पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक अहम नाम मुकुल रॉय का शनिवार को निधन हो गया। लंबे समय से बीमार चल रहे 72 वर्षीय तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कोलकाता के एपोलो अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय ने इस दुखद खबर की पुष्टि की। मुकुल रॉय का नाम बंगाल की राजनीति में एक ऐसे नेता के रूप में जाना जाता था, जिन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे और पार्टी बदली, लेकिन अंत में अपनी पहली पार्टी तृणमूल कांग्रेस में ही वापस लौट आए।
मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर
मुकुल रॉय पश्चिम बंगाल की राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं में से एक थे, जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस को शुरुआत से खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई। 1998 में जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की, उसी समय मुकुल रॉय पार्टी में शामिल हुए। उस वक्त से लेकर कई वर्षों तक वे ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगियों में गिने जाते थे। पार्टी के संगठन को मजबूत बनाने और चुनावी रणनीति तैयार करने में उनकी अहम भूमिका रही। रेलवे बोर्ड के सदस्य भी रह चुके मुकुल रॉय को पार्टी संगठन का माहिर माना जाता था।

बीजेपी में शामिल होने का फैसला
2018 में मुकुल रॉय ने एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाया और तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। उस समय यह फैसला पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ी हलचल मचा गया था। कई लोगों ने इसे ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका माना। बीजेपी में शामिल होने के बाद मुकुल रॉय ने पार्टी को बंगाल में मजबूत करने की कोशिश की। उन्होंने कई तृणमूल नेताओं को बीजेपी में शामिल करवाने में भी अहम भूमिका निभाई। लेकिन यह दौर ज्यादा लंबा नहीं चला।

तृणमूल में वापसी और घर वापसी की कहानी
2021 में विधानसभा चुनावों के बाद मुकुल रॉय ने फिर से एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने बीजेपी छोड़कर फिर से तृणमूल कांग्रेस में वापसी की। इस वापसी को राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा का विषय बनाया गया। कई लोगों ने इसे घर वापसी कहा तो कुछ ने इसे राजनीतिक चाल माना। लेकिन मुकुल रॉय ने अपनी वापसी को दिल की आवाज करार दिया था। उनका कहना था कि तृणमूल कांग्रेस ही उनका असली घर है और वहीं उनका दिल हमेशा से रहा।
लंबी बीमारी और अस्पताल में भर्ती
पिछले कुछ महीनों से मुकुल रॉय की तबीयत लगातार खराब चल रही थी। वे कोलकाता के एपोलो अस्पताल में लंबे समय से भर्ती थे। उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय ने बताया कि पिता की हालत काफी गंभीर थी और डॉक्टरों की पूरी टीम उनका इलाज कर रही थी। हालांकि सभी कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। शनिवार को उन्होंने 72 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे बंगाल की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई।

राजनीतिक हलकों में शोक की लहर
मुकुल रॉय के निधन पर कई राजनीतिक नेताओं ने दुख जताया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के निर्माण में अहम योगदान दिया। बीजेपी के नेताओं ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। सोशल मीडिया पर कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें याद करते हुए उनके राजनीतिक सफर की तारीफ की। मुकुल रॉय को एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जा रहा है, जिन्होंने हमेशा अपने विचारों पर चलने की हिम्मत दिखाई।
परिवार और निजी जीवन
मुकुल रॉय के परिवार में उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय हैं, जो खुद भी राजनीति में सक्रिय हैं। शुभ्रांशु ने भी अपने पिता की तरह तृणमूल कांग्रेस में शामिल होकर राजनीतिक करियर बनाया। मुकुल रॉय का परिवार इस कठिन समय में गहरे दुख में डूबा हुआ है। उनके करीबी साथियों और समर्थकों ने परिवार के साथ इस दुख की घड़ी में खड़े होने का संदेश दिया है।
मुकुल रॉय की विरासत
TMC leader Mukul Roy passes away West Bengal: मुकुल रॉय ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाई। उन्हें एक कुशल रणनीतिकार और संगठनकर्ता के रूप में जाना जाता था। उनकी राजनीतिक समझ और अनुभव का लाभ तृणमूल कांग्रेस को मिला। हालांकि उन्होंने बीच में पार्टी बदली, लेकिन अंत में अपनी जड़ों की तरफ लौट आए। उनके निधन से बंगाल की राजनीति में एक खालीपन आ गया है, जिसे भरना आसान नहीं होगा। उनकी याद हमेशा बंगाल की राजनीति में जीवित रहेगी।