Nagpur University Research Conference: नागपुर शहर से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय का एक प्रतिनिधि दल परभणी में आयोजित होने वाले 18वें महाराष्ट्र राज्य अंतर-विश्वविद्यालय शोध सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रवाना हो गया है। यह सम्मेलन 28 से 31 जनवरी 2026 तक वसंतराव नाईक कृषि विश्वविद्यालय, परभणी में आयोजित किया जा रहा है। इस दल में कुल 48 शोधार्थी विद्यार्थी शामिल हैं जो अपनी उत्कृष्ट शोध परियोजनाओं की प्रस्तुति देंगे।
विश्वविद्यालय के छत्रपति शिवाजी महाराज प्रशासनिक परिसर, महाराज बाग चौक से इस दल को रवाना किया गया। माननीय कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर और कुलसचिव डॉ. राजू हिवसे के मार्गदर्शन में इस दल को हरी झंडी दिखाकर विदा किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थी विकास विभाग के संचालक डॉ. विजय खंडाळ और विश्वविद्यालय अविष्कार सेल के अध्यक्ष डॉ. संजय ढोबळे ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं।
शोध परियोजनाओं का चयन प्रक्रिया
इस अंतर-विश्वविद्यालय सम्मेलन में भाग लेने वाले विद्यार्थियों का चयन एक कठिन प्रक्रिया के बाद किया गया है। सबसे पहले भंडारा, गोंदिया, वर्धा और नागपुर जिलों में जिला स्तरीय शोध प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था। इन प्रतियोगिताओं में सैकड़ों विद्यार्थियों ने अपनी शोध परियोजनाओं को प्रस्तुत किया था।
जिला स्तर पर चयनित सर्वश्रेष्ठ परियोजनाओं को अंजुमन इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी कॉलेज में एक विशेष मंच पर प्रस्तुत किया गया। यहां विशेषज्ञों की एक समिति ने इन परियोजनाओं का गहन मूल्यांकन किया। जिन परियोजनाओं को सबसे उत्कृष्ट पाया गया, उन्हें महाराष्ट्र राज्य स्तरीय सम्मेलन के लिए चुना गया है।

विद्यार्थियों के लिए बड़ा अवसर
यह सम्मेलन विद्यार्थियों के लिए एक बेहतरीन मंच साबित होगा। यहां वे न केवल अपनी शोध परियोजनाओं को प्रस्तुत करेंगे, बल्कि महाराष्ट्र के अन्य विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों और शोधार्थियों से भी मिलेंगे। इससे उन्हें नए विचारों और दृष्टिकोणों को समझने का मौका मिलेगा। राज्य भर के अलग-अलग क्षेत्रों में हो रहे शोध कार्यों की जानकारी भी उन्हें प्राप्त होगी।
शोध सम्मेलन में विभिन्न विषयों पर परियोजनाएं प्रस्तुत की जाएंगी। इनमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कृषि, समाज विज्ञान, मानविकी और अन्य कई क्षेत्र शामिल हैं। हर परियोजना को विशेषज्ञों द्वारा परखा जाएगा और सर्वश्रेष्ठ परियोजनाओं को पुरस्कृत भी किया जाएगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन का सहयोग
इस पूरी प्रक्रिया में विश्वविद्यालय प्रशासन का पूरा सहयोग रहा है। कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर ने शुरू से ही शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। उनका मानना है कि शोध और नवाचार ही किसी भी विश्वविद्यालय की असली ताकत होती है। विद्यार्थियों को शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए हर संभव सुविधा और मार्गदर्शन दिया जाना चाहिए।
कुलसचिव डॉ. राजू हिवसे ने भी इस आयोजन के लिए विशेष प्रयास किए हैं। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि विद्यार्थियों को सम्मेलन में भाग लेने के लिए हर जरूरी सहायता मिले। यात्रा, ठहरने और अन्य व्यवस्थाओं का पूरा ध्यान रखा गया है।
दल प्रबंधन और मार्गदर्शन
सम्मेलन में जाने वाले दल के साथ कई अनुभवी शिक्षक और मार्गदर्शक भी जा रहे हैं। विद्यार्थी विकास विभाग के संचालक डॉ. विजय खंडाळ और अविष्कार सेल के अध्यक्ष डॉ. संजय ढोबळे ने विद्यार्थियों को रवानगी के समय प्रोत्साहित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें और विश्वविद्यालय का नाम रोशन करें।
दल के प्रबंधक के रूप में डॉ. अभय देशमुख और डॉ. पायल दुधे भी साथ जा रहे हैं। वे सम्मेलन के दौरान विद्यार्थियों की हर जरूरत का ध्यान रखेंगे। इसके अलावा आईआईएल संचालक डॉ. प्रकाश इटनकर और अविष्कार समिति के सदस्य डॉ. निशिकांत राऊत भी इस पूरी प्रक्रिया में शामिल रहे हैं।
वसंतराव नाईक कृषि विश्वविद्यालय में आयोजन
यह सम्मेलन परभणी स्थित वसंतराव नाईक कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित किया जा रहा है। यह विश्वविद्यालय महाराष्ट्र के प्रमुख कृषि विश्वविद्यालयों में से एक है। यहां कृषि, बागवानी और संबंधित विषयों में उच्च स्तरीय शिक्षा और शोध कार्य होता है। सम्मेलन के लिए विश्वविद्यालय ने विशेष तैयारियां की हैं।
चार दिवसीय इस सम्मेलन में महाराष्ट्र के विभिन्न विश्वविद्यालयों के सैकड़ों विद्यार्थी और शिक्षक भाग लेंगे। यह एक बड़ा शैक्षणिक आयोजन है जो राज्य में शोध संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
शोध संस्कृति को बढ़ावा
Nagpur University Research Conference: ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में शोध के प्रति रुचि जगाते हैं। जब विद्यार्थी अपनी उम्र में ही शोध कार्य करते हैं, तो उनमें वैज्ञानिक सोच विकसित होती है। वे समस्याओं को समझने और उनका समाधान खोजने में सक्षम बनते हैं। यह कौशल उनके भविष्य के लिए बहुत उपयोगी साबित होता है।
नागपुर विश्वविद्यालय लगातार ऐसे प्रयास कर रहा है जिससे विद्यार्थियों को शोध के अवसर मिलें। अविष्कार सेल की स्थापना भी इसी दिशा में एक कदम है। यह सेल विद्यार्थियों को नवाचार और शोध के लिए जरूरी मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराता है।
विद्यार्थियों की तैयारी
सम्मेलन में जाने वाले विद्यार्थियों ने महीनों की मेहनत से अपनी परियोजनाओं को तैयार किया है। उन्होंने अपने विषयों पर गहन अध्ययन किया है। प्रयोग किए हैं, आंकड़े इकट्ठे किए हैं और उनका विश्लेषण किया है। अब वे अपने शोध कार्य को राज्य स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं।
विद्यार्थी इस अवसर को लेकर बहुत उत्साहित हैं। उन्हें विश्वास है कि उनकी मेहनत रंग लाएगी और वे अच्छा प्रदर्शन करेंगे। साथ ही, यह अनुभव उनके शैक्षणिक और व्यक्तिगत विकास में भी सहायक होगा।
इस पूरे आयोजन से यह स्पष्ट होता है कि नागपुर विश्वविद्यालय शिक्षा की गुणवत्ता और शोध को लेकर गंभीर है। ऐसे प्रयास न केवल विद्यार्थियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाते हैं, बल्कि समाज और देश के विकास में भी योगदान देते हैं।