Abhishek Banerjee: अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया है कि 31 जुलाई तक उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। मालूम हो यह मामला चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान से जुड़ा है।
दरअसल, लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान अभिषेक बनर्जी का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। एक चुनावी रैली में उन्होंने अमित शाह को खुली चुनौती देते हुए कहा था, “अगर दम है तो 4 तारीख को कोलकाता में रहिएगा, तब पता चलेगा कौन कितना बड़ा गुंडा है।” इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया था।
साइबर क्राइम थाने में दर्ज हुई थी FIR
इस मामले में बिधाननगर साइबर क्राइम थाने में इस मामले को लेकर एफआईआर दर्ज की गई। यह शिकायत समाजसेवक राजीव सरकार की ओर से की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अभिषेक बनर्जी ने चुनाव प्रचार के दौरान भड़काऊ भाषण दिए और उनके बयान से सार्वजनिक शांति तथा सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा पैदा हो सकता था।
अदालत ने क्या कहा ?
एफआईआर दर्ज होने के बाद अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया और अपने खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने की मांग की। इस मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों और आरोपों की प्रकृति को देखने के बाद फिलहाल हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं लगती।
कोर्ट ने यह भी कहा कि अभिषेक बनर्जी के अधिकार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) के तहत सुरक्षित हैं। इसी आधार पर अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि 31 जुलाई तक या अगले आदेश तक उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कदम न उठाया जाए।
अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के समर्थक इसे बड़ी कानूनी राहत मान रहे हैं, जबकि विपक्ष इस पूरे मामले को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है।
हालांकि, अदालत ने अभी एफआईआर रद्द नहीं की है। मामले की आगे भी सुनवाई होगी और पुलिस जांच जारी रहेगी। लेकिन फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश से अभिषेक बनर्जी को राहत जरूर मिली है। अब सभी की नजर अगली सुनवाई और अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।