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माघ पूर्णिमा कब है 2026? 1 या 2 फरवरी, जानिए स्नान-दान की सही तिथि

माघ पूर्णिमा कब है 2026? 1 या 2 फरवरी, जानिए स्नान-दान की सही तिथि
माघ पूर्णिमा कब है 2026? 1 या 2 फरवरी, जानिए स्नान-दान की सही तिथि

माघ पूर्णिमा 2026 को लेकर फैला भ्रम अब साफ हो गया है। पंचांग के अनुसार स्नान-दान और व्रत 1 फरवरी 2026 को ही करना श्रेष्ठ रहेगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में किया गया स्नान, पूजा और दान विशेष पुण्य प्रदान करता है।

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Dipali Kumari
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Magh Purnima 2026: माघ मास को सनातन परंपरा में पुण्य का महीना माना जाता है और इसी मास की पूर्णिमा तिथि को माघ पूर्णिमा का व्रत रखा जाता है। हर साल की तरह इस बार भी माघ पूर्णिमा 2026 को लेकर श्रद्धालुओं के मन में कई तरह के सवाल हैं। सबसे बड़ा कंफ्यूजन यही है कि स्नान-दान 1 फरवरी को किया जाए या 2 फरवरी को। किसी पंचांग में एक तारीख बताई जा रही है तो कहीं दूसरी। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि सही तिथि और मुहूर्त को साफ-साफ समझा जाए, ताकि श्रद्धालु बिना भ्रम के अपना धार्मिक कर्तव्य निभा सकें।

माघ पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, संयम और दान का प्रतीक मानी जाती है। इसी दिन कल्पवास का समापन भी होता है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है।

माघ पूर्णिमा 2026 की सही तिथि

पंचांग के अनुसार माघ पूर्णिमा की तिथि 1 फरवरी 2026 को सुबह 5 बजकर 52 मिनट से शुरू हो रही है और 2 फरवरी 2026 को सुबह 3 बजकर 38 मिनट पर समाप्त होगी। सनातन परंपरा में व्रत, स्नान और दान का निर्णय उदयातिथि के आधार पर किया जाता है।

इसी कारण माघ पूर्णिमा का व्रत, स्नान और दान 1 फरवरी 2026, रविवार को ही करना श्रेष्ठ और शास्त्रसम्मत माना गया है। यही वजह है कि विद्वान ज्योतिषी और धार्मिक आचार्य 1 फरवरी को ही माघ पूर्णिमा मानने की सलाह दे रहे हैं।

क्यों पैदा हुआ तिथि को लेकर भ्रम

आजकल सोशल मीडिया और अलग-अलग कैलेंडर के कारण तिथियों को लेकर भ्रम आम बात हो गई है। कुछ लोग पूर्णिमा की समाप्ति तिथि को देखते हैं, तो कुछ शुरुआत को। लेकिन शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि जिस दिन सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि हो, उसी दिन स्नान-दान किया जाता है। 1 फरवरी की सुबह सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए यही सही दिन है।

माघ पूर्णिमा 2026 स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

माघ पूर्णिमा पर स्नान और दान का विशेष महत्व ब्रह्म मुहूर्त में बताया गया है। 1 फरवरी 2026 को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 24 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।

इस समय में गंगा, यमुना, सरस्वती या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। जिन लोगों के लिए नदी में स्नान संभव नहीं है, वे घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।

माघ पूर्णिमा की पूजा विधि सरल शब्दों में

माघ पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनें और घर के पूजा स्थल को शुद्ध करें। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
पीले फूल, तुलसी दल, दीपक और नैवेद्य अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम या विष्णु मंत्रों का पाठ करें।

इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र, तिल, घी या धन का दान करें। माना जाता है कि इस दिन किया गया दान कभी निष्फल नहीं जाता।

माघ पूर्णिमा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता है कि माघ पूर्णिमा के दिन देवता पृथ्वी पर आते हैं और पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। यही कारण है कि प्रयागराज संगम जैसे तीर्थ स्थलों पर इस दिन विशेष भीड़ देखने को मिलती है।

कल्पवास करने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह दिन अत्यंत भावुक होता है, क्योंकि महीनों की तपस्या और नियमों का समापन इसी दिन होता है। कहा जाता है कि माघ मास में नियम, संयम और श्रद्धा से किया गया स्नान-दान सौ गुना फल देता है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।