अंदरूनी कलह ने बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किलें
West Bengal Congress clash: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले राजनीति पूरी तरह गरमा गई है, लेकिन इस बार लड़ाई सिर्फ पार्टियों के बीच नहीं बल्कि पार्टियों के अंदर भी देखने को मिल रही है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अंदर जो हालात बन रहे हैं, वो साफ दिखा रहे हैं कि चुनाव से पहले ही पार्टी अंदर से हिल गई है। हाल ही में कांग्रेस ने 294 सीटों में से 284 सीटों पर उम्मीदवारों की एक बड़ी सूची जारी की। यह फैसला पार्टी के केंद्रीय नेताओं की बैठक के बाद लिया गया था और इसमें कई बड़े नामों के साथ-साथ नए चेहरों को भी मौका दिया गया। लेकिन जैसे ही यह सूची सामने आई, कई जगहों पर विरोध शुरू हो गया और यही विरोध अब झगड़े और हिंसा तक पहुंच गया है।

कोलकाता मुख्यालय में दो गुट आमने-सामने
West Bengal Congress clash: कोलकाता में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय के बाहर जो हुआ, वो सिर्फ एक सामान्य विरोध नहीं था। वहां पार्टी के ही दो गुट आमने-सामने आ गए। मामला बालीगंज सीट से जुड़ा था, जहां रोहन मित्रा को उम्मीदवार बनाए जाने पर स्थानीय कार्यकर्ता भड़क गए। उनका आरोप है कि पहले जायद हुसैन को टिकट देने का भरोसा दिया गया था, लेकिन आखिरी समय में फैसला बदल दिया गया। यहीं से गुस्सा फूट पड़ा। कार्यकर्ता मुख्यालय पहुंचे, नारेबाजी शुरू हुई, पोस्टर लगाए गए और फिर देखते ही देखते माहौल बिगड़ गया। पहले बहस हुई, फिर धक्का-मुक्की और फिर सीधे मारपीट। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हालात इतने खराब हो गए कि एक कार्यकर्ता के सिर पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया गया, जिससे वह घायल हो गया। पुलिस मौके पर थी, लेकिन उसके सामने ही यह सब होता रहा।
“बाहरी बनाम स्थानीय” विवाद ने भड़काया गुस्सा
West Bengal Congress clash: इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा मुद्दा “बाहरी उम्मीदवार” बनाम “स्थानीय नेता” का है। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी ऐसे लोगों को टिकट दे रही है जिनका इलाके से कोई जुड़ाव नहीं है, जबकि सालों से काम कर रहे स्थानीय नेताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। कुछ लोगों ने तो यह तक आरोप लगा दिया कि टिकट पैसे लेकर दिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, इस झड़प के दौरान महिला कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी और एक महिला के बेहोश होने की भी बात सामने आई है। कुछ कार्यकर्ताओं ने युवा नेता काशिफ रजा पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने अपने समर्थकों के जरिए हमला करवाया।
एक सीट नहीं, कई जिलों में फैल चुका है विरोध
West Bengal Congress clash: अगर इसे सिर्फ एक जगह की घटना समझें तो बात अधूरी होगी। असलियत यह है कि कांग्रेस के अंदर यह नाराजगी कई जिलों में फैल चुकी है। आमता, बगनान, श्यामपुर, उलूबेड़िया दक्षिण और उलूबेड़िया पूर्व जैसे इलाकों से भी विरोध की खबरें आई हैं। कहीं प्रदर्शन हुआ, तो कहीं पार्टी दफ्तरों में तोड़फोड़ तक कर दी गई। पूर्व बर्धमान में तो नाराज कार्यकर्ताओं ने जिला कांग्रेस कार्यालय के ताले तोड़ दिए, जबकि फालाकाटा में भी ब्लॉक ऑफिस में तोड़फोड़ की गई। यानी यह साफ संकेत है कि समस्या सिर्फ एक सीट या एक नेता की नहीं, बल्कि पूरी टिकट वितरण प्रक्रिया को लेकर असंतोष है।
वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी ने बढ़ाई चिंता
West Bengal Congress clash: पार्टी के वरिष्ठ नेता भी इससे खुश नहीं हैं। पूर्व विधायक असीत मित्रा ने खुलकर कहा कि अगर स्थानीय कार्यकर्ताओं की अनदेखी होगी तो संगठन कमजोर होगा और चुनाव में इसका सीधा नुकसान होगा। अगर बड़े परिप्रेक्ष्य में देखें तो पश्चिम बंगाल में पहले ही कांग्रेस की स्थिति कमजोर रही है और उसे लगातार दूसरी पार्टियों से चुनौती मिल रही है। ऐसे में अंदरूनी लड़ाई पार्टी के लिए और बड़ा खतरा बन सकती है।
कुल मिलाकर, जो तस्वीर निकलकर सामने आ रही है, वह यह है कि कांग्रेस चुनाव से पहले ही अपने ही घर में संघर्ष कर रही है। कार्यकर्ता नाराज हैं, नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं और जमीन पर संगठन बिखरता नजर आ रहा है। अगर यही हाल रहा, तो चुनाव में इसका असर दिखना लगभग तय माना जा रहा है।