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ओडिशा के किसान ने उगाया दुनिया का सबसे महंगा आम! कीमत सुनकर रह जाएंगे हैरान

ओडिशा के किसान ने उगाया दुनिया का सबसे महंगा आम!
ओडिशा के किसान ने उगाया दुनिया का सबसे महंगा आम! (Pic Credit- X @NewsJagranHQ)

ओडिशा के एक छोटे से गांव में लगा एक आम का पेड़ इन दिनों लोगों के बीच कौतूहल का केंद्र बना हुआ है। इसकी वजह सिर्फ इसका रंग या स्वाद नहीं, बल्कि इसकी कीमत है। कहा जा रहा है कि इस आम की कीमत लाखों में है, जिसके बाद किसान रातभर इसकी रखवाली करने को मजबूर हो गया है।

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Miyazaki Mango in Odisha: ओडिशा के मलकानगिरी जिले के एक छोटे से गांव में इन दिनों एक आम का पेड़ लोगों के बीच चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है। वजह है उस पेड़ पर लगे खास आम, जिनकी कीमत सोने को भी टक्कर देती है। तमसा गांव के किसान देबा पाधियामी ने अपने बगीचे में दुनिया की सबसे महंगी आम की किस्मों में गिने जाने वाले ‘मियाजाकी’ आम उगाकर सबको हैरान कर दिया है।

 करीब 3 लाख रुपये प्रति किलो

मियाजाकी आम मूल रूप से जापान के मियाजाकी प्रांत में उगाया जाता है। इसे ‘ताइयो नो तामागो’ यानी “सूरज का अंडा” भी कहा जाता है। यह आम अपने गहरे लाल-बैंगनी रंग, बेहद मीठे स्वाद और मुलायम गूदे के लिए दुनिया भर में मशहूर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 3 लाख रुपये प्रति किलो तक बताई जाती है। यही वजह है कि इसे लग्जरी फलों की श्रेणी में रखा जाता है।

‘मियाजाकी’ आम
‘मियाजाकी’ आम

समाजसेवी ने दिया था पौधा, 4 साल बाद मिला फल

करीब चार साल पहले देबा पधियामी को यह पौधा एक समाजसेवी से मिला था। शुरुआत में उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि यह आम इतना खास निकलेगा। लेकिन उन्होंने धैर्य और मेहनत के साथ इस पौधे की देखभाल जारी रखी। ओडिशा की कठिन जलवायु और मौसम की चुनौतियों के बीच आखिरकार इस पेड़ पर फल आने लगे। जैसे ही लोगों को इसकी जानकारी मिली, गांव में इस पेड़ को देखने वालों की भीड़ जुटने लगी।

कड़ी सुरक्षा में आम

अब हालात ऐसे हैं कि देबा रात में अपने बगीचे में ही सोने लगे हैं। उन्हें डर है कि कहीं कोई इस दुर्लभ आम को चुरा न ले जाए। वह कहते हैं, “ये आम बहुत कीमती हैं। मैं हर समय इनकी निगरानी कर रहा हूं।” आसपास के गांवों से लोग सिर्फ इन आमों की एक झलक देखने के लिए पहुंच रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इस अनोखे पेड़ को देखने के लिए उत्साहित हैं।

देबा को कैसे मिलेगा आम का सही दाम ?

हालांकि इतनी बड़ी उपलब्धि के बावजूद देबा के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। उन्हें अभी तक यह नहीं पता कि इन आमों को बाजार में कैसे बेचना है या सही खरीदार तक कैसे पहुंचाना है। एक्सपोर्ट, पैकिंग और मार्केटिंग की जानकारी न होने के कारण वह फिलहाल सिर्फ अपने फलों को सुरक्षित रखने में जुटे हैं।

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Dipali Kumari

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