नागपुर से विधायक प्रवीण दटके ने जब केंद्रीय बजट 2026-27 पर अपनी प्रतिक्रिया दी, तो उनके शब्दों में आशावाद और विश्वास झलक रहा था। उन्होंने इसे केवल वार्षिक आर्थिक विवरण नहीं, बल्कि विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने वाला व्यापक दस्तावेज बताया। लेकिन जब हम इस बजट को आम नागरिक की नजर से देखते हैं, तो कई सवाल उभरते हैं। क्या यह बजट सचमुच “सबका साथ, सबका विकास” का प्रतीक है या फिर यह भी चुनिंदा वर्गों तक सीमित रह जाएगा?
बुनियादी ढांचे में भारी निवेश का वादा
बजट की सबसे बड़ी घोषणा 12 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत निवेश को लेकर है। यह रकम सुनने में बेहद आकर्षक लगती है और निश्चित रूप से देश के बुनियादी ढांचे को मजबूती देने में मददगार हो सकती है। हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, समर्पित मालवाहक मार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग, जलमार्ग और औद्योगिक पार्क – ये सभी परियोजनाएं देश की लॉजिस्टिक्स क्षमता को बढ़ाएंगी।
लेकिन जमीनी हकीकत यह भी है कि पिछले कई बजटों में भी इसी तरह की महत्वाकांक्षी घोषणाएं की गई थीं। राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं अक्सर समय सीमा से पीछे रह जाती हैं, निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं, और भूमि अधिग्रहण की समस्याएं परियोजनाओं को अटका देती हैं। क्या इस बार इन चुनौतियों से निपटने के लिए कोई ठोस रणनीति है?
हाई-स्पीड रेल की हकीकत
हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की बात तो बहुत होती है, लेकिन मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की धीमी प्रगति हमारे सामने है। नागपुर जैसे शहर, जो भारत के केंद्र में स्थित है और जिसे देश का हब बनाने की बात होती रही है, उसके लिए हाई-स्पीड कनेक्टिविटी कब आएगी? क्या विदर्भ क्षेत्र को भी इन योजनाओं में प्राथमिकता मिलेगी?
बुनियादी ढांचे में निवेश जरूरी है, लेकिन यह तभी सार्थक होगा जब छोटे शहरों, ग्रामीण क्षेत्रों और पिछड़े इलाकों को भी इससे जोड़ा जाए। अगर विकास सिर्फ महानगरों तक सीमित रहा, तो क्षेत्रीय असंतुलन और बढ़ेगा।
उद्योग और नवाचार पर जोर
सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बायोफार्मा और एवीजीसी जैसे क्षेत्रों के लिए योजनाओं की घोषणा सकारात्मक कदम है। भारत को उच्च प्रौद्योगिकी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए इन क्षेत्रों में निवेश जरूरी है। खासकर जब चीन पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भर भारत का सपना पूरा करने की बात हो रही है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या हमारे पास इन उद्योगों के लिए जरूरी कुशल मानव संसाधन है? नागपुर में आईआईटी और एनआईटी जैसे संस्थान हैं, लेकिन क्या वे उद्योग की जरूरतों के अनुरूप युवाओं को तैयार कर रहे हैं? शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई को पाटना जरूरी है।
एवीजीसी क्षेत्र में संभावनाएं
एनीमेशन, वीएफएक्स, गेमिंग और कॉमिक्स क्षेत्र में भारत की बड़ी संभावनाएं हैं। युवाओं में इस क्षेत्र के प्रति रुझान बढ़ रहा है। लेकिन इसके लिए प्रशिक्षण संस्थानों, तकनीकी सुविधाओं और बाजार तक पहुंच की जरूरत है। क्या छोटे शहरों में भी इस तरह के प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएंगे? क्या स्थानीय प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए कोई विशेष प्रावधान है?
ग्रामीण और कृषि क्षेत्र की उपेक्षा
विधायक दटके ने सिंचाई, पशुपालन, मत्स्य पालन और लखपति दीदी योजना के विस्तार का जिक्र किया। ये योजनाएं निश्चित रूप से ग्रामीण आय बढ़ाने में मददगार हो सकती हैं। लेकिन विदर्भ जैसे क्षेत्र में, जहां किसान आत्महत्याओं की समस्या गंभीर है, क्या ये योजनाएं पर्याप्त हैं?
किसानों को सबसे ज्यादा जरूरत है उनकी फसलों का उचित दाम मिलने की, कर्ज से मुक्ति की, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार की। नागपुर के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में संतरा उत्पादन प्रमुख है, लेकिन किसानों को उचित बाजार और भंडारण की सुविधा नहीं मिल पाती। क्या बजट में इन समस्याओं का समाधान है?
सिंचाई का अधूरा सपना
विदर्भ में सिंचाई परियोजनाएं दशकों से अधूरी पड़ी हैं। गोसीखुर्द, गोदावरी-कृष्णा लिंक जैसी परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन किसानों के खेत तक पानी नहीं पहुंच पाया। क्या इस बार इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए कोई विशेष प्रावधान है?
बूंद-बूंद सिंचाई, ड्रिप इरिगेशन और जल संरक्षण जैसी योजनाओं की बात तो होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों को इन तकनीकों को अपनाने के लिए पर्याप्त मदद नहीं मिल पाती। सब्सिडी की प्रक्रिया जटिल है और अक्सर छोटे किसान इसका लाभ नहीं उठा पाते।
महिला सशक्तिकरण के वादे
लखपति दीदी योजना का विस्तार, महिलाओं के लिए उद्यम अवसर और छात्रावास योजनाएं स्वागत योग्य कदम हैं। महाराष्ट्र में महिला स्वयं सहायता समूहों ने अच्छा काम किया है और उन्हें और प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
लेकिन क्या ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं तक ये योजनाएं पहुंच पाएंगी? अक्सर ऐसी योजनाओं का लाभ शहरी या अर्धशहरी क्षेत्रों की शिक्षित महिलाओं तक सीमित रह जाता है। जो महिलाएं खेतों में मजदूरी करती हैं, घरेलू उद्योगों में लगी हैं, उनके लिए क्या व्यवस्था है?
शिक्षा में कौशल विकास
शिक्षा में कौशल प्रयोगशालाओं की बात की गई है, जो जरूरी कदम है। लेकिन नागपुर जैसे शहर में भी सरकारी स्कूलों की हालत चिंताजनक है। बुनियादी सुविधाओं की कमी, शिक्षकों की कमी, और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अभाव – ये समस्याएं पहले हल होनी चाहिए।
कौशल विकास तभी सार्थक होगा जब बुनियादी शिक्षा मजबूत होगी। अगर बच्चे प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं पा रहे, तो उच्च शिक्षा में कौशल विकास का क्या फायदा?
स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार की जरूरत
नए मेडिकल कॉलेज और आपात सेवाओं की घोषणा अच्छी है, लेकिन विदर्भ में स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत बेहद खराब है। नागपुर में जीएमसीएच जैसे बड़े अस्पताल हैं, लेकिन वहां भी मरीजों की भीड़, डॉक्टरों की कमी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव देखा जाता है।
छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में तो स्थिति और भी खराब है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर नहीं हैं, दवाइयां नहीं हैं, उपकरण नहीं हैं। क्या नए मेडिकल कॉलेज खोलने से पहले मौजूदा अस्पतालों को सुधारने पर ध्यान नहीं देना चाहिए?
आयुष्मान योजना की पहुंच
आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत अच्छे इरादे से हुई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका क्रियान्वयन कमजोर रहा है। कई लोगों को इस योजना के बारे में पता ही नहीं है, और जिन्हें पता है, उन्हें अस्पतालों में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। क्या इन समस्याओं को हल करने के लिए कोई कदम उठाया जा रहा है?
आयकर सुधार की जरूरत
आयकर अधिनियम 2025 के माध्यम से कर प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाने की बात की गई है। यह स्वागत योग्य कदम है क्योंकि मौजूदा कर प्रणाली जटिल है और आम करदाता को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
लेकिन मध्यम वर्ग, जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, उसे कर में राहत की जरूरत है। महंगाई के बीच जब रोजमर्रा की चीजें महंगी हो रही हैं, तब करों में कटौती से मध्यम वर्ग को सांस लेने का मौका मिलता। क्या इस बार कोई ठोस राहत दी गई है?
रोजगार सृजन की चुनौती
बजट में युवाओं को रोजगार मिलने की बात की गई है, लेकिन हकीकत यह है कि नागपुर जैसे शहर में भी बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है। इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों से निकलने वाले हजारों युवा नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं।
स्किल डेवलपमेंट की बात तो होती है, लेकिन उसके बाद नौकरी की गारंटी कहां है? अस्थायी, कम वेतन वाली नौकरियां युवाओं को दीर्घकालिक सुरक्षा नहीं दे सकतीं। स्थायी और गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर पैदा करना जरूरी है।
स्टार्टअप इकोसिस्टम की जरूरत
नागपुर में स्टार्टअप की संभावनाएं हैं, लेकिन उनके लिए पर्याप्त इकोसिस्टम नहीं है। इनक्यूबेशन सेंटर, मेंटरशिप, फंडिंग और बाजार तक पहुंच – ये सब जरूरी हैं। क्या बजट में इन पहलुओं पर ध्यान दिया गया है?
दीर्घकालीन सुधारों का सवाल
विधायक दटके ने कहा कि यह बजट लोकप्रिय घोषणाओं से अधिक दीर्घकालीन अनुशासन, निवेश और सुधारों पर आधारित है। यह बात सही है कि लोकलुभावन घोषणाओं के बजाय ठोस सुधारों पर ध्यान देना जरूरी है।
लेकिन यह भी सच है कि आम आदमी को तात्कालिक राहत की जरूरत होती है। महंगाई, बेरोजगारी, स्वास्थ्य और शिक्षा की समस्याएं – ये रोज की चुनौतियां हैं। अगर इन पर ध्यान नहीं दिया गया, तो दीर्घकालीन विकास का लाभ किसे मिलेगा?
संतुलित दृष्टिकोण की जरूरत
विकास के लिए बुनियादी ढांचे में निवेश जरूरी है, लेकिन साथ ही मानव विकास पर भी ध्यान देना चाहिए। शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा – ये वे क्षेत्र हैं जो समाज की नींव हैं। अगर ये कमजोर रहे, तो कोई भी बुनियादी ढांचा टिकाऊ नहीं हो सकता।
बजट 2026-27 में कई सकारात्मक पहलू हैं – बुनियादी ढांचे में भारी निवेश, उद्योग और नवाचार को बढ़ावा, महिला सशक्तिकरण और कर सुधार। विधायक प्रवीण दटके की आशावादी प्रतिक्रिया स्वाभाविक है।
लेकिन नागपुर और विदर्भ के आम नागरिक की नजर से देखें तो कई सवाल अनुत्तरित रह जाते हैं। किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, स्वास्थ्य और शिक्षा की दुर्दशा, क्षेत्रीय असंतुलन – इन मुद्दों पर स्पष्ट समाधान नहीं दिखता।
विकास तभी सार्थक है जब वह समावेशी हो, जब हर क्षेत्र, हर वर्ग और हर नागरिक को उसका लाभ मिले। उम्मीद करते हैं कि इस बजट की घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि धरातल पर उतरकर नागपुर और विदर्भ के विकास में वास्तविक योगदान देंगी। लेकिन इसके लिए जरूरी होगा कि स्थानीय समस्याओं पर ध्यान दिया जाए और क्रियान्वयन में पारदर्शिता बरती जाए।