Rashtra Bharat Logo

पश्चिम बंगाल में मोमो फैक्ट्री हादसे के बाद शुभेंदु अधिकारी का निरीक्षण, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर साधा निशाना

पश्चिम बंगाल में मोमो फैक्ट्री हादसे के बाद शुभेंदु अधिकारी का निरीक्षण, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर साधा निशाना
Subhendu Adhikari Momo Factory Inspection: पश्चिम बंगाल में मोमो फैक्ट्री हादसे के बाद विपक्षी नेता का निरीक्षण और ममता सरकार पर आरोप (File Photo)

Subhendu Adhikari Momo Factory Inspection: गुरुवार को शुभेंदु अधिकारी ने आनंदपुर मोमो फैक्ट्री का निरीक्षण किया जहां हादसे में कई लोगों की मौत हुई। उन्होंने CM ममता बनर्जी पर राजधर्म न निभाने का आरोप लगाया और कहा कि फैक्ट्री से डेढ़ लाख रुपये की अवैध वसूली हो रही थी। उन्होंने सवाल उठाया कि अन्य नेताओं को आने दिया गया लेकिन उन्हें रोका गया।

Updated:
·by
Asfi Shadab
Asfi Shadab
Share:

विषयसूची

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। गुरुवार को विपक्षी नेता शुभेंदु अधिकारी ने आनंदपुर स्थित एक मोमो फैक्ट्री का निरीक्षण किया। इस फैक्ट्री में हाल ही में एक बड़ा हादसा हुआ था जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी। शुभेंदु अधिकारी ने इस मौके पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। साथ ही उन्होंने फैक्ट्री से अवैध वसूली के भी गंभीर आरोप लगाए।

शुभेंदु अधिकारी ने अपने बयान में कहा कि इस कारखाने से हर महीने डेढ़ लाख रुपये अवैध तरीके से लिए जा रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतनी बड़ी घटना हुई है तो मुख्यमंत्री ने अब तक घटनास्थल का दौरा क्यों नहीं किया। उन्होंने कहा कि यह जगह मुख्यमंत्री के घर से सिर्फ 10 किलोमीटर की दूरी पर है, फिर भी वह यहां नहीं आईं।

विपक्षी नेता की ओर से मुख्यमंत्री पर आरोप

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यहां मौत का मंजर है। इतनी बड़ी दुर्घटना के बाद मुख्यमंत्री का यहां आना जरूरी था। लेकिन वह अपनी जिम्मेदारी से भाग रही हैं। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी प्रशासनिक प्रमुख हैं और उन्हें राजधर्म का पालन करना चाहिए था। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

शुभेंदु ने यह भी कहा कि मेयर फिरहाद हाकिम, अरूप बिस्वास और सुजीत बोस जैसे तृणमूल कांग्रेस के नेता घटनास्थल पर आए और किसी ने उन्हें नहीं रोका। लेकिन जब वह खुद निरीक्षण के लिए आए तो उन्हें रोकने की कोशिश की गई। उन्होंने सवाल किया कि यह भेदभाव क्यों हो रहा है।

मोमो फैक्ट्री हादसे की पृष्ठभूमि

आनंदपुर में स्थित इस मोमो फैक्ट्री में कुछ दिन पहले एक बड़ा हादसा हुआ था। हादसे में कई मजदूरों की जान चली गई थी और कई घायल हुए थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस फैक्ट्री में सुरक्षा के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों को उचित सुविधाएं भी नहीं दी जा रही थीं।

घटना के बाद से स्थानीय लोगों में गुस्सा है। वे प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर समय पर सही कदम उठाए गए होते तो यह हादसा टाला जा सकता था।

अवैध वसूली के गंभीर आरोप

शुभेंदु अधिकारी ने जो सबसे बड़ा आरोप लगाया है वह अवैध वसूली का है। उन्होंने दावा किया कि इस मोमो फैक्ट्री से हर महीने डेढ़ लाख रुपये की वसूली की जा रही थी। यह रकम किसे और किस मकसद से दी जा रही थी, इसकी जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर इस तरह की अवैध वसूली चल रही थी तो प्रशासन को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी। क्या प्रशासन भी इसमें शामिल था? ये वे सवाल हैं जिनका जवाब मिलना चाहिए।

राजनीतिक घमासान तेज

इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। भाजपा नेताओं ने ममता बनर्जी सरकार पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप लगाए हैं। वहीं तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने शुभेंदु अधिकारी पर राजनीति करने का आरोप लगाया है।

तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि शुभेंदु अधिकारी बिना किसी सबूत के आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री की चुप्पी पर सवाल

इस पूरे मामले में जो सबसे अहम सवाल उठ रहा है वह है मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चुप्पी। आम तौर पर ममता बनर्जी किसी भी बड़ी घटना पर तुरंत प्रतिक्रिया देती हैं और घटनास्थल पर जाती हैं। लेकिन इस मामले में उनकी ओर से अब तक कोई बयान नहीं आया है।

विपक्ष का कहना है कि यह सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है। जब आम लोग मुसीबत में हों तो सरकार को उनके साथ खड़ा होना चाहिए। लेकिन यहां ऐसा नहीं हो रहा है।

सुरक्षा मानकों का सवाल

इस घटना ने एक बार फिर छोटे कारखानों में सुरक्षा मानकों के सवाल को उठा दिया है। पश्चिम बंगाल में हजारों छोटे कारखाने चल रहे हैं जहां सुरक्षा के नियमों का पालन नहीं होता। मजदूरों को खतरनाक हालात में काम करना पड़ता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को इन कारखानों की नियमित जांच करनी चाहिए। सुरक्षा नियमों का पालन न करने वालों पर सख्त कार्रवाी होनी चाहिए। साथ ही मजदूरों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।

आगे की राह

इस घटना के बाद देखना होगा कि सरकार क्या कदम उठाती है। क्या सिर्फ जांच के आदेश देकर मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा या फिर वास्तव में दोषियों को सजा मिलेगी। अवैध वसूली के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ समय से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है। लेकिन सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहे हैं। यह स्थिति आम जनता के लिए चिंता का विषय है।

आनंदपुर मोमो फैक्ट्री हादसे ने एक बार फिर साबित किया है कि छोटे कारखानों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। शुभेंदु अधिकारी के आरोप चाहे राजनीतिक हों या नहीं, लेकिन अवैध वसूली और सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसे मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए इस मामले में सामने आना चाहिए और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना चाहिए।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।

Asfi Shadab

Asfi Shadab

असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।