जरूर पढ़ें

GST Rejig: जीएसटी दरों में बदलाव के प्रस्ताव को मंत्रिसमूह की मंजूरी, राजस्व को लेकर विपक्ष शासित राज्य ‘आशंकित’

GST Rejig News Today
GST Rejig in India
Updated:

GST Rejig: विभिन्न राज्यों के मंत्रियों के एक समूह ने बृहस्पतिवार को केंद्र के जीएसटी दरों में कटौती के माध्यम से अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में व्यापक सुधारों को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी, लेकिन कुछ विपक्षी दल शासित राज्य यह जानना चाहते हैं कि इस कदम से होने वाले राजस्व नुकसान और उसकी भरपाई कैसे की जाएगी।

5-7 वस्तुओं पर 40 प्रतिशत जीएसटी लगाने का प्रस्ताव

बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता वाले मंत्रिसमूह ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत स्लैब की संख्या चार (5, 12, 18 और 28 प्रतिशत) से घटाकर दो (5 और 18 प्रतिशत) करने के केंद्र के प्रस्ताव पर चर्चा की। केंद्र ने पांच-सात चुनिंदा वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाने का भी प्रस्ताव रखा है।

विलासिता वाली वस्तुओं पर अतिरिक्त कर भी लगेगा

मंत्रिसमूह आम आदमी के लिए फायदेमंद होने पर दर और स्लैब में बदलाव के पक्ष में है, लेकिन कुछ सदस्य चाहते थे कि महंगी कारों जैसी विलासिता वाली वस्तुओं पर विशेष 40 प्रतिशत कर के अलावा एक अतिरिक्त कर लगाया जाए।

GST Rejig: जीएसटी परिषद को भेजी जाएंगी सिफारिशें

छह सदस्यीय मंत्रिसमूह की सिफारिशें (GST Rejig) उच्चस्तरीय जीएसटी परिषद को भेजी जाएंगी, जो सुधारों पर अंतिम निर्णय लेगी। मंत्रिसमूह में भाजपा शासित राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से तीन-तीन सदस्य और विपक्षी शासित राज्यों कर्नाटक (कांग्रेस), केरल (वाम मोर्चा) और पश्चिम बंगाल (तृणमूल कांग्रेस) से समान संख्या में सदस्य शामिल हैं।

मंत्रिसमूह ने 12 और 28 प्रतिशत के स्लैब को हटाने की मंजूरी दी

बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, ‘‘मंत्रिसमूह ने केंद्र के दोनों प्रस्तावों को स्वीकार करने का फैसला किया है। केंद्र के 12 और 28 प्रतिशत के स्लैब हटाने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया है और हमने अपनी सिफारिशें दे दी हैं।’’

यूपी के वित्त मंत्री बोले- सभी राज्यों ने किया प्रस्ताव का स्वागत

उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि सभी राज्यों ने केंद्र के प्रस्ताव का स्वागत किया है और कहा है कि यह आम आदमी के हित में है। महंगी कार जैसे विलासिता वाले सामान और अहितकर उत्पाद 40 प्रतिशत कर दायरे में आएंगे।

Also Read : EPS-95 Pension Scheme: ईपीएस-95 के तहत आधा से अधिक पेंशनभोगी को 1,500 रुपए से भी कम पेंशन

खन्ना ने कहा, ‘‘कुछ राज्यों की मांग है कि नई कर व्यवस्था लागू होने पर राज्यों को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए। राजस्व नुकसान की गणना की जाएगी।’’

बंगाल की वित्त मंत्री ने कहा- राजस्व नुकसान को शामिल नहीं किया

पश्चिम बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि दरों को युक्तिसंगत बनाने (GST Rejig) पर मंत्रिसमूह के समक्ष प्रस्तुत केंद्र के प्रस्ताव में दरों और स्लैब में बदलाव के कारण होने वाले राजस्व नुकसान को शामिल नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने कहा है कि हम दर को युक्तिसंगत बनाने के प्रस्ताव के साथ सहमत हैं, जो लोगों के हित हो। लेकिन हमें यह भी पता होना चाहिए कि इससे हमें कितना राजस्व नुकसान होगा। क्योंकि, अंततः, यदि किसी राज्य को कोई नुकसान होता है, तो इसका असर आम आदमी पर पड़ता है। जीएसटी परिषद दर को युक्तिसंगत बनाने प्रस्ताव पर हर मद में चर्चा करेगी।’’

Also Read : Success Story of PVTG Girl: झारखंड पुलिस ने जेपीएससी पास करने वाली पहाड़िया बेटी को किया सम्मानित

भट्टाचार्य ने कहा कि उन्होंने सुझाव दिया है कि जीएसटी अधिनियम की धारा (1) में संशोधन किया जाए ताकि 40 प्रतिशत की अधिकतम स्वीकार्य दर से ऊपर एक शुल्क लगाया जा सके। इससे यह सुनिश्चित होगा कि स्लैब में बदलाव और क्षतिपूर्ति उपकर समाप्त होने के बाद भी अति-विलासिता और अहितकर वस्तुओं पर कराधान समान रहे।

वर्तमान में, तंबाकू उत्पादों, कोका कोला, पेप्सी जैसे पेय पदार्थ और मोटर वाहन जैसी चुनिंदा वस्तुओं पर अलग-अलग दरों पर जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर लगाया जाता है।

तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि राज्यों के राजस्व की सुरक्षा सुनिश्चित करके दरों को युक्तिसंगत बनाया जाना चाहिए। अन्यथा, गरीब लोगों, मध्यम वर्ग और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए बनाई गई कल्याणकारी योजनाओं को नुकसान होगा।

Also Read : Jharkhand Municipal Elections: पिछड़ा वर्ग आयोग ने आरक्षण संबंधी ‘ट्रिपल टेस्ट’ प्रक्रिया पूरी की, निकाय चुनाव का रास्ता साफ

राज्य सरकार के बयान में कहा गया है कि तेलंगाना जीएसटी सुधारों के तहत दर को युक्तिसंगत बनाने समर्थन करता है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि राजस्व नुकसान की स्थिति उचित क्षतिपूर्ति की व्यवस्था हो।

तेलंगाना का सुझाव – क्षतिपूर्ति उपकर व्यवस्था जारी रखी जाए

तेलंगाना के मंत्री ने सुझाव दिया कि या तो मौजूदा क्षतिपूर्ति उपकर व्यवस्था जारी रखी जाए, या फिर विलासिता या अहितकर वस्तुओं पर जीएसटी की दरें उनके वर्तमान स्तर तक बढ़ाई जा सकती हैं और इस प्रकार एकत्रित अतिरिक्त राशि राज्यों को दी जा सकती है।

Rashtra Bharat Digital Team

Stay updated with the latest news and insights on business, politics, AI, startups, government, and more from the Rashtra Bharat Digital & Editorial Team.