पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग को चौकन्ना कर दिया है। राज्य में अब तक पांच लोगों में इस खतरनाक वायरस की पुष्टि हो चुकी है। इन मामलों के सामने आने के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए करीब 100 लोगों को क्वारंटीन में रखा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि संक्रमित लोगों में स्वास्थ्य कर्मी भी शामिल हैं, जो मरीजों की देखभाल करते समय इस वायरस की चपेट में आ गए।
संक्रमित लोगों में दो नर्स, एक डॉक्टर और एक स्वास्थ्य कर्मचारी शामिल हैं। इनमें से कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जबकि कुछ में सुधार के संकेत दिख रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं और सभी संभावित संपर्कों की पहचान करने का काम तेजी से जारी है।
निपाह वायरस क्या है और क्यों है खतरनाक
निपाह वायरस एक जूनोटिक वायरस है, जो जानवरों से इंसानों में फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे प्राथमिकता वाले रोगजनक की श्रेणी में रखा है क्योंकि इसमें महामारी फैलाने की क्षमता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि अभी तक इस वायरस के लिए कोई टीका या इलाज उपलब्ध नहीं है। मरीजों को केवल सहायक उपचार दिया जाता है और उनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
यह वायरस मुख्य रूप से चमगादड़ों से जुड़ा हुआ है। कुछ विशेष प्रजातियों के चमगादड़ इस वायरस के प्राकृतिक वाहक होते हैं। जब इंसान इन चमगादड़ों के संपर्क में आते हैं या उनके द्वारा दूषित फल खाते हैं, तो वायरस इंसानों में फैल सकता है। इसके बाद संक्रमित व्यक्ति से दूसरे लोगों में भी यह बीमारी फैल सकती है।
वायरस फैलने के तरीके
निपाह वायरस कई तरीकों से फैल सकता है। सबसे आम तरीका है चमगादड़ों द्वारा खाए गए या दूषित किए गए फलों का सेवन। चमगादड़ फलों को खाते समय उन पर अपनी लार छोड़ देते हैं, जिसमें वायरस हो सकता है। जब कोई इंसान ऐसे फल खाता है, तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
दूसरा तरीका है संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आना। यही कारण है कि इस बार पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य कर्मी भी संक्रमित हुए हैं। मरीजों की देखभाल करते समय अगर पूरी सावधानी न बरती जाए तो यह वायरस आसानी से फैल सकता है। संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थ, खांसी या छींक से भी यह बीमारी फैल सकती है।
निपाह वायरस का इतिहास
निपाह वायरस पहली बार 1998 में मलेशिया और सिंगापुर में पहचाना गया था। उस समय इस वायरस ने कई लोगों की जान ली थी और सुअर पालन उद्योग को बड़ा नुकसान पहुंचाया था। तब से यह वायरस कई देशों में समय-समय पर प्रकोप करता रहा है।
भारत में निपाह वायरस का पहला बड़ा प्रकोप 2018 में केरल में देखा गया था। तब से केरल में कई बार इस वायरस के मामले सामने आए हैं। केरल के स्वास्थ्य विभाग ने इस बीमारी से निपटने में काफी अनुभव हासिल किया है। अब पश्चिम बंगाल में इसके मामले सामने आने से पूरे देश में चिंता बढ़ गई है।
लक्षण और पहचान
निपाह वायरस से संक्रमित होने पर शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार जैसे होते हैं। मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और थकान महसूस होती है। कुछ मामलों में सांस लेने में दिक्कत भी होती है। गंभीर मामलों में यह वायरस मस्तिष्क में सूजन पैदा कर सकता है, जिससे मरीज बेहोश हो सकता है।
इस बीमारी की खतरनाक बात यह है कि इसकी मृत्यु दर बहुत ऊंची है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, निपाह वायरस से संक्रमित लोगों में से 40 से 75 प्रतिशत तक लोगों की मौत हो सकती है। यही कारण है कि इस बीमारी को बहुत गंभीरता से लिया जाता है।
सरकार की तैयारी और उपाय
पश्चिम बंगाल सरकार ने इस प्रकोप को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। सबसे पहले सभी संक्रमित मरीजों को अलग कर दिया गया है और उन्हें विशेष उपचार केंद्रों में रखा गया है। जो लोग संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आए हैं, उन सभी की पहचान की जा रही है और उन्हें क्वारंटीन में रखा जा रहा है।
स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है और उन्हें सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए गए हैं। सभी अस्पतालों में निपाह वायरस के मरीजों की देखभाल के लिए अलग वार्ड बनाए गए हैं। केंद्र सरकार ने भी राज्य को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है।
जनता को सलाह और सावधानियां
स्वास्थ्य विभाग ने जनता से अपील की है कि वे कुछ सावधानियां बरतें। सबसे जरूरी है कि पेड़ों से गिरे या कटे हुए फलों का सेवन न करें। फलों को अच्छे से धोकर ही खाएं। अगर किसी फल पर चमगादड़ के काटने के निशान दिखें तो उसे बिल्कुल न खाएं।
अगर किसी को तेज बुखार, सिरदर्द या सांस लेने में दिक्कत हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। अपने हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोते रहें। भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें। किसी बीमार व्यक्ति के पास जाते समय सावधानी बरतें।
केरल का अनुभव पश्चिम बंगाल के काम आएगा
केरल में पिछले कई सालों से निपाह वायरस से निपटने का अनुभव है। वहां के स्वास्थ्य विभाग ने इस बीमारी को रोकने के लिए एक मजबूत प्रणाली विकसित की है। पश्चिम बंगाल सरकार केरल के अनुभव से सीख रही है और वैसे ही उपाय अपना रही है।
केरल में संक्रमण को रोकने के लिए जो तरीके सफल रहे हैं, उन्हें पश्चिम बंगाल में भी लागू किया जा रहा है। इनमें जल्दी पहचान, तुरंत अलगाव, संपर्कों की ट्रेसिंग और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा शामिल है।
आगे की चुनौतियां
हालांकि सरकार सक्रिय है, लेकिन कई चुनौतियां अभी भी बाकी हैं। सबसे बड़ी चुनौती है इस बीमारी के लिए कोई टीका या दवा न होना। वैज्ञानिक इस पर काम कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है। दूसरी चुनौती है लोगों में जागरूकता फैलाना। ग्रामीण इलाकों में लोगों को इस बीमारी के बारे में जानकारी देना जरूरी है।
तीसरी चुनौती है स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना। अगर मामले बढ़ते हैं तो पर्याप्त आइसोलेशन वार्ड और प्रशिक्षित कर्मचारी चाहिए होंगे। सरकार इन सभी पहलुओं पर काम कर रही है।
पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस का यह प्रकोप एक चेतावनी है। जलवायु परिवर्तन और जंगलों की कटाई के कारण इंसान और जानवरों के बीच संपर्क बढ़ रहा है। इससे ऐसी बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। हमें न केवल इस तात्कालिक संकट से निपटना है, बल्कि भविष्य में ऐसी बीमारियों को रोकने के लिए भी तैयारी करनी होगी।