AI impact on jobs and economy: सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एआई तेजी से इंसानी काम की जगह ले रहा है। मशीनें इंसानों से तेज और सस्ती हो रही हैं, और कंपनियां स्वाभाविक रूप से उन्हें अपनाएंगी। इससे लोगों की कमाई घट सकती है, उपभोक्ता खर्च कम होगा और कुल मिलाकर बाजार में मांग घटने से आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ सकती हैं। इस प्रक्रिया के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे मंदी की ओर बढ़ सकती है। रिपोर्ट भारत के लिए भी चेतावनी देती है। यदि मौजूदा रफ्तार से एआई का विस्तार जारी रहा, तो 2028 तक भारत को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से बातचीत करनी पड़ सकती है। खासकर भारतीय आईटी सेक्टर, जो बड़ी हद तक मानव श्रम और कम लागत पर आधारित है, सबसे अधिक प्रभावित हो सकता है। एआई आधारित कोडिंग और ऑटोमेशन टूल्स तेजी से सस्ते हो रहे हैं, जिससे TCS, Infosys और Wipro जैसी बड़ी कंपनियों के कॉन्ट्रैक्ट्स घट सकते हैं। आय में गिरावट से रुपये की विनिमय दर पर दबाव पड़ सकता है और मुद्रा कमजोर हो सकती है। सरल भाषा में कहें तो, अगर एआई लगातार मानव श्रम की जगह लेता रहा, तो सेवा-आधारित अर्थव्यवस्था वाले देशों को गंभीर आर्थिक दबाव झेलना पड़ सकता है।

ऑफिस, टेक और प्रोफेशनल नौकरियां प्रभावित
AI impact on jobs and economy: रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आने वाले समय में बड़े पैमाने पर नौकरी कटौती हो सकती है। विशेषकर ऑफिस, टेक और प्रोफेशनल नौकरियां प्रभावित होंगी। हालांकि, नई तकनीक और एआई कुछ नई नौकरियां भी पैदा करेगा, जैसे प्रांप्ट इंजीनियर, एआई सेफ्टी रिसर्चर और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर टेक्निशियन। लेकिन नई नौकरियों की सैलरी पुराने पदों से कम हो सकती है, जिसका मतलब यह है कि नौकरी खत्म नहीं होगी, लेकिन काम की प्रकृति बदल जाएगी और लोगों की आय प्रभावित होगी।

AI impact on jobs and economy: वैश्विक शेयर बाजार में घबराहट
इस तेजी के चलते जिन कंपनियों का बिज़नेस मॉडल केवल सस्ती मानव मजदूरी पर आधारित है, उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है। एआई और ऑटोमेशन के चलते कंपनियों की लागत कम हो जाएगी, मुनाफे पर दबाव बढ़ेगा और कमजोर कंपनियां बाजार से बाहर हो सकती हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद वैश्विक शेयर बाजार में घबराहट देखने को मिली और टेक शेयरों में गिरावट आई। अमेरिका में IBM जैसे शेयर प्रभावित हुए और भारत में Wipro, Infosys, TCS जैसे आईटी स्टॉक्स दबाव में रहे। इसका कारण यह था कि निवेशक पहले से ही एआई की क्षमता और उसके संभावित आर्थिक असर को गंभीरता से देख रहे थे।
सकारात्मक पहलू – नई तकनीक-आधारित नौकरियों का निर्माण
AI impact on jobs and economy: रिपोर्ट का मुख्य संदेश साफ है- एआई सिर्फ तकनीक नहीं है, यह पूरी आर्थिक संरचना, नौकरियों और बाजार को बदलने की क्षमता रखता है। अगर सरकारें समय रहते नीतियां नहीं बनातीं, जैसे एआई टैक्स, सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क और कर्मचारियों के पुनः प्रशिक्षण (reskilling) कार्यक्रम, तो आने वाले वर्षों में वैश्विक मंदी, नौकरी में बदलाव और बाजार अस्थिरता जैसी चुनौतियां दुनिया भर में सामने आ सकती हैं। साथ ही, रिपोर्ट यह भी बताती है कि एआई के सकारात्मक पहलू भी हैं। यह नई तकनीक-आधारित नौकरियों का निर्माण कर सकता है, नई सेवाओं और प्रोडक्ट्स को जन्म दे सकता है और कंपनियों के लिए उत्पादनशीलता बढ़ाकर लागत-कुशल बिज़नेस मॉडल तैयार कर सकता है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि सरकारें और कंपनियां समय पर तैयारी करें और इस बदलाव के लिए नीतिगत उपाय अपनाएँ, ताकि आर्थिक अस्थिरता और नौकरियों पर असर को संतुलित किया जा सके।

AI impact on jobs and economy: इस रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को याद दिला दिया है कि एआई सिर्फ तकनीक के तौर पर आगे बढ़ने वाली चीज़ नहीं है, बल्कि इसकी लहरें पूरे आर्थिक तंत्र और रोज़गार पर गहरा असर डाल सकती हैं। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था में मंदी, नौकरियों में बदलाव और बाजार में अस्थिरता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।