पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर से चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। SIR यानी Summary of Inclusion and Revision प्रक्रिया को लेकर आम लोगों को हो रही परेशानियों का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को चिट्ठी लिखी है। इतना ही नहीं, ममता बनर्जी ने कहा है कि वह इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगी और जरूरत पड़ी तो खुद ही लोगों की तरफ से पैरवी करेंगी।
रविवार को गंगासागर में मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिना तैयारी के SIR प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जिसकी वजह से आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ममता बनर्जी ने यह भी बताया कि इस डर और परेशानी की वजह से कई लोगों की मौत भी हो गई है।
चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग व्हाट्सएप के जरिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि पता नहीं व्हाट्सएप को किसने खरीदा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को व्यंग्य में ‘वैनिश कुमार’ तक कह दिया। मुख्यमंत्री का कहना है कि लोगों के मतदान के अधिकार को छीना जा रहा है और यह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
ममता बनर्जी ने बताया कि करीब 54 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इन लोगों को फॉर्म 7 और फॉर्म 8 भरने का अधिकार था, लेकिन उन्हें मौका नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।
हियरिंग के नाम पर हो रही परेशानी
मुख्यमंत्री ने कहा कि हियरिंग के नाम पर लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हियरिंग की लाइन में खड़े रहते हुए भी कुछ लोगों की मौत हो गई। इस तरह की घटनाएं बेहद दुखद हैं और इसकी जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है। ममता बनर्जी ने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से गलत तरीके से चलाई जा रही है और इससे लोगों का जीवन खतरे में पड़ रहा है।
तृणमूल कांग्रेस की तरफ से यह लगातार कहा जा रहा है कि SIR प्रक्रिया में बड़ी गड़बड़ियां हैं। पार्टी का आरोप है कि खासतौर पर तृणमूल समर्थकों के नाम जानबूझकर मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। इस मामले को लेकर पार्टी ने कई बार विरोध प्रदर्शन भी किया है।
कानूनी लड़ाई की तैयारी
ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि अब वह कानूनी रास्ता अपनाएंगी। उन्होंने कहा कि सोमवार को कोर्ट खुलेगा और वह इस मामले को कोर्ट में ले जाएंगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह खुद सुप्रीम कोर्ट में जाकर लोगों की तरफ से पैरवी करेंगी।
ममता बनर्जी ने यह भी याद दिलाया कि वह खुद एक वकील हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह वकील की हैसियत से नहीं, बल्कि एक आम नागरिक के तौर पर अदालत में बोलना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वह अदालत से अनुमति लेकर यह बताना चाहती हैं कि जमीनी स्तर पर क्या हो रहा है। लोगों को किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, यह सब वह अदालत के सामने रखेंगी।
बीजेपी पर भी निशाना
इस पूरे मामले में ममता बनर्जी ने बीजेपी को भी जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि केंद्र की बीजेपी सरकार और चुनाव आयोग मिलकर पश्चिम बंगाल में उनकी सरकार को परेशान करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सब राजनीतिक साजिश का हिस्सा है।
तृणमूल कांग्रेस का यह आरोप है कि पश्चिम बंगाल में जानबूझकर SIR प्रक्रिया को जटिल बनाया गया है। दूसरे राज्यों में यह प्रक्रिया इतनी मुश्किल नहीं है। पार्टी का कहना है कि यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि आने वाले चुनावों में तृणमूल को नुकसान पहुंचाया जा सके।
जनता की आवाज बनीं ममता
ममता बनर्जी ने अपने भाषण में कहा कि वह जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ेंगी। उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और इसे छीना नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस मामले में पीछे नहीं हटेंगी और जब तक लोगों को न्याय नहीं मिलता, तब तक लड़ती रहेंगी।
गंगासागर में जमा हजारों लोगों के सामने ममता बनर्जी ने यह ऐलान किया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ तृणमूल की नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल के हर उस नागरिक की है जिसके नाम को मतदाता सूची से हटाया गया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे डरें नहीं और अपने अधिकारों के लिए लड़ें।
आगे की रणनीति
तृणमूल कांग्रेस ने इस मामले को लेकर पूरी रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी के वकील और कानूनी टीम इस पर काम कर रही है। सोमवार से ही कानूनी कार्रवाई शुरू हो जाएगी। पार्टी का कहना है कि वह हर स्तर पर इस अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ेगी।
ममता बनर्जी का यह कदम काफी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक जाता है तो यह देशभर में चर्चा का विषय बन जाएगा। इससे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होंगे।
पश्चिम बंगाल में इस मुद्दे को लेकर काफी गर्मागर्म बहस चल रही है। विपक्षी दल बीजेपी ने अभी तक इस पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी बड़ा रूप ले सकता है।
ममता बनर्जी की यह चेतावनी साफ तौर पर बताती है कि वह इस मामले को हल्के में नहीं ले रही हैं। उनका कहना है कि जनता के अधिकारों की रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है और वह इसे पूरी तरह से निभाएंगी। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या होता है और चुनाव आयोग इस पर क्या रुख अपनाता है।