बांग्लादेश में आगामी संसदीय चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। देश की सबसे बड़ी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वर्तमान में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए अनुकूल माहौल नहीं है। पार्टी ने अंतरिम सरकार के एक वर्ग पर किसी खास राजनीतिक दल का पक्ष लेने का आरोप भी लगाया है। यह बयान 12 फरवरी को होने वाले महत्वपूर्ण आम चुनाव से ठीक पहले आया है, जो देश की राजनीतिक दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।
जमात की उच्च स्तरीय बैठक में क्या हुआ
सोमवार को ढाका में जमात-ए-इस्लामी की केंद्रीय कार्यकारी परिषद की एक अहम बैठक आयोजित की गई। पार्टी के प्रमुख डॉक्टर शफीकुर रहमान की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में देश के राजनीतिक हालात की गहन समीक्षा की गई। बैठक के बाद जारी बयान में पार्टी ने संसदीय चुनाव को लेकर अपनी चिंताएं और आशंकाएं सार्वजनिक कीं।
बैठक में पार्टी नेताओं ने देश भर से मिल रही शिकायतों पर विस्तार से चर्चा की। जमात के नेताओं ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों से लगातार ऐसी सूचनाएं मिल रही हैं जिनमें यह आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ सरकारी अधिकारी एक खास राजनीतिक दल के पक्ष में काम कर रहे हैं। हालांकि पार्टी ने किसी संगठन या दल का नाम नहीं लिया, लेकिन इशारे साफ थे।
सरकारी अधिकारियों पर पक्षपात के आरोप
जमात-ए-इस्लामी ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा है कि कई सरकारी अधिकारी निष्पक्षता की अपनी जिम्मेदारी से भटक रहे हैं। पार्टी को देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी शिकायतें मिली हैं जिनमें आरोप लगाया गया है कि प्रशासनिक अधिकारी एक विशेष राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने में लगे हुए हैं। यह स्थिति चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि ऐसे में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद करना मुश्किल है। जब तक सरकारी तंत्र पूरी तरह से तटस्थ नहीं रहेगा, तब तक चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठते रहेंगे। जमात ने मांग की है कि सभी सरकारी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए जाएं कि वे किसी भी दल का पक्ष न लें।
पार्टी कार्यकर्ताओं की हत्या पर चिंता
जमात-ए-इस्लामी ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया है। पार्टी नेताओं ने देश के विभिन्न हिस्सों में अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं की लगातार हो रही हत्याओं पर गहरी चिंता जताई है। पार्टी का दावा है कि उनके कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है और इन हत्याओं के पीछे राजनीतिक साजिश है।
यह स्थिति चुनावी माहौल को और खराब बना रही है। जब किसी पार्टी के कार्यकर्ता सुरक्षित नहीं हैं, तो स्वतंत्र रूप से चुनाव प्रचार कैसे संभव हो सकता है? जमात ने इन हत्याओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है और दोषियों को सजा दिलाने का आग्रह किया है।
बदलता राजनीतिक परिदृश्य
बांग्लादेश में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग को देश के कड़े आतंकवाद रोधी कानून के तहत चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है। इससे राजनीतिक मैदान में एक बड़ा बदलाव आया है।
अब दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी को अगली सरकार बनाने की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है। बीएनपी के पास सत्ता में वापसी का सुनहरा मौका है। लेकिन जमात-ए-इस्लामी भी इस बार मजबूत दावेदारी पेश कर रही है।
जमात और बीएनपी का पुराना रिश्ता
जमात-ए-इस्लामी और बीएनपी का पुराना राजनीतिक रिश्ता रहा है। 2001 से 2006 के दौरान जमात, बीएनपी की गठबंधन सहयोगी थी। दोनों पार्टियों ने मिलकर सरकार चलाई थी। लेकिन इस बार स्थिति अलग है। जमात अब बीएनपी के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरी है।
यह बदलाव बांग्लादेश की राजनीति में एक नया मोड़ है। पुराने सहयोगी अब प्रतिद्वंद्वी बन गए हैं। यह स्थिति चुनाव को और रोचक और प्रतिस्पर्धी बना देती है। दोनों पार्टियां अपनी-अपनी ताकत जुटा रही हैं।
निर्वाचन आयोग और कानून एजेंसियों से अपील
जमात-ए-इस्लामी ने निर्वाचन आयोग और कानून लागू करने वाली एजेंसियों से एक खास अपील की है। पार्टी ने मांग की है कि ये संस्थाएं पूरी निष्पक्षता के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करें। चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करना इन संस्थाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
जमात का कहना है कि निर्वाचन आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी दलों को समान अवसर मिले। किसी भी दल के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। कानून लागू करने वाली एजेंसियों को भी तटस्थ रहकर अपना काम करना चाहिए।
कानून और व्यवस्था की मांग
पार्टी ने अंतरिम सरकार से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए कानून और व्यवस्था की उचित व्यवस्था करने का आग्रह किया है। चुनाव के दौरान शांति और सुरक्षा बेहद जरूरी है। बिना अच्छी कानून व्यवस्था के निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है।
जमात का कहना है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि चुनाव के दौरान कोई हिंसा न हो। मतदाताओं को बिना किसी डर के अपना वोट डालने का अधिकार मिलना चाहिए। सभी दलों के कार्यकर्ताओं को सुरक्षा मिलनी चाहिए।
चुनाव का महत्व
12 फरवरी को होने वाला यह चुनाव बांग्लादेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह चुनाव देश की भविष्य की दिशा तय करेगा। अवामी लीग के बाहर होने से राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। अब नई ताकतों को मौका मिलने वाला है।
इस चुनाव में जमात-ए-इस्लामी की भूमिका अहम होगी। पार्टी अपनी मजबूत स्थिति बनाने की कोशिश कर रही है। लेकिन उसकी चिंताएं भी वाजिब हैं। अगर चुनाव निष्पक्ष नहीं हुए, तो परिणाम विवादित हो सकते हैं।
जमात की मांग है कि सभी संस्थाएं मिलकर यह सुनिश्चित करें कि चुनाव पूरी तरह से स्वतंत्र और निष्पक्ष हों। तभी बांग्लादेश की जनता का सही प्रतिनिधित्व सामने आ सकेगा। देश के लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह जरूरी है कि चुनाव प्रक्रिया पर किसी को कोई शक न रहे।