ठोस सबूतों का अभाव
Bombay High Court verdict: बॉम्बे हाई कोर्ट ने दो महत्वपूर्ण याचिकाएं खारिज कर दीं, जिनमें अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए थे। इन मामलों की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने की। अदालत ने दोनों मामलों में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि याचिकाएं पर्याप्त ठोस साक्ष्यों के अभाव में दायर की गई हैं, इसलिए जांच के आदेश देने का कोई आधार नहीं बनता।

अडानी ग्रीन पर रिश्वतखोरी का आरोप
Bombay High Court verdict: अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड से जुड़े मामले में याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कंपनी और उसके सहयोगियों ने कई राज्यों में सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी की। आरोपों के अनुसार आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर में बिजली वितरण कंपनियों के अधिकारियों को 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की रिश्वत देने की योजना बनाई गई थी। इसके बदले ऊंची दरों पर बिजली खरीद के समझौते किए जाने थे।
इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज और विदेशी जांच का दावा
Bombay High Court verdict: याचिका में कहा गया कि कथित लेन-देन इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों में दर्ज थे, जिन्हें कंपनी के अधिकारी सागर अडानी के पास रखा गया था। बाद में इन दस्तावेजों को फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन द्वारा जब्त किए जाने और अमेरिकी अदालत में पेश किए जाने का दावा किया गया। यह याचिका अमेरिका में चल रही आपराधिक चार्जशीट और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन की समानांतर कार्यवाही से मिली जानकारी के आधार पर दायर की गई थी, जो न्यूयॉर्क के पूर्वी जिले की अदालत में लंबित है।
सीबीआई जांच की मांग
Bombay High Court verdict: सिलवासा निवासी जितेंद्र मारू ने अदालत से अनुरोध किया था कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो/सीबीआई को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने का निर्देश दिया जाए। उनका कहना था कि उन्होंने पहले भी इस मामले की शिकायत जांच एजेंसी को दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बावजूद अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

रिलायंस इंडस्ट्रीज पर आरोप
Bombay High Court verdict: दूसरी याचिका रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसके चेयरमैन मुकेश अंबानी के खिलाफ दायर की गई थी। इसमें आरोप था कि कंपनी ने कृष्णा-गोदावरी बेसिन में ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन के कुओं से अवैध तरीके से प्राकृतिक गैस निकाली।
गैस दोहन का पूरा मामला
Bombay High Court verdict: याचिका के अनुसार, 2004 से 2013-14 के बीच कंपनी ने अपने अनुबंध क्षेत्र से बाहर जाकर साइड ड्रिलिंग की और आसपास के कुओं तक पहुंच बनाकर लगभग 1.55 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की गैस का दोहन किया। इस मामले में भी सीबीआई जांच की मांग की गई थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया।
बॉम्बे हाई कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि न्यायालय केवल आरोपों या विदेशी कार्यवाहियों में सामने आई जानकारी के आधार पर सीधे जांच के आदेश देने से बचता है, जब तक कि उसके समर्थन में ठोस और स्वतंत्र साक्ष्य उपलब्ध न हों।