Mohammad Salim CPI(M) West Bengal Election Strategy 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनाव से पूर्व हलचल तेज हो गई है। राज्य कमेटी की दो दिवसीय बैठक के उपरांत मोहम्मद सलीम ने एक विस्तृत संवाददाता सम्मेलन कर आगामी चुनावों को लेकर पार्टी की दिशा और रणनीति स्पष्ट की। यह बैठक चुनाव पूर्व अंतिम राज्य कमेटी बैठक थी, जिसमें राजनीतिक प्रस्ताव और चुनावी नीति को औपचारिक स्वीकृति दी गई। इस प्रस्ताव को पोलित ब्यूरो की सहमति भी प्राप्त हुई है।
चुनावी रणनीति और व्यापक वाम एकता का खाका
मोहम्मद सलीम ने स्पष्ट किया कि पार्टी का मुख्य लक्ष्य भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) को संगठनात्मक रूप से सशक्त करना और वाम मोर्चा को मजबूत आधार प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि केवल पारंपरिक वामपंथी दलों तक सीमित रहने के बजाय उन सभी लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष संगठनों को साथ जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, जो वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में वैकल्पिक आवाज बन सकते हैं।
उन्होंने बताया कि 90 प्रतिशत सीटों पर समझौता लगभग पूर्ण हो चुका है। शेष सीटों पर विभिन्न सामाजिक संगठनों, चिकित्सकों, आदिवासी प्रतिनिधियों, महिलाओं और अल्पसंख्यक समुदायों को प्रतिनिधित्व देने की दिशा में वार्ता चल रही है। यह पहल केवल चुनावी गणित तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का प्रयास है।
द्विध्रुवीय राजनीति को तोड़ने का संकल्प
Mohammad Salim CPI(M) West Bengal Election Strategy 2026: सलीम ने कहा कि राज्य में जिस प्रकार की द्विध्रुवीय राजनीति स्थापित करने की कोशिश की जा रही है, उसे तोड़ना आवश्यक है। उनके अनुसार, जनता को केवल दो विकल्पों तक सीमित करना लोकतांत्रिक भावना के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी तीसरे विकल्प के रूप में वामपंथ आगे बढ़ता है, तब उसे कमजोर करने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले एक वर्ष से किसान, खेत मजदूर और श्रमिक वर्ग को एकजुट करने का सतत प्रयास किया गया है। यह आंदोलन केवल चुनावी लाभ के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता की स्थापना के लिए है।
Mohammad Salim CPI(M) West Bengal Election Strategy 2026:
चुनाव आयोग और न्यायपालिका पर टिप्पणी
संवाददाता सम्मेलन में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी तीखी टिप्पणी की गई। सलीम ने कहा कि सुनवाई नोटिसों की संख्या योजनाबद्ध ढंग से बढ़ाई जा रही है, जिससे प्रक्रिया में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वे 27 तारीख को पूर्व सांसदों के साथ चुनाव आयोग के समक्ष उपस्थित होंगे और पहले ही इस संबंध में पत्र भेजा जा चुका है।
सर्वोच्च न्यायालय की हालिया टिप्पणियों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यदि जनता का विश्वास संस्थाओं से उठने लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर संकेत है। उन्होंने राज्य सरकार और चुनाव आयोग दोनों से अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने का आग्रह किया।
नागरिक अधिकारों और मतदाता सूची पर रुख
सलीम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम सूची से हटाया गया, तो पार्टी आंदोलन तेज करेगी। उन्होंने नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार से नागरिक अधिकारों से समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।
वैकल्पिक राजनीति और वैचारिक पुनर्जागरण
Mohammad Salim CPI(M) West Bengal Election Strategy 2026: आगामी कार्यक्रमों की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि भाषा दिवस पर ‘रेड बुक डे’ मनाया जाएगा, जिसमें अपनी भाषा में मार्क्सवादी विचारधारा की चर्चा होगी। पार्टी ने इसके लिए विशेष पुस्तकों का प्रकाशन भी किया है।
एक विशेष पहल के रूप में, बुद्धदेव भट्टाचार्य की जयंती पर राज्यव्यापी कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की गई। उनके नाम पर एक सांस्कृतिक केंद्र स्थापित करने की योजना भी सामने रखी गई, जिसकी शुरुआत कोलकाता में की जाएगी। इसके माध्यम से औद्योगिक विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के उस दृष्टिकोण को पुनर्जीवित करने का प्रयास होगा, जिसे कभी राज्य की पहचान माना जाता था।
सलीम ने यह भी कहा कि पार्टी अपना घोषणापत्र विधानसभा क्षेत्र आधारित और स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित बनाएगी। इसके लिए हजारों मोहल्ला बैठकों का आयोजन किया जा चुका है और आगे भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी।
युवा नेतृत्व और संगठनात्मक आत्मविश्वास
उन्होंने दावा किया कि नई पीढ़ी का वास्तविक नेतृत्व केवल वामपंथ के पास है। अन्य दलों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि वैचारिक प्रतिबद्धता और संगठनात्मक अनुशासन ही किसी राजनीतिक दल की असली पूंजी होती है।
अंत में सलीम ने कहा कि पार्टी किसी लॉबी या बाहरी दबाव में कार्य नहीं करती। नीतिगत स्पष्टता और नैतिक आधार ही उसकी शक्ति है। आगामी चुनावों में यही आधार जनता के सामने रखा जाएगा।