Gold-Silver Price: केंद्रीय बजट 2026 पेश होने से ठीक पहले देश के वित्तीय बाजारों में जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। जहां एक ओर संसद में बजट भाषण की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट में गिरावट का माहौल बना हुआ है। निवेशकों से लेकर आम लोगों तक, हर कोई यह समझने की कोशिश कर रहा है कि यह गिरावट सिर्फ बजट से पहले की घबराहट है या किसी बड़े बदलाव का संकेत।
आज सुबह कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में नजर आए। बाजार में चौतरफा बिकवाली दिखी, जिसका असर खासतौर पर मेटल सेक्टर और कमोडिटी से जुड़े शेयरों पर पड़ा। इसी के साथ सोना और चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई।
बजट से पहले शेयर बाजार क्यों लड़खड़ाया
बजट से पहले बाजार में उतार-चढ़ाव कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार गिरावट का दायरा ज्यादा बड़ा नजर आ रहा है। निवेशक बजट में संभावित टैक्स बदलाव, कस्टम ड्यूटी और नीतिगत फैसलों को लेकर सतर्क हैं।
सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव
कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान में कारोबार करते दिखे। बाजार की धारणा कमजोर रही और कई बड़े शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली। इसका सीधा असर सेक्टोरल इंडेक्स पर पड़ा, खासकर मेटल सेक्टर बुरी तरह फिसल गया।
सोना-चांदी में आई भारी गिरावट
कमोडिटी बाजार में आज की गिरावट ने सबको चौंका दिया। सोना और चांदी दोनों के भावों में तेज टूट देखने को मिली है। बीते तीन कारोबारी सत्रों से लगातार गिरावट जारी है, जिससे बाजार में बेचैनी बढ़ गई है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना करीब 9 प्रतिशत टूटकर 1.40 लाख रुपये के नीचे फिसल गया है। वहीं चांदी के दाम में 26 हजार रुपये से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और यह 2.70 लाख रुपये के आसपास कारोबार कर रही है। कुल मिलाकर सोना-चांदी में 26 हजार रुपये तक की गिरावट ने बाजार की धारणा कमजोर कर दी है।
रिकॉर्ड ऊंचाई से बड़ी फिसलन
गौर करने वाली बात यह है कि पिछले कारोबारी सत्र में चांदी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से करीब 1.28 लाख रुपये सस्ती हो गई थी। वहीं सोना भी 31 हजार रुपये से ज्यादा टूट चुका है। इतनी बड़ी गिरावट को मामूली करेक्शन नहीं माना जा रहा।
सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट का असर सीधे मेटल सेक्टर पर पड़ा है। मेटल से जुड़े बड़े शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली।
इन शेयरों में आई तगड़ी गिरावट
वेदांता के शेयरों में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हिंदुस्तान जिंक के शेयर 10 प्रतिशत तक टूटे। हिंदुस्तान कॉपर में 18 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई, जबकि हिंडाल्को और हिंदुस्तान एल्युमिनियम के शेयर भी 5 से 7 प्रतिशत तक फिसल गए।
गिरावट का असर गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ पर भी साफ दिखा। निप्पॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ और निप्पॉन इंडिया गोल्ड ईटीएफ में करीब 11 प्रतिशत तक की गिरावट आई और इनमें लोअर सर्किट लग गया। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में डर का माहौल है।
बजट से जुड़ी उम्मीदों ने बढ़ाई बेचैनी
आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। ऐसे में बाजार को उम्मीद है कि सोने-चांदी से जुड़े नियमों में कुछ बड़े बदलाव हो सकते हैं।
ज्वेलर्स लंबे समय से सोने और चांदी पर कस्टम ड्यूटी कम करने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि अगर ड्यूटी घटती है, तो बाजार में खरीदारी बढ़ेगी और मांग को सहारा मिलेगा। बजट से पहले इसी उम्मीद में भी बाजार में अस्थिरता देखी जा रही है।
घबराहट या रणनीति, क्या कहता है बाजार
लगातार गिरावट के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यह गिरावट अस्थायी है या आने वाले समय का संकेत। जानकारों का मानना है कि बजट से पहले ऐसी हलचल आम है, लेकिन इस बार गिरावट का दायरा ज्यादा होने से चिंता बढ़ी है।
अब सबकी निगाहें संसद पर टिकी हैं। बजट के ऐलान के बाद ही साफ होगा कि बाजार को राहत मिलती है या अस्थिरता कुछ और समय तक बनी रहेगी।