जरूर पढ़ें

विधानसभा चुनाव से पहले TMC को बड़ा झटका! पूर्वी रॉय प्रधान ने थामा BJP का दामन

2021 में एग्जिट पोल ने बंगाल में दिखाई थी BJP की जीत , लेकिन पलट गए नतीजे; क्या 2026 में भी इतिहास दोहराएगा?
2021 में एग्जिट पोल ने बंगाल में दिखाई थी BJP की जीत , लेकिन पलट गए नतीजे; क्या 2026 में भी इतिहास दोहराएगा?

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल पार्षद पूर्वी रॉय प्रधान ने भाजपा ज्वाइन कर सियासी हलचल बढ़ा दी है। पार्टी उम्मीदवार से नाराजगी के चलते उन्होंने यह फैसला लिया। इस घटनाक्रम को भाजपा की मजबूती और तृणमूल के लिए चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।

Updated:

Purvi Roy Pradhan Join BJP: पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सियासत गरमा गई है। हल्दिबारी नगरपालिका की तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्षद पूर्वी रॉय प्रधान ने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है। मतदान से महज एक सप्ताह पहले पार्टी बदलने के बाद राजनीति में नई हलचल पैदा हो गयी है.

पूर्वी रॉय ने क्यों छोड़ा TMC

दरअसल, मेखलीगंज विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर परेश चंद्र अधिकारी को अपना उम्मीदवार बनाया है। उनके नाम की घोषणा होते ही पार्टी के भीतर असंतोष की आवाजें उठने लगी थीं। शिक्षक भर्ती घोटाले में उनका नाम अप्रत्यक्ष रूप से सामने आने और अपनी बेटी को नौकरी दिलाने के आरोपों ने उनकी छवि को लेकर सवाल खड़े किए हैं। इन्हीं कारणों से पूर्वी रॉय प्रधान नाराज थीं और उन्होंने खुलकर पार्टी के फैसले पर सवाल उठाए।

कूचबिहार से 8 बार सांसद रही है पूर्वी रॉय

पूर्वी रॉय का यह कदम अचानक नहीं माना जा रहा है। उनके पति और मेखलीगंज के पूर्व विधायक अर्घ्य रॉय प्रधान भी हाल ही में तृणमूल छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। उन्होंने भाजपा नेताओं की मौजूदगी में पार्टी का झंडा थामा था। अब पूर्वी रॉय ने भी उसी राह पर चलते हुए भाजपा जॉइन कर ली है। वह हल्दिबारी नगरपालिका के वार्ड संख्या 7 की पार्षद हैं और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवार से आती हैं. वह कूचबिहार से आठ बार सांसद रहे अमर रॉय प्रधान की बहू हैं।

TMC की प्रतिक्रिया

इधर नगर ब्लॉक अध्यक्ष और हल्दिबारी नगरपालिका के उपाध्यक्ष अमिताभ बिश्वास ने कहा कि पूर्वी रॉय के पार्टी छोड़ने से संगठन पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने पति-पत्नी दोनों को “स्वार्थी” बताते हुए आरोप लगाया कि वे भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं को ध्यान में रखकर फैसले ले रहे हैं।

पूर्वी रॉय बताया अपना विचार

हालांकि, पूर्वी रॉय प्रधान ने अपने फैसले को पूरी तरह वैचारिक बताया है। उनका कहना है कि वह ऐसे उम्मीदवार के लिए जनता से वोट नहीं मांग सकतीं, जिन पर गंभीर आरोप लगे हों। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा से जुड़े भ्रष्टाचार के कारण हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है, जो उनके लिए एक बड़ा मुद्दा है।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।

Dipali Kumari

दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है।

अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है।

वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें।

मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) :
• सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग।
• जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना।
• जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन।
• हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता।

विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) :
जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।