जब दो देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर तनाव चरम पर हो, तब सीमा पर तैनात जवानों का एक-दूसरे के प्रति सौहार्दपूर्ण व्यवहार न केवल आश्चर्यजनक होता है, बल्कि मानवीय रिश्तों की गहराई को भी दर्शाता है। कुछ ऐसा ही नजारा 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर देखने को मिला। यहां दोनों देशों के सीमा रक्षकों ने मिठाई का आदान-प्रदान कर यह साबित किया कि राजनीतिक मतभेद कभी भी इंसानियत से बड़े नहीं हो सकते।
सीमा पर मिठास भरा पल
गेदे सीमा चौकी पर तैनात भारतीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की 32वीं बटालियन के जवानों ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड (बीजीबी) के सीमा रक्षकों को मिठाई की थाली भेंट की। इस सौहार्दपूर्ण पहल का जवाब बांग्लादेशी सीमा रक्षकों ने भी उतनी ही गर्मजोशी से दिया और भारतीय जवानों को मिठाई देकर उन्हें भी मीठा मुंह कराया। यह दृश्य उस समय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में खटास चल रही है।
कूटनीतिक तनाव के बीच सौहार्द का संदेश
वर्तमान में भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध किसी भी तरह से मधुर नहीं कहे जा सकते। दोनों देशों के बीच विभिन्न मुद्दों पर आलोचनाओं का दौर जारी है। ऐसे कठिन समय में जब दोनों पक्षों की ओर से कड़े बयान आ रहे हैं, सीमा पर तैनात जवानों का यह व्यवहार एक सकारात्मक संदेश देता है। यह दर्शाता है कि राजनीतिक स्तर पर चाहे जो भी हो, धरातल पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच आपसी सम्मान और भाईचारा बरकरार है।
गणतंत्र दिवस के विशेष आयोजन
77वें गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में सीमा के हर गेट पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। नदिया के गेदे सीमा क्षेत्र में 32वीं बटालियन की ओर से सुबह राष्ट्रीय ध्वजारोहण किया गया। इसके बाद देशभक्ति गीतों का कार्यक्रम, हथियारों की प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस विशेष दिन को यादगार बनाने के लिए पड़ोसी देश बांग्लादेश के सीमा रक्षकों के साथ मिठाई का आदान-प्रदान किया गया।
जनता की प्रतिक्रिया और भावनाएं
भारत की ओर से मिली मिठाई और आतिथ्य को पाकर बांग्लादेशी सीमा रक्षक काफी प्रसन्न दिखे। उन्होंने भी उतनी ही गर्मजोशी से भारतीय जवानों का स्वागत किया। स्थानीय भारतीय जनता ने भी बांग्लादेशी सीमा रक्षकों के इस सौहार्दपूर्ण व्यवहार की सराहना की। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि सरकारी स्तर पर मतभेद हों, लेकिन जमीनी स्तर पर दोनों देशों के लोगों के बीच प्रेम और सम्मान की भावना अब भी जीवित है।
इस घटना ने यह संदेश दिया कि राजनीतिक और कूटनीतिक मुद्दे चाहे कितने भी जटिल हों, मानवीय संबंधों की नींव उससे कहीं अधिक मजबूत होती है। सीमा पर तैनात जवानों का यह व्यवहार दोनों देशों के लिए एक सबक है कि संवाद और सौहार्द से हर समस्या का समाधान संभव है।