जरूर पढ़ें

पश्चिम बंगाल में WBCS सहित सरकारी नौकरियों में बांग्ला भाषा अनिवार्य करने की मांग, PSC के सामने हुआ प्रदर्शन

West Bengal PSC protest Bengali language demand: सरकारी नौकरियों में बांग्ला भाषा अनिवार्य करने की मांग, PSC में प्रदर्शन
West Bengal PSC protest Bengali language demand: सरकारी नौकरियों में बांग्ला भाषा अनिवार्य करने की मांग, PSC में प्रदर्शन (File Photo)

West Bengal PSC protest Bengali language demand: अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर बांग्ला पक्ष ने पश्चिम बंगाल PSC के सामने प्रदर्शन किया। संगठन की मांग है कि WBCS सहित सभी सरकारी परीक्षाओं में बांग्ला भाषा अनिवार्य हो, जैसे दूसरे राज्यों में है। हिंदी-उर्दू तुष्टिकरण से बंगाली युवाओं को नुकसान हो रहा है। खाली पदों पर पारदर्शी भर्ती की भी मांग की गई।

Updated:

West Bengal PSC protest Bengali language demand: पश्चिम बंगाल पब्लिक सर्विस कमीशन के सामने अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के मौके पर बांग्ला पक्ष संगठन ने जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन की मुख्य मांग है कि WBCS यानी वेस्ट बंगाल सिविल सर्विस सहित राज्य की सभी सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में बांग्ला भाषा का पेपर अनिवार्य किया जाए। 17 से 21 फरवरी तक बांग्ला भाषा अधिकार सप्ताह मनाते हुए संगठन ने यह कदम उठाया है।

मातृभाषा दिवस पर उठी आवाज

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर बांग्ला पक्ष ने 17 से 21 फरवरी तक बांग्ला भाषा अधिकार सप्ताह मनाने का फैसला किया। इसी कड़ी में संगठन ने आज पश्चिम बंगाल PSC भवन के सामने जोरदार प्रदर्शन और डेपुटेशन कार्यक्रम किया। संगठन का कहना है कि बंगाल में बांग्ला भाषा के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है, जबकि दूसरे राज्यों में अपनी-अपनी मातृभाषा को महत्व दिया जाता है।

दूसरे राज्यों में अपनी भाषा अनिवार्य

बांग्ला पक्ष ने बताया कि भारत के सभी राज्यों में PSC की परीक्षाओं में उस राज्य की भाषा अनिवार्य है। बिहार सिविल सर्विस में 100 नंबर का हिंदी पेपर, गुजरात सिविल सर्विस में 150 नंबर का गुजराती पेपर, महाराष्ट्र में 100 नंबर का मराठी पेपर, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में 300 नंबर का हिंदी पेपर, ओडिशा में 250 नंबर का उड़िया पेपर और कर्नाटक में 150 नंबर का कन्नड़ पेपर अनिवार्य है। लेकिन पश्चिम बंगाल में WBCS में बांग्ला भाषा अनिवार्य नहीं है।

छह साल की लड़ाई के बाद भी वापस हिंदी-उर्दू

संगठन के मुताबिक बांग्ला पक्ष ने छह साल तक लगातार संघर्ष किया, जिसके बाद 300 नंबर का बांग्ला पेपर अनिवार्य किया गया था। लेकिन बाद में विभिन्न दलों में मौजूद हिंदी-उर्दू लॉबी और बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी के दबाव में बंगाल सरकार ने फिर से WBCS में हिंदी-उर्दू को शामिल कर दिया। बांग्ला पक्ष इस फैसले का विरोध कर रहा है और सिविल सर्विस में बांग्ला भाषा को अनिवार्य बनाने की मांग कर रहा है।

बाहरी लोगों का तुष्टिकरण

संगठन का आरोप है कि बंगाल में बंगालियों के वोट से सरकार जीतती है, लेकिन बाहरी लोगों का तुष्टिकरण करती है। इससे बंगाल के शिक्षित युवाओं को नुकसान हो रहा है। दूसरी तरफ, विभिन्न सरकारी विभागों में भर्ती न होने या भर्ती प्रक्रिया में देरी के कारण बंगाल के शिक्षित युवा मुश्किल में हैं। कई मामलों में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे हैं।

प्रदर्शन में उठाई गई दो मुख्य मांगें

बांग्ला पक्ष ने PSC के सामने दो मुख्य मांगें रखीं:

  1. WBCS सहित सभी राज्य सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में बांग्ला भाषा का लिखित पेपर अनिवार्य किया जाए।
  2. सभी खाली पदों पर तेजी से और पारदर्शी तरीके से भर्ती की जाए।

PSC चेयरमैन से मुलाकात

बांग्ला पक्ष के तीन सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल ने PSC के नवनियुक्त चेयरमैन देबल रॉय से मुलाकात की। प्रतिनिधि मंडल में संगठनात्मक सचिव कौशिक माइती, शीर्ष परिषद सदस्य अरिंदम चट्टोपाध्याय और कोलकाता जिले के सचिव सौम्य बेरा शामिल थे। उन्होंने चेयरमैन के सामने अपनी मांगें रखीं और इस मुद्दे पर त्वरित कार्रवाई की मांग की।

2026 चुनाव से पहले चेतावनी

संगठनात्मक सचिव कौशिक माइती ने कहा कि बंगाल में बंगालियों का वोट पाने के लिए WBCS सहित सभी नौकरियों में बांग्ला भाषा का लिखित पेपर अनिवार्य करना होगा। जो नियम सभी राज्यों में है, वही बंगाल में क्यों नहीं हो सकता? बंगाल क्या धर्मशाला है? बंगाली अपनी भाषा का अधिकार चाहता है। बंगाली अपने बच्चों के लिए नौकरी, काम और व्यवसाय चाहता है। 2026 का चुनाव आ रहा है। बंगालियों का वोट पाने के लिए बांग्ला को अनिवार्य करना ही होगा। बांग्ला पक्ष इसके लिए लड़ रहा है।

भूमिपुत्रों पर खतरा

West Bengal PSC protest Bengali language demand: अरिंदम चट्टोपाध्याय ने कहा कि हिंदी-उर्दू तुष्टिकरण के कारण बंगाल के भूमिपुत्र मुश्किल में हैं। हमारे बच्चे दूसरे राज्यों में बांग्ला में परीक्षा नहीं दे सकते, लेकिन दूसरे राज्यों के लोग यहां आकर अपनी भाषा हिंदी-उर्दू में परीक्षा देकर नौकरियां हड़प रहे हैं। इससे बंगाल के बच्चों को नुकसान हो रहा है। इसके खिलाफ बांग्ला पक्ष का सर्वात्मक आंदोलन जारी रहेगा।

संगठन ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार इन मांगों को पूरा नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। मातृभाषा अधिकार सप्ताह के दौरान और भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।

Asfi Shadab

असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है।

अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है।

वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं।

भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं।

मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) :
• क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज।
• राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग।
• खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग।
• ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना।
• जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना।

विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) :
तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।