पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग झील इलाके में चीन की गतिविधियां एक बार फिर भारत के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। हालिया सैटेलाइट तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि चीन इस विवादित क्षेत्र में अपनी स्थायी सैन्य मौजूदगी को मजबूत करने के लिए पक्के निर्माण कार्य करवा रहा है। यह खुलासा ऐसे समय पर हुआ है जब भारत और चीन के बीच रिश्तों में कुछ सुधार की बातें हो रही थीं।
सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिखा
नई हाई-रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी से पता चला है कि चीन पैंगोंग त्सो झील के बिल्कुल करीब नए स्थायी सैन्य ढांचों का निर्माण करवा रहा है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, ये तस्वीरें साफ बताती हैं कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) इस इलाके में लंबे समय तक टिके रहने की तैयारी कर रही है। जो इमारतें बनाई जा रही हैं, वे झील से कुछ ही मीटर की दूरी पर स्थित हैं। यह निर्माण सिरिजाप पोस्ट के आसपास हो रहा है, जिस पर 1962 के युद्ध के बाद से चीन का नियंत्रण है। हालांकि भारत इसे अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है और इस पर अपना दावा जताता रहा है।
कहां हो रहा है निर्माण कार्य
यह इलाका मौजूदा बफर ज़ोन के बेहद करीब है। चीन यहां पक्की इमारतें खड़ी कर रहा है, जिससे उसे किसी भी स्थिति में तुरंत संसाधन और सैनिक तैनात करने में आसानी होगी। स्पेस इंटेलिजेंस फर्म ‘Vantor’ द्वारा जारी 28 दिसंबर 2025 की सैटेलाइट तस्वीरों में अस्थायी कैंप के साथ-साथ नए निर्माण स्थल भी साफ देखे जा सकते हैं। पहले यहां केवल अस्थायी ढांचे, नावें और झील पार करने के लिए एक घाट था, लेकिन अब स्थायी इमारतें बनाई जा रही हैं।
सड़क नेटवर्क का इतिहास
चीन ने इस इलाके में 2013 में ही सड़क नेटवर्क विकसित कर लिया था। शुरुआत में इस सड़क का इस्तेमाल भारत और चीन दोनों की सेनाएं गश्त के लिए करती थीं। लेकिन मई 2020 में हुए सैन्य झड़प के बाद से भारतीय सैनिकों को इस इलाके में गश्त की इजाजत नहीं दी गई। तब से चीन ने इस इलाके पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। अब यह सड़क नेटवर्क चीन के नए निर्माण कार्यों में भी बड़ी भूमिका निभा रहा है।
सर्दियों के लिए खास तैयारियां
विशेषज्ञों का मानना है कि ये तैयारियां सर्दियों को ध्यान में रखकर की गई हैं। पिछले साल जून की तस्वीरों में जो नावें झील में दिखाई दे रही थीं, वे अब ढकी हुई और पानी से दूर रखी गई हैं। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि सर्दियों में यह झील पूरी तरह जम जाती है। दिसंबर की तस्वीरों में कई पक्की इमारतें स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं, जो बताती हैं कि 2025 के दूसरे हिस्से में निर्माण की रफ्तार काफी तेज हुई है। इससे चीन की सेना साल भर यहां मौजूदगी बनाए रख सकेगी, चाहे मौसम कैसा भी हो।
भारत-चीन रिश्तों में नरमी के बीच नई चुनौती
बीते एक साल में भारत और चीन के संबंधों में कुछ सुधार देखने को मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात साल बाद चीन का दौरा किया और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। इसके अलावा दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें भी फिर से शुरू हो गई हैं। पूर्वी लद्दाख के सभी टकराव बिंदुओं पर दोनों पक्षों ने डिसएंगेजमेंट यानी तनाव कम करने की बात कही है। लेकिन हालिया सैटेलाइट तस्वीरें जो संकेत दे रही हैं, वे चीन के असली इरादों पर सवाल खड़े करती हैं।
विशेषज्ञों की राय
द इंटेल लैब के जियोस्पेशियल रिसर्चर डेमियन साइमोन ने इस स्थिति पर कहा कि पैंगोंग झील के पास चीन का यह निर्माण कार्य उसकी उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह स्थायी ढांचे बनाकर अपनी मौजूदगी को नियंत्रण में बदल देता है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना 2020 के डिसएंगेजमेंट ज़ोन से बाहर है और साल भर सैन्य संचालन की चीन की क्षमता को मजबूत करती है। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही यह इलाका फिलहाल चीन के नियंत्रण में हो, लेकिन यह भारत द्वारा दावा किए गए विवादित क्षेत्र में आता है। इस तरह का निर्माण भारत की स्थिति को कमजोर करता है।
भारत की स्थिति पर असर
यह निर्माण कार्य भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है। जब एक तरफ दोनों देश तनाव कम करने की बातें कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चीन अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत बना रहा है। इससे साफ होता है कि चीन अपनी रणनीति से पीछे हटने वाला नहीं है। यह स्थिति भारत के लिए सुरक्षा की दृष्टि से चिंताजनक है क्योंकि यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद अहम है।
आगे की चुनौतियां
चीन की यह नई चालबाज़ी भारत के लिए एक गंभीर चेतावनी है। पैंगोंग झील इलाके में चीन की स्थायी मौजूदगी का मतलब है कि वह यहां से हटने वाला नहीं है। भारत को इस स्थिति से निपटने के लिए न केवल सैन्य स्तर पर बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी मजबूत कदम उठाने होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाना चाहिए और चीन पर दबाव बनाना चाहिए। साथ ही अपनी सीमाओं पर निगरानी और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना भी जरूरी है। यह साफ है कि चीन के साथ रिश्तों में सुधार की बातें तभी असरदार होंगी जब जमीनी स्तर पर स्थिति में वास्तविक बदलाव आए। फिलहाल सैटेलाइट तस्वीरें जो कहानी बयान कर रही हैं, वह भारत के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।