्ड वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नहीं मिला है। अब चुनाव आयोग इन मतदाताओं को नोटिस जारी करेगा। इसका मतलब है कि आने वाले समय में इन नामों पर भी फैसला लिया जाएगा।

ड्राफ्ट सूची के बाद अब राज्य में कुल 12.55 करोड़ मतदाता ही मतदाता सूची में बचे हैं।

17 जिलों में 20 प्रतिशत से अधिक नाम कटे

प्रदेश के 75 जिलों में से 17 जिले ऐसे हैं जहां 20 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के नाम कटे हैं। इनमें सबसे ऊपर राजधानी लखनऊ है। लखनऊ में 12 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का 30.04 प्रतिशत है।

इसके अलावा गाजियाबाद, कानपुर नगर, प्रयागराज और बलरामपुर जैसे बड़े जिलों में भी बड़ी संख्या में नाम कटे हैं। यह स्थिति बताती है कि शहरी और तेजी से बदलते इलाकों में मतदाता सूची में सबसे ज्यादा गड़बड़ी पाई गई।

सबसे कम नाम कटने वाले जिले

कुछ जिले ऐसे भी हैं जहां नाम कटने की संख्या काफी कम रही। महोबा में सबसे कम करीब 85 हजार नाम हटे हैं। इसके बाद हमीरपुर, ललितपुर, चित्रकूट और श्रावस्ती जैसे जिले हैं। इन जिलों में मतदाता सूची पहले से ही काफी हद तक सही मानी जा रही है।

अब क्या कर सकते हैं मतदाता

ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद अब एक महीने तक दावे और आपत्तियां ली जाएंगी। यह प्रक्रिया छह फरवरी तक चलेगी। इस दौरान अगर किसी का नाम गलत तरीके से हट गया है तो वह दोबारा जुड़वा सकता है। वहीं अगर किसी को लगता है कि किसी और का नाम गलत है तो उस पर आपत्ति भी दी जा सकती है।

मतदाता सूची बीएलओ के पास उपलब्ध है और लोग वहां जाकर अपनी जानकारी देख सकते हैं। यह समय आम लोगों के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि अंतिम सूची इसी प्रक्रिया के बाद तैयार होगी।

राजनीतिक असर और सवाल

मतदाता सूची में हुए इस बड़े बदलाव का राजनीतिक असर भी पड़ सकता है। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को ड्राफ्ट सूची की प्रति दे दी गई है। अब दल अपने स्तर पर जांच करेंगे और जरूरत पड़ने पर आपत्तियां भी दर्ज कराएंगे।

यह प्रक्रिया लोकतंत्र के लिए जरूरी मानी जा रही है, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि कोई भी सही मतदाता छूट न जाए। इसी संतुलन को बनाए रखना चुनाव आयोग के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।