पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक पारा चढ़ता जा रहा है। रातों-रात शहर की दीवारों पर लगे रहस्यमय पोस्टरों ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है। इन पोस्टरों में बीजेपी के बांकुड़ा संगठनात्मक जिला अध्यक्ष प्रसेनजीत चट्टोपाध्याय के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस घटना के बाद शासक और विपक्षी दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
रातों-रात दीवारों पर उभरे पोस्टर
बुधवार रात किसी ने या कुछ लोगों ने बांकुड़ा जिले के विभिन्न इलाकों में सफेद कागज पर हाथ से लिखे पोस्टर चिपका दिए। गुरुवार सुबह जब लोग अपने घरों से निकले तो रामपुर, पांचबागा सहित जिले के कई इलाकों में ये पोस्टर दिखाई दिए। इन पोस्टरों में बीजेपी के जिला अध्यक्ष के खिलाफ कई तरह के आरोप लगाए गए थे। कहीं भ्रष्टाचार का आरोप था तो कहीं तृणमूल कांग्रेस के साथ सांठगांठ की बात कही गई थी।
पोस्टरों में क्या लिखा था
पोस्टरों में प्रसेनजीत चट्टोपाध्याय के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कुछ पोस्टरों में महिला सम्मान लूटने का आरोप लगाया गया है तो कुछ में तृणमूल कांग्रेस के साथ मिलीभगत की बात कही गई है। कुछ पोस्टरों में उन्हें भ्रष्टाचार में लिप्त बताया गया है। इसके अलावा कुछ पोस्टरों में 2024 के लोकसभा चुनाव में बांकुड़ा सीट पर बीजेपी उम्मीदवार की हार की जिम्मेदारी भी जिला अध्यक्ष पर डाली गई है।
बीजेपी का आरोप – तृणमूल की चाल
बीजेपी के जिला अध्यक्ष प्रसेनजीत चट्टोपाध्याय ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया है। उनका कहना है कि ये पोस्टर तृणमूल कांग्रेस की साजिश है। चुनाव नजदीक आते देख तृणमूल राजनीतिक रूप से कमजोर पड़ रही है इसलिए वे इस तरह की गंदी चालें चल रहे हैं। बीजेपी नेता का दावा है कि दल में किसी तरह की गुटबाजी नहीं है और सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर चुनाव की तैयारी कर रहे हैं।
तृणमूल का पलटवार – बीजेपी की आंतरिक लड़ाई
वहीं तृणमूल कांग्रेस के बांकुड़ा संगठनात्मक जिला की चेयरमैन अलका सेन मजूमदार ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये पोस्टर बीजेपी की आंतरिक गुटबाजी का नतीजा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी में गुटबाजी चरम पर है और एक गुट दूसरे गुट को नीचा दिखाने के लिए ये हरकतें कर रहा है। तृणमूल का दावा है कि वे इस तरह की छोटी राजनीति में विश्वास नहीं करते।
चुनावी माहौल में बढ़ता तनाव
विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, बांकुड़ा में राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। लाल मिट्टी वाले इस जिले में पहले से ही शासक और विपक्षी दल के बीच तनाव का माहौल है। दोनों दल एक-दूसरे को चेतावनी दे रहे हैं। ऐसे में इन पोस्टरों ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
पोस्टर राजनीति की शुरुआत
बांकुड़ा में पोस्टर राजनीति कोई नई बात नहीं है। चुनाव के समय अक्सर दीवारों पर पोस्टर लगाकर विरोधियों पर आरोप लगाए जाते हैं। लेकिन इस बार जिला अध्यक्ष जैसे बड़े पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ इतने गंभीर आरोप लगाना सभी को चौंका रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसने और क्यों ये पोस्टर लगाए।
2024 लोकसभा चुनाव का जिक्र
पोस्टरों में 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की हार का जिक्र भी किया गया है। बांकुड़ा लोकसभा सीट पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। कुछ पोस्टरों में जिला अध्यक्ष को इस हार का जिम्मेदार ठहराया गया है। इससे साफ होता है कि पोस्टर लगाने वाले बीजेपी की आंतरिक राजनीति से वाकिफ हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
इन पोस्टरों को देखकर आम लोग भी हैरान हैं। कुछ लोग इसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का हिस्सा मान रहे हैं तो कुछ का मानना है कि ये बीजेपी के अंदर की लड़ाई है। लोगों की दिलचस्पी इस बात में ज्यादा है कि आखिर पोस्टर किसने लगाए और इसके पीछे का असली मकसद क्या है।
राजनीतिक विश्लेषण
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार चुनाव से पहले ऐसी घटनाएं आम हैं। विरोधी दल एक-दूसरे की छवि खराब करने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाते हैं। लेकिन अगर ये पोस्टर बीजेपी के किसी धड़े ने लगाए हैं तो यह पार्टी के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इससे पार्टी की एकता पर सवाल उठते हैं।
आगे क्या होगा
अब देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है। क्या पुलिस इस मामले की जांच करेगी और पोस्टर लगाने वालों का पता लगाएगी या फिर यह मामला राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहेगा। चुनाव आयोग भी इस तरह की गतिविधियों पर नजर रख रहा है।
बांकुड़ा में लगे इन पोस्टरों ने चुनावी राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। बीजेपी और तृणमूल के बीच शुरू हुआ यह आरोप-प्रत्यारोप का खेल आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। विधानसभा चुनाव तक यह मुद्दा गर्म बना रह सकता है। अब यह देखना होगा कि इस विवाद का राजनीतिक परिणाम क्या होता है और किस पार्टी को इसका फायदा या नुकसान होता है।