AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में गृहमंत्री अमित शाह के जनसंख्या संबंधी बयान पर गंभीर आरोप लगाया है। ओवैसी ने कहा कि अमित शाह द्वारा प्रस्तुत आंकड़े झूठे हैं और सरकारी आंकड़ों के अनुसार मुस्लिम आबादी में पहली जनगणना से 2011 तक केवल 4.4% की वृद्धि हुई है।
ओवैसी का बयान और आरोप
ओवैसी ने कहा कि भारत में जनसंख्या को लेकर विरोधाभासी बयान दिए जा रहे हैं। उन्होंने RSS प्रमुख मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कथनों की आलोचना करते हुए कहा कि भागवत पहले कहते हैं कि एक समुदाय की आबादी बढ़ रही है, फिर योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि देशी लोगों की आबादी घट रही है, और अब भागवत तीन बच्चे पैदा करने की बात कह रहे हैं।
ओवैसी ने यह भी सवाल उठाया कि यदि घुसपैठ हो रही है तो गृह मंत्री क्यों इसे रोक नहीं पा रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर बंगाली भाषी मुसलमान को बांग्लादेशी बताना गलत है।
मुस्लिम प्रजनन दर पर आंकड़े
ओवैसी ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि मुस्लिम समुदाय में प्रजनन दर सबसे अधिक घट गई है। उनका कहना है कि वास्तविक तथ्य जनता के सामने प्रस्तुत किए जाने चाहिए, बजाय इसके कि सरकार जनसंख्या को लेकर डर या भ्रम फैला रही है।
बिहार चुनाव और SIR पर ओवैसी की आपत्ति
ओवैसी ने बिहार विधानसभा चुनाव के संदर्भ में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) यानी विशेष मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि नागरिकता की जांच गृह मंत्रालय का काम है, न कि चुनाव आयोग का। ओवैसी ने चेतावनी दी कि जिनके नाम हटाए गए हैं और जिन्होंने जांच की तो मतदान के दिन हंगामा हो सकता है।
AIMIM की बिहार इकाई के प्रमुख अख्तरुल इमान ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की है।
मतदाता सूची में नाम हटने की जानकारी
बिहार चुनाव आयोग ने बताया कि 6 और 11 नवंबर को होने वाले दो चरणों के मतदान से पहले ड्राफ्ट सूची से कुल 6.5 लाख नाम हटाए गए, और बाद में 3.5 लाख नाम और हटाए गए। यह प्रक्रिया राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बनी हुई है।
चुनाव और राजनीतिक प्रतिक्रिया
ओवैसी के आरोपों ने बिहार में आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। AIMIM प्रमुख ने जनसंख्या के मुद्दे को संवेदनशील बताते हुए कहा कि सरकार के बयान तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं और इसे लेकर जनता को भ्रमित किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे आरोप और सरकारी आंकड़ों का विरोध चुनावी रणनीतियों और सामाजिक ध्रुवीकरण पर भी प्रभाव डाल सकता है। बिहार में चुनाव परिणामों पर जनसंख्या और मतदाता सूची संशोधन से जुड़ी बहस अहम भूमिका निभा सकती है।
असदुद्दीन ओवैसी के बयान ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनसंख्या और मतदाता सूची संशोधन के मुद्दे आने वाले चुनाव और सामाजिक संवाद पर लंबे समय तक असर डाल सकते हैं।