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ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का सख्त जवाब, कहा- हस्तक्षेप से होगी तबाही

Trump Warning Iran Response: ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का सख्त जवाब, खामेनेई के सलाहकार ने दी धमकी
Trump Warning Iran Response: ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का सख्त जवाब, खामेनेई के सलाहकार ने दी धमकी (IG Photo)
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी पर ईरान ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। खामेनेई के सलाहकार ने कहा कि अमेरिकी हस्तक्षेप से पूरे क्षेत्र में अव्यवस्था फैलेगी। ईरान में आर्थिक संकट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। सात लोगों की मौत हो चुकी है। यह 2022 के बाद सबसे बड़ा प्रदर्शन है। सरकार सख्ती से निपटने के मूड में है।
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अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर जो चेतावनी जारी की थी, उस पर ईरान की सरकार ने साफ शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया दे दी है। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार ने शुक्रवार को एक बयान जारी करते हुए कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान के आंतरिक मामलों में दखल देने की कोशिश की तो इसके परिणाम बेहद खतरनाक हो सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी हस्तक्षेप से न केवल ईरान बल्कि पूरे क्षेत्र में अव्यवस्था और अशांति फैल जाएगी।

ट्रंप की चेतावनी का सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान की सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर ईरान में शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों का दमन किया गया, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक संदेश जारी करते हुए यह बात कही। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई या उनकी हत्या की, तो अमेरिका तुरंत हस्तक्षेप करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब ईरान में आर्थिक संकट को लेकर जनता का गुस्सा सड़कों पर उतर चुका है।

ईरान में विरोध प्रदर्शन की स्थिति

ईरान में पिछले कुछ दिनों से जनता सड़कों पर उतर आई है। देश की खराब होती जा रही आर्थिक स्थिति से नाराज लोग विभिन्न शहरों में प्रदर्शन कर रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन शुरुआत में राजधानी तेहरान तक सीमित था, लेकिन अब यह कई प्रांतों तक फैल चुका है। गुरुवार को हुई झड़पों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक टकराव में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है। इन मौतों से यह संकेत मिल रहे हैं कि ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों से सख्ती से निपटने के मूड में है, लेकिन दूसरी तरफ प्रदर्शनकारी भी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।

2022 के बाद सबसे बड़ा विरोध

यह प्रदर्शन 2022 के बाद से ईरान में हुआ सबसे बड़ा जनआंदोलन माना जा रहा है। साल 2022 में पुलिस हिरासत में 22 वर्षीय महसा अमिनी की मौत के बाद पूरे देश में व्यापक प्रदर्शन हुए थे। उस समय महिलाओं के अधिकारों और हिजाब कानून को लेकर जनता ने सरकार के खिलाफ आवाज उठाई थी। लेकिन इस बार प्रदर्शन का मुख्य कारण देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति है। महंगाई, बेरोजगारी और जीवनयापन की बढ़ती लागत से परेशान लोग अब सरकार से जवाब मांग रहे हैं।

प्रांतों में बढ़ती हिंसा

हालांकि राजधानी तेहरान में प्रदर्शन कुछ धीमे पड़ गए हैं, लेकिन अन्य प्रांतों और शहरों में इनकी तीव्रता लगातार बढ़ रही है। बुधवार को दो और बृहस्पतिवार को पांच लोगों की मौत चार अलग-अलग शहरों में हुई। ये चारों शहर लूर जातीय समुदाय के बहुल इलाके हैं। सबसे ज्यादा हिंसा ईरान के लोरेस्टान प्रांत के अजना शहर में देखी गई। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में सड़कों पर जलती हुई चीजें और गोलियों की आवाजें साफ सुनाई दे रही हैं। अर्धसरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने तीन लोगों की मौत की पुष्टि की है। कई सुधार समर्थक मीडिया संस्थानों ने भी इन घटनाओं की रिपोर्ट की है।

आर्थिक संकट की जड़ें

ईरान का आर्थिक संकट कोई नई बात नहीं है। पिछले कई वर्षों से देश अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, जिसकी वजह से वहां की अर्थव्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है। अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने ईरान के तेल निर्यात और व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ा है। महंगाई आसमान छू रही है, नौकरियां नहीं मिल रही हैं और लोगों की क्रय शक्ति लगातार कम हो रही है। इन सब कारणों ने मिलकर जनता के गुस्से को सड़कों तक पहुंचा दिया है।

सरकार का रवैया

ईरानी सरकार का रवैया इन प्रदर्शनों के प्रति काफी सख्त रहा है। सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों से सख्ती से निपटने के निर्देश दिए गए हैं। कई जगहों पर इंटरनेट सेवाएं बाधित की गई हैं ताकि प्रदर्शनकारी आपस में समन्वय न कर सकें। सरकार का मानना है कि ये प्रदर्शन विदेशी ताकतों द्वारा प्रायोजित हैं और देश में अस्थिरता फैलाने की साजिश है। लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपने वाजिब अधिकारों और बेहतर जीवन की मांग कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

ईरान में हो रही घटनाओं पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है। अमेरिका के अलावा यूरोपीय देशों ने भी ईरानी सरकार से प्रदर्शनकारियों के साथ संयम बरतने की अपील की है। मानवाधिकार संगठनों ने ईरान में हो रही हिंसा की निंदा की है और सरकार से शांतिपूर्ण प्रदर्शन की आजादी देने की मांग की है। लेकिन ईरान ने इन सभी अपीलों को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताते हुए खारिज कर दिया है।

आगे क्या होगा

मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि ईरान में स्थिति किस दिशा में जाएगी। एक तरफ जनता अपनी मांगों पर अड़ी हुई है, तो दूसरी तरफ सरकार किसी भी तरह की नरमी दिखाने को तैयार नहीं दिखती। अगर अमेरिका ने सचमुच हस्तक्षेप किया तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। ऐसे में पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट का समाधान केवल बातचीत और लोकतांत्रिक तरीकों से ही संभव है, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा।

ईरान का यह संकट न केवल उस देश की आंतरिक समस्या है बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।