सरकारी स्कूलों की बदहाली को लेकर कांग्रेस ने उठाई आवाज
कोलकाता में आज कांग्रेस पार्टी ने सरकारी स्कूलों की खराब हालत के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन आदर्श हिंदी स्कूल के सामने हुआ जो रबींद्र सरोवर मेट्रो गेट नंबर छह के पास है। इस प्रदर्शन में कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। उन्होंने राज्य सरकार की शिक्षा नीति पर सवाल उठाए और कई मांगें रखीं।
कांग्रेस का कहना है कि पश्चिम बंगाल में सरकारी स्कूलों की हालत बहुत खराब है। स्कूलों में न तो पूरे टीचर हैं और न ही जरूरी सुविधाएं। पार्टी ने आठ बड़ी मांगें सरकार के सामने रखी हैं।
शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे स्कूल
कांग्रेस की पहली मांग शिक्षकों की कमी को लेकर है। पार्टी का कहना है कि बहुत से सरकारी स्कूलों में पूरे टीचर नहीं हैं। कई स्कूलों में एक टीचर को कई कक्षाओं को पढ़ाना पड़ता है। इससे बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है। कांग्रेस ने कहा कि इसके लिए पूरी तरह से राज्य का शिक्षा विभाग जिम्मेदार है क्योंकि शिक्षक भर्ती बंद कर दी गई है।
जब स्कूलों में टीचर ही नहीं होंगे तो बच्चे कैसे पढ़ेंगे यह एक बड़ा सवाल है। सरकार को जल्द से जल्द नए टीचरों की भर्ती करनी चाहिए। बच्चों का भविष्य दांव पर है और सरकार चुप बैठी है।
अभिभावकों से डोनेशन लेना गैरकानूनी
दूसरी बड़ी समस्या यह है कि कई सरकारी स्कूल अभिभावकों से डोनेशन लेकर चल रहे हैं। कांग्रेस ने इसे पूरी तरह से गैरकानूनी और गलत बताया है। जब सरकार स्कूलों को पैसा नहीं देती तो स्कूल मजबूर होकर मां बाप से पैसे मांगते हैं। यह बहुत शर्मनाक बात है।
गरीब परिवारों के बच्चे सरकारी स्कूलों में इसलिए पढ़ते हैं क्योंकि उनके पास प्राइवेट स्कूल की फीस देने के पैसे नहीं होते। अब अगर सरकारी स्कूल भी डोनेशन मांगने लगें तो गरीब बच्चे कहां जाएंगे। सरकार को इस पर तुरंत रोक लगानी चाहिए।
मिड डे मील में बड़ी गड़बड़ी
कांग्रेस ने मिड डे मील योजना की खराब हालत पर भी चिंता जताई है। पार्टी का कहना है कि बच्चों को जो खाना मिलता है वह न तो अच्छी क्वालिटी का होता है और न ही पूरा मिलता है। इससे बच्चों की सेहत और पोषण दोनों पर बुरा असर पड़ रहा है।
मिड डे मील का मकसद था कि गरीब बच्चों को स्कूल में अच्छा खाना मिले जिससे वे सेहतमंद रहें और पढ़ाई कर सकें। लेकिन आज यह योजना बस कागजों पर रह गई है। बच्चों के साथ धोखा हो रहा है और सरकार आंखें बंद किए बैठी है।
लड़कियों के स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव
कांग्रेस ने लड़कियों के स्कूलों की हालत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि गर्ल्स स्कूलों में बहुत सी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। टॉयलेट की हालत खराब है। सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। सैनिटरी वेंडिंग मशीन या तो खराब हैं या हैं ही नहीं।
लड़कियों की शिक्षा और सुरक्षा दोनों जरूरी हैं। जब स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं नहीं होंगी तो लड़कियां स्कूल कैसे जाएंगी। सरकार को तुरंत इन समस्याओं को दूर करना चाहिए।
आदर्श हिंदी गर्ल्स स्कूल में हायर सेकेंडरी की मांग
कांग्रेस की एक अहम मांग आदर्श हिंदी गर्ल्स स्कूल में बारहवीं तक पढ़ाई की सुविधा शुरू करने की है। पार्टी का कहना है कि यह सुविधा फौरन शुरू होनी चाहिए। इससे लड़कियों को आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे स्कूल नहीं जाना पड़ेगा।
जब लड़कियों को अपने ही स्कूल में बारहवीं तक पढ़ने का मौका मिलेगा तो ड्रॉप आउट कम होगा। सरकार को इस दिशा में जल्द कदम उठाने चाहिए।
सरकारी स्कूलों को बंद करने की साजिश
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार धीरे धीरे सरकारी स्कूलों को बंद कर रही है। पार्टी ने सवाल उठाया कि यह किसके फायदे के लिए हो रहा है। क्या सरकार प्राइवेट स्कूलों को फायदा पहुंचाना चाहती है।
टालीगंज आदर्श विद्यापीठ को बंद किया जा रहा है। कांग्रेस ने पूछा कि यह किसके आदेश पर और किसके फायदे के लिए हो रहा है। यह एक बड़ा सवाल है जिसका जवाब सरकार को देना होगा।
ईएसआई स्कूलों को परेशान करना बंद हो
कांग्रेस ने मांग की है कि ईएसआई स्कूलों को छोटी छोटी बातों पर नोटिस भेजना बंद किया जाए। ये स्कूल पहले से ही मुश्किलों में हैं और सरकार उन्हें और परेशान कर रही है। यह सही नहीं है।
शिक्षा का अधिकार खतरे में
कांग्रेस का कहना है कि संविधान ने हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार दिया है। लेकिन राज्य सरकार इस अधिकार को कमजोर कर रही है। जब सरकारी स्कूल कमजोर होंगे तो गरीब बच्चे पढ़ाई से वंचित रह जाएंगे।
पार्टी ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज की नींव होती है। अगर यह नींव कमजोर हुई तो देश का भविष्य अंधेरे में चला जाएगा। सरकार को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
कांग्रेस की चेतावनी
कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए तो पार्टी अपना आंदोलन और तेज करेगी। पार्टी ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। सरकार को जवाब देना होगा कि सरकारी स्कूलों की इतनी बुरी हालत क्यों है।
आज का यह विरोध प्रदर्शन शिक्षा के मुद्दे पर एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई की शुरुआत हो सकती है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।