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Maternal Mortality India: मां बनने का सफर अब भी क्यों है जोखिम भरा ?

Maternal Mortality India: मां बनने का सफर अब भी क्यों है जोखिम भरा ?
Maternal Mortality India: मां बनने का सफर अब भी क्यों है जोखिम भरा ? ( Image - FB/@Ministry-of-Health-and-Family-Welfare-Government-of-India )

Lancet report 2023 : दुनिया आगे बढ़ गई है, लेकिन मां बनना आज भी कई जगह जानलेवा है। साल 2023 में लाखों महिलाओं की मौत सिर्फ प्रेग्नेंसी और डिलीवरी की जटिलताओं से हुई, और हर 10 में से 1 मातृ मृत्यु भारत में दर्ज हुई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से ज्यादातर मौतें रोकी जा सकती थीं, अगर समय पर सही इलाज और सुविधा मिल जाती।

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Maternal Mortality India
Maternal Mortality India ( image – FB/Thehealthsite.com )

दुनिया की बड़ी रिपोर्ट क्या कहती है ?

Maternal Mortality India: हाल ही में प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित अध्ययन ने दुनिया भर में मातृ मृत्यु की असली स्थिति सामने रखी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में लगभग 2 लाख 40 हजार महिलाओं की मौत गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी जटिलताओं के कारण हुई। आसान भाषा में कहें तो आज भी हर दिन हजारों महिलाएं सिर्फ इसलिए अपनी जान गंवा रही हैं क्योंकि उन्हें समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता। रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में हर एक लाख जीवित जन्म पर औसतन लगभग 190 महिलाओं की मौत हो जाती है। यह आंकड़ा दिखाता है कि कई देशों में स्वास्थ्य सुविधाएं अभी भी कमजोर हैं। हालांकि पहले के मुकाबले हालात बेहतर हुए हैं, लेकिन समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है।

डेटा का आधार और सुधार की धीमी रफ्तार

Maternal Mortality India: यह पूरा अध्ययन आईएचएमई के ग्लोबल बर्डन ऑफ डिज़ीज 2023 विश्लेषण पर आधारित है, जिसमें 200 से अधिक देशों का डेटा शामिल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 1990 में मातृ मृत्यु दर 321 थी, जो अब घटकर लगभग 190 रह गई है। यानी लंबे समय में सुधार हुआ है, लेकिन पिछले कुछ सालों में यह सुधार धीमा पड़ गया है।

Maternal Mortality India
Maternal Mortality India ( image – x.com/@PIB_India )

क्यों चिंता बढ़ रही है ?

Maternal Mortality India: रिपोर्ट यह भी बताती है कि 2015 के बाद कई देशों में मातृ मृत्यु दर में सुधार की रफ्तार लगभग रुक गई है। कुछ जगह तो हालात स्थिर हो गए हैं। इसका मतलब यह है कि पहले जितनी तेजी से सुधार हो रहा था, अब वैसा नहीं हो रहा।

2030 का लक्ष्य और वास्तविकता

Maternal Mortality India: संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य के तहत 2030 तक मातृ मृत्यु दर को 70 से नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के कई देश अभी इस लक्ष्य से काफी दूर हैं। अगर यही गति रही, तो तय समय पर यह लक्ष्य पूरा करना मुश्किल हो सकता है।

भारत की स्थिति: बड़ी संख्या और बड़ी जिम्मेदारी

Maternal Mortality India: भारत में 2023 के दौरान करीब 24,700 महिलाओं की मौत गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी वजहों से हुई। यह दुनिया की कुल मातृ मृत्यु का लगभग 10 प्रतिशत है। यानी हर दस में से एक मां की मौत भारत में हो रही है।

Maternal Mortality India
Maternal Mortality India ( image – Gemini AI )

भारत ने कितना सुधार किया

Maternal Mortality India: अगर लंबे समय की बात करें तो भारत ने बहुत बड़ी प्रगति की है। 1990 में जहां मातृ मृत्यु दर बहुत ज्यादा थी, वहीं अब इसमें लगभग 77-80 प्रतिशत की कमी आ चुकी है। यह सुधार स्वास्थ्य योजनाओं, संस्थागत प्रसव और जागरूकता की वजह से संभव हुआ है।

अभी भी रोकी जा सकने वाली मौतें

Maternal Mortality India: सबसे अहम बात यह है कि ज्यादातर मातृ मृत्यु ऐसी वजहों से होती हैं जिन्हें रोका जा सकता है। जैसे—अत्यधिक रक्तस्राव, गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर बढ़ना और समय पर इलाज न मिलना। अगर सही समय पर अस्पताल और इलाज मिल जाए, तो बहुत सी जानें बचाई जा सकती हैं।

देश के अंदर बड़ा अंतर

Maternal Mortality India: भारत में सभी राज्यों की स्थिति एक जैसी नहीं है। केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में मातृ मृत्यु दर काफी कम हो चुकी है। वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और असम जैसे राज्यों में अभी भी हालात चुनौतीपूर्ण हैं। कुछ राज्यों ने तो बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है-जैसे केरल में मातृ मृत्यु दर काफी कम स्तर तक पहुंच गई है, जो दिखाता है कि सही नीति और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था से बदलाव संभव है।

आगे की सबसे बड़ी जरूरत

Maternal Mortality India: यह रिपोर्ट बताती है कि भारत ने मातृ मृत्यु कम करने में बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन अभी भी बहुत काम बाकी है। असली चुनौती यह है कि स्वास्थ्य सुविधाएं सिर्फ शहरों तक सीमित न रहें, बल्कि गांव और दूरदराज के इलाकों तक पहुंचें। जब तक हर महिला को समय पर अस्पताल, डॉक्टर और सुरक्षित प्रसव की सुविधा नहीं मिलेगी, तब तक यह लड़ाई अधूरी रहेगी। लक्ष्य साफ है-कोई भी मां केवल जन्म देने की प्रक्रिया में अपनी जान न गंवाए।


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Priyanka C. Mishra

प्रियंका सी. मिश्रा वरिष्ठ हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें समाचार लेखन, स्क्रिप्टिंग, रिपोर्टिंग और विश्लेषण में व्यापक अनुभव है। वे सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक विषयों के साथ-साथ बॉलीवुड, ज्योतिष, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल जैसे विविध क्षेत्रों पर लेखन करती हैं। जटिल मुद्दों को सरल और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना उनकी विशेषता है। तथ्यों की सटीकता, निष्पक्ष दृष्टिकोण और संवेदनशील शैली के कारण उन्होंने पाठकों का विश्वास अर्जित किया है। पत्रकारिता, हिंदी कंटेंट निर्माण और यूट्यूब स्क्रिप्ट लेखन के प्रति वे समर्पित हैं।