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यूपी रोडवेज कर्मचारियों को बड़ी राहत, पहली बार टिकट मशीन खराब होने पर नहीं कटेगा जुर्माना

UP Roadways News: यूपी रोडवेज ने कर्मचारियों को पहली बार मशीन खराब होने पर बड़ी छूट दी
UP Roadways News: यूपी रोडवेज ने कर्मचारियों को पहली बार मशीन खराब होने पर बड़ी छूट दी (File Photo)
यूपी रोडवेज ने अपने हजारों परिचालकों को बड़ा लाभ दिया है। अब इलेक्ट्रॉनिक टिकट मशीन पहली बार खराब होने या टूटने पर परिचालकों से कोई वसूली नहीं होगी। पहले मशीन खराब होने पर 70 रुपये से लेकर 25 हजार रुपये तक की वसूली की जाती थी। अब यह खर्च पहली बार निगम वहन करेगा। हालांकि एक वर्ष में दूसरी बार मशीन को नुकसान पहुंचने पर वसूली फिर भी लागू रहेगी। मशीन खो जाने पर भी पूरी जिम्मेदारी परिचालक की ही मानी जाएगी। यह फैसला क्षेत्रीय अधिकारियों के सुझाव पर लिया गया है और कर्मचारियों ने इसका स्वागत किया है।
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यूपी रोडवेज कर्मचारियों को पहली बार मशीन खराब होने पर बड़ी राहत

रायबरेली। यूपी रोडवेज ने अपने हजारों कर्मचारियों को एक बड़ी राहत देने वाला फैसला किया है। अब परिचालकों को इलेक्ट्रॉनिक टिकट मशीन यानी ईटीएम (ETM) खराब होने पर पहली बार कोई जुर्माना नहीं देना होगा। यह फैसला परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक प्रभु नारायण सिंह ने लिया है। यह निर्णय लंबे समय से कर्मचारियों की मांग भी थी, क्योंकि कई बार मशीनें गलती से गिरकर टूट जाती हैं या तकनीकी कारणों से खराब हो जाती हैं, जिससे परिचालकों पर भारी वसूली लग जाती थी।

ईटीएम मशीन खराब होने पर अब पहली बार नहीं कटेगा पैसा

अभी तक रोडवेज में यह व्यवस्था थी कि चाहे मशीन इरादतन खराब हो या गलती से, परिचालक से ही नुकसान की भरपाई की जाती थी। इससे कर्मचारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ता था। कई बार परिचालक शिकायत करते थे कि मशीन पहले से कमजोर हो या पुरानी हो, फिर भी नुकसान का भार उन पर ही डाला जाता था।

लेकिन अब पहली बार मशीन टूटने या खराब होने पर कोई वसूली नहीं होगी। यानी परिचालक को राहत मिलेगी और उसका वेतन सुरक्षित रहेगा।

दूसरी बार गलती पर ही वसूली होगी

निगम ने साफ कहा है कि यह राहत सिर्फ पहली बार के लिए है। अगर कोई परिचालक एक वर्ष में दोबारा मशीन को फिजिकल डैमेज पहुंचाता है, तब उससे वसूली की जाएगी। यह कदम इसलिए रखा गया है ताकि मशीनों को लापरवाही से न संभाला जाए।

मशीन खोने पर जिम्मेदारी परिचालक की

निगम ने यह भी नियम किया है कि अगर मशीन खो जाती है, तो यह सीधी तरह से परिचालक की लापरवाही मानी जाएगी। ऐसे मामलों में पहले की तरह पूरी वसूली की जाएगी।
परिचालकों को मशीन सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी दी गई है और खोने पर राहत लागू नहीं होगी।

मशीन की मरम्मत का खर्च

परिवहन निगम के प्रधान प्रबंधक (आईटी) यजुवेंद्र कुमार ने बताया कि मशीन के अलग-अलग हिस्सों की मरम्मत का खर्च अलग होता है।

  • अगर मशीन का शीशा या कवर टूटे तो 70 से 200 रुपये तक में ठीक हो जाता है।

  • लेकिन अगर पूरी मशीन टूट जाए या खराब हो जाए तो उसका खर्च 25 हजार रुपये तक पहुंच सकता है।

पहले परिचालक से इस पूरे खर्च की वसूली होती थी। पर अब एक बार की गलती पर यह पूरा खर्च निगम खुद वहन करेगा। इससे कर्मचारियों को साल में एक बार तक भारी राशि से छुटकारा मिल सकता है।

क्यों लिया गया यह फैसला

क्षेत्रीय अधिकारियों से मिले फीडबैक के आधार पर यह फैसला लिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि कई परिचालक बिना गलती के भी जुर्माना देते हैं क्योंकि मशीनें पहले से कमजोर या तकनीकी रूप से कमजोर हो जाती हैं।
इसी शिकायत को देखते हुए मुख्यालय स्तर से यह राहत दी गई है।

कर्मचारियों ने किया स्वागत

इस फैसले के बाद रोडवेज कर्मचारियों में खुशी है। परिचालकों का कहना है कि यात्रा के दौरान मशीन को सुरक्षित रखना कई बार मुश्किल होता है क्योंकि बसें भीड़भाड़ में चलती हैं और कई बार यात्रियों की धक्का-मुक्की से मशीनें गिर जाती हैं।
अब पहली बार का जुर्माना खत्म होने से उनका आर्थिक बोझ काफी कम होगा।

संपादकीय दृष्टि से फैसला क्यों महत्वपूर्ण

यूपी रोडवेज में परिचालक रोज़ाना यात्रियों से टिकट बनाने का काम करते हैं। इस काम में टिकट मशीन उनकी सबसे जरूरी वस्तु होती है।
मशीन की सुरक्षा हमेशा एक चुनौती रही है क्योंकि बसों की स्थिति, सड़कों की हालत और भीड़भाड़ सभी चीजें जोखिम बढ़ाती हैं।
इस फैसले से स्पष्ट है कि निगम कर्मचारियों के हालात को समझ रहा है और उनके काम को आसान बनाने की कोशिश कर रहा है।

साथ ही यह भी ध्यान दिया गया है कि मशीन की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी कम न हो, इसलिए दूसरी बार गलती पर वसूली का प्रावधान रखा गया है।
यह नियम संतुलित भी है और कर्मचारी हित में भी।

परिचालकों को क्या ध्यान रखना चाहिए

राहत मिलने के बाद भी परिचालकों को मशीन की सुरक्षा को लेकर सावधानी रखनी होगी।

  • मशीन को सुरक्षित कवर में रखना चाहिए

  • यात्रा से पहले जांच लें कि मशीन ठीक है

  • बस में भीड़भाड़ हो तो हाथ से मशीन को गिरने न दें

  • मशीन को सीट पर या खुले में न छोड़ें

यह सुझाव इसलिए उपयोगी हैं क्योंकि यदि मशीन दोबारा खराब होती है तो वसूली फिर भी होगी।

आगे क्या बदलाव हो सकते हैं

रोडवेज के इस फैसले के बाद उम्मीद है कि भविष्य में मशीनों की गुणवत्ता भी बेहतर की जाएगी ताकि नुकसान कम हों।
निगम नए अपडेटेड ईटीएम भी ला सकता है जिनमें सुरक्षा कवर मजबूत हो या गिरने से डैमेज कम हो।
कर्मचारियों की ट्रेनिंग भी बढ़ाई जा सकती है ताकि मशीन को संभालने के तरीके बेहतर हों।

फैसला कर्मचारियों के हित में एक बड़ा कदम

कुल मिलाकर यह कदम कर्मचारियों के लिए बहुत उपयोगी है। परिचालक अक्सर कम वेतन में परिवार चलाते हैं और मशीन टूटने के कारण उन पर अचानक 200 से 25,000 रुपये तक का बोझ आ जाता था।
अब पहली बार की राहत मिलने से उनकी सबसे बड़ी चिंता दूर हो गई है।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।