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बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की हत्या, पेट्रोल छिड़ककर जिंदा जलाया!

बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या
बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या (Pic Credit- X @DrEBhaskarrao)
बांग्लादेश में चुनावी माहौल के बीच हिंदू समुदाय पर हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। नरसिंदी में चंचल भौमिक की जिंदा जलाकर हत्या और गाजीपुर में व्यवसायी की मौत ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कट्टरपंथी बयानों ने हालात और बिगाड़े हैं।
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Bangladesh Hindu Violence: बांग्लादेश में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे वहां का माहौल और अधिक असहज व भयावह होता जा रहा है। लोकतंत्र का पर्व कहे जाने वाले चुनावी दौर में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हो रहे हमले यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या बांग्लादेश में आज भी सभी नागरिक समान रूप से सुरक्षित हैं। हाल के दिनों में सामने आई घटनाएं सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि समाज के भीतर पनप रही नफरत और कट्टरता का आईना हैं।

नरसिंदी की घटना ने झकझोर दिया

शुक्रवार की रात नरसिंदी जिले में जो हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। 23 वर्षीय चंचल भौमिक, जो अपनी छोटी सी दुकान से परिवार का पेट पालता था, को उसकी ही दुकान में जिंदा जला दिया गया। बताया गया कि चंचल रात में अपने गैरेज में सो रहा था। हमलावरों ने बाहर से शटर गिराया, पेट्रोल छिड़का और आग लगा दी।

सबसे भयावह पहलू यह रहा कि चंचल की चीखें सुनकर भी हमलावर वहां से नहीं हटे। वे तब तक मौके पर मौजूद रहे, जब तक उसकी सांसें थम नहीं गईं। यह कोई अचानक हुआ अपराध नहीं लगता, बल्कि पूरी तैयारी और नफरत के साथ अंजाम दिया गया कृत्य प्रतीत होता है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

चंचल भौमिक अपने परिवार का एकमात्र सहारा था। उसके कंधों पर बीमार मां और दिव्यांग भाई की जिम्मेदारी थी। पड़ोसियों के अनुसार, वह शांत स्वभाव का, मेहनती और किसी से विवाद न रखने वाला युवक था। उसकी हत्या ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे इलाके में डर का माहौल पैदा कर दिया है।

परिवार का साफ आरोप है कि यह हत्या धार्मिक विद्वेष से प्रेरित थी, जिसे सामान्य अपराध बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

पहले भी दोहराई जा चुकी है बर्बरता

चंचल भौमिक कोई पहला नाम नहीं है। इससे पहले दीपु चंद्र दास और खोकोन चंद्र दास जैसे हिंदू युवाओं के साथ भी इसी तरह की हिंसक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन मामलों में समानता यह है कि पीड़ित हिंदू समुदाय से थे और हमले अत्यंत क्रूर तरीके से किए गए।

यह घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा अब अपवाद नहीं, बल्कि एक चिंताजनक प्रवृत्ति बनती जा रही है।

कट्टरपंथी बयानों से भड़की आग

इस हिंसा को हवा देने का काम कुछ कट्टरपंथी संगठनों और नेताओं द्वारा खुलेआम किया जा रहा है। जमात-ए-इस्लामी से जुड़े नेता और बरगुना-2 सीट से उम्मीदवार अफजल हुसैन के बयान ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

एक चुनावी सभा में अफजल हुसैन ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि 80 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले देश की संसद में गैर-मुस्लिमों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। इतना ही नहीं, उन्होंने संविधान को नकारते हुए मध्ययुगीन दंड विधान लागू करने की वकालत भी की।

गाजीपुर में व्यवसायी की पीट-पीटकर हत्या

नरसिंदी की घटना से पहले गाजीपुर जिले में भी एक हिंदू व्यवसायी की निर्मम हत्या ने लोगों को स्तब्ध कर दिया था। केले को लेकर हुए मामूली विवाद में लिटन चंद्र घोष को तीन लोगों ने पीट-पीटकर मार डाला।

लिटन ‘बैशाखी स्वीटमीट एंड होटल’ का मालिक था। पुलिस के अनुसार, केले के एक गुच्छे को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते हिंसा में बदल गया। आरोपी एक ही परिवार के सदस्य बताए गए हैं।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।