रानी मुखर्जी की मर्दानी 3 ने सिनेमाघरों में दी दस्तक
यशराज फिल्म्स की सबसे सफल महिला प्रधान फ्रेंचाइजी मर्दानी का तीसरा भाग यानी मर्दानी 3 सिनेमाघरों में रिलीज हो गया है। इस फिल्म में रानी मुखर्जी एक बार फिर अपने पुराने और निडर अंदाज में नजर आ रही हैं। वह पुलिस अधिकारी शिवानी शिवाजी रॉय की भूमिका में हैं जो समाज की बुराइयों और अपराधियों से लड़ने के लिए जानी जाती हैं। इस बार उनकी लड़ाई केवल अपराधियों से नहीं बल्कि उस ढीले सिस्टम से भी है जो अक्सर गरीबों की चीखें अनसुनी कर देता है। निर्देशक अभिराज मीनावाला ने इस फिल्म को बहुत ही सादगी और सच्चाई के साथ पर्दे पर उतारा है।
फिल्म की कहानी और नया विलेन
मर्दानी 3 की कहानी वहीं से शुरू होती है जहां से शिवानी शिवाजी रॉय का सफर आगे बढ़ता है। इस बार मामला छोटे बच्चों की तस्करी और उनके शोषण का है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक ताकतवर इंसान की बेटी के गायब होने पर पूरा पुलिस विभाग जाग जाता है लेकिन आम गरीब बच्चों के गायब होने पर कोई ध्यान नहीं देता। शिवानी इस भेदभाव के खिलाफ खड़ी होती हैं। इस बार उनके सामने कोई पुरुष अपराधी नहीं बल्कि मल्लिका प्रसाद द्वारा निभाया गया अम्मा का किरदार है। अम्मा एक ऐसी महिला है जो एक बहुत बड़े तस्करी नेटवर्क को चलाती है। वह जितनी शांत दिखती है उतनी ही खतरनाक है। शिवानी का सामना एक ऐसी दुश्मन से है जो कानून और समाज के हर दांव-पेच को अच्छी तरह जानती है।

रानी मुखर्जी का शानदार अभिनय
इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत रानी मुखर्जी हैं। उन्होंने शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार को इतनी खूबसूरती से निभाया है कि दर्शक उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं। रानी ने इस बार भी बिना किसी फालतू ड्रामे के एक गंभीर पुलिस अफसर की भूमिका निभाई है। उनके चेहरे की थकान और आंखों का गुस्सा असली लगता है। फिल्म में उनके चेहरे पर डार्क सर्कल और झुर्रियां साफ दिखती हैं जो यह बताती हैं कि एक पुलिस अधिकारी का जीवन कितना संघर्ष भरा होता है। रानी मुखर्जी ने साबित कर दिया है कि उन्हें किसी बड़े हीरो के सहारे की जरूरत नहीं है वह अकेले ही पूरी फिल्म को अपने कंधों पर खींच सकती हैं।

फिल्म का निर्देशन और अन्य कलाकार
निर्देशक अभिराज मीनावाला ने फिल्म की गति को तेज रखा है। फिल्म लगभग दो घंटे और नौ मिनट की है जिससे दर्शक बोर नहीं होते। फिल्म में जानकी बोडिवाला ने भी अहम भूमिका निभाई है और उनका काम भी काफी अच्छा है। मल्लिका प्रसाद ने विलेन के रूप में अपनी एक अलग छाप छोड़ी है। हालांकि पिछले भागों में ताहिर राज भसीन और विशाल जेठवा जैसे विलेन ने जो डर पैदा किया था उसकी तुलना में अम्मा का किरदार थोड़ा अलग है। फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर कहानी की गंभीरता को बढ़ाता है। खास तौर पर जब “ऐगिरी नंदिनी” का संगीत बजता है तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
फिल्म की खूबियां और कमियां
मर्दानी 3 की सबसे बड़ी खूबी इसकी सादगी है। फिल्म में कोई फालतू का रोमांस या गाना नहीं है। यह सीधे मुद्दे की बात करती है। एक्शन सीन बहुत ही साधारण और असली लगते हैं। लेकिन फिल्म में कुछ कमियां भी हैं। कहानी कहीं-कहीं पुरानी फिल्मों जैसी लगती है और कुछ मोड़ पहले से ही पता चल जाते हैं। कुछ दृश्यों में दिखाया गया है कि शिवानी जैसा अनुभवी अफसर बहुत आसानी से दुश्मन के जाल में फंस जाता है जो थोड़ा अजीब लगता है। फिर भी फिल्म का उद्देश्य और संदेश इतना मजबूत है कि ये छोटी कमियां छिप जाती हैं।

समाज को आईना दिखाती फिल्म
यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं है बल्कि यह हमारे समाज की कड़वी सच्चाई भी दिखाती है। फिल्म का एक संवाद बहुत गहरा है जिसमें कहा गया है कि “इस देश में जान बहुत सस्ती है।” यह बात सुनकर दिल बैठ जाता है। फिल्म हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम अपने देश के बच्चों को सुरक्षित माहौल दे पा रहे हैं? तस्करी जैसे गंभीर विषय पर बनी यह फिल्म हर किसी को देखनी चाहिए। यह फिल्म बताती है कि जब तक सिस्टम और समाज अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे तब तक शिवानी शिवाजी रॉय जैसी अफसरों को अकेले ही यह जंग लड़नी पड़ेगी।
अगर आप रानी मुखर्जी के प्रशंसक हैं और आपको सच्ची घटनाओं पर आधारित गंभीर फिल्में पसंद हैं तो मर्दानी 3 आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है। यह फिल्म आपको डराती भी है और सोचने पर मजबूर भी करती है। रानी का अभिनय और फिल्म का कड़क अंदाज इसे एक बार देखने लायक बनाता है। यह फिल्म हमें याद दिलाती है कि समाज में बदलाव लाने के लिए हमें अपनी आवाज उठानी होगी।