चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के बसीरहाट-द्वितीय क्षेत्र में चुनावी नियमों के गंभीर उल्लंघन के मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और खंड विकास अधिकारी सुमित्र प्रतिम प्रधान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह निर्णय मतदाता सूची से जुड़े कामों में हुई गंभीर लापरवाही और कानूनी प्रावधानों की अनदेखी के बाद लिया गया है।
चुनाव आयोग का सख्त रुख
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को भेजे एक पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निलंबित अधिकारी को चुनावी कार्यों से पूरी तरह अलग कर दिया जाए। आयोग ने इस मामले को गंभीर कदाचार और कानूनी प्रावधानों का खुला उल्लंघन बताया है। यह कदम दर्शाता है कि चुनाव आयोग चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखने के लिए किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगा।
क्या था पूरा मामला
मामले की जांच में यह सामने आया कि सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी सुमित्र प्रतिम प्रधान ने चार अधिकारियों को अतिरिक्त सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के रूप में नियुक्त कर दिया था। इन अधिकारियों को मतदाता सूची में विसंगतियों से जुड़ी सुनवाई का काम सौंपा गया था। हालांकि, यह पूरी नियुक्ति ही गैरकानूनी थी क्योंकि इन अधिकारियों को जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 13सी के तहत कभी भी औपचारिक रूप से सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के पद पर नियुक्त ही नहीं किया गया था।
कानूनी प्रावधानों की अनदेखी
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 13सी में साफ तौर पर यह प्रावधान है कि सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी की नियुक्ति एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही की जा सकती है। बिना उचित अधिकार के किसी को भी इस पद पर नियुक्त करना कानून का गंभीर उल्लंघन माना जाता है। इस मामले में अधिकारी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर चार अधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंप दी, जो पूरी तरह से गैरकानूनी था।
मतदाता सूची में विसंगतियों का मुद्दा
मतदाता सूची में विसंगतियां चुनावी प्रक्रिया के लिए एक गंभीर चिंता का विषय हैं। जब मतदाता सूची में गड़बड़ियां होती हैं तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। ऐसे में इन विसंगतियों को दूर करने के लिए सुनवाई की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। लेकिन जब यह काम ही गैरकानूनी तरीके से नियुक्त अधिकारियों को सौंपा जाए तो पूरी प्रक्रिया की वैधता पर सवाल खड़े हो जाते हैं।
चुनाव आयोग के निर्देश
चुनाव आयोग ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आयोग ने राज्य सरकार से कहा है कि निलंबित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई तुरंत शुरू की जाए। साथ ही, 48 घंटे के अंदर एक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजी जाए। इतना ही नहीं, आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई की स्थिति के बारे में नियमित रूप से जानकारी दी जाती रहे।
पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया
पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया हमेशा से ही चर्चा का विषय रही है। राज्य की राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए यहां चुनाव आयोग विशेष रूप से सतर्क रहता है। बसीरहाट उत्तर 24 परगना जिले का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जहां की राजनीति काफी सक्रिय रहती है। ऐसे में किसी भी तरह की अनियमितता पूरे चुनावी तंत्र पर सवाल खड़े कर सकती है।
अनुशासनात्मक कार्रवाई का महत्व
चुनाव आयोग द्वारा की गई यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि चुनावी कानूनों और नियमों का पालन सबसे जरूरी है। किसी भी अधिकारी को, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो, अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम करने की छूट नहीं है। यह कदम अन्य अधिकारियों के लिए भी एक चेतावनी है कि चुनावी कामों में किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
48 घंटे की समय सीमा
चुनाव आयोग ने जो 48 घंटे की समय सीमा दी है, वह इस मामले की गंभीरता को दर्शाती है। आयोग चाहता है कि इस मामले में तुरंत कार्रवाई हो और कोई भी देरी न की जाए। यह समय सीमा यह भी सुनिश्चित करती है कि राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से ले और जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करे।
चुनावी सुधार की दिशा में कदम
यह घटना चुनावी प्रक्रिया में सुधार की जरूरत को भी रेखांकित करती है। मतदाता सूची की तैयारी और उसमें सुधार की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने की जरूरत है। साथ ही, चुनावी अधिकारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण और कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी जरूरी है ताकि ऐसी गलतियां दोबारा न हों।
जनता का विश्वास बनाए रखना
लोकतंत्र में जनता का चुनावी प्रक्रिया पर विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है। जब भी चुनावी तंत्र में कोई गड़बड़ी सामने आती है तो इससे जनता का विश्वास डगमगाता है। चुनाव आयोग की यह त्वरित और सख्त कार्रवाई यह दिखाती है कि व्यवस्था जागरूक है और किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आगे की राह
Election Commission suspends Basirhat AERO: अब यह देखना होगा कि राज्य सरकार इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करती है। अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है और क्या इस मामले में कोई और अधिकारी भी शामिल पाए जाते हैं। चुनाव आयोग की सख्ती यह सुनिश्चित करती है कि आने वाले समय में चुनावी अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को और अधिक गंभीरता से लेंगे और कानूनी प्रावधानों का पूरी तरह से पालन करेंगे।
यह पूरा प्रकरण यह साबित करता है कि चुनाव आयोग देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की गड़बड़ी पर सख्त कार्रवाई करने में पीछे नहीं हटता।