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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गोवा में भारतीय तटरक्षक बल के पहले स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण जहाज ‘समुद्र प्रताप’ को किया कमीशन

Samudra Pratap Ship Commission: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गोवा में तटरक्षक बल के पहले स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण जहाज को किया कमीशन
Samudra Pratap Ship Commission: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गोवा में तटरक्षक बल के पहले स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण जहाज को किया कमीशन (Image Source: AIR)
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गोवा में भारतीय तटरक्षक बल के पहले स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण जहाज 'समुद्र प्रताप' को कमीशन किया। गोवा शिपयार्ड द्वारा निर्मित 114 मीटर लंबा यह जहाज 70 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से बना है। यह समुद्री प्रदूषण नियंत्रण, कानून प्रवर्तन और विशेष आर्थिक क्षेत्र की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज गोवा में भारतीय तटरक्षक बल के पहले स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित प्रदूषण नियंत्रण जहाज ‘समुद्र प्रताप’ को राष्ट्र को समर्पित किया। यह जहाज समुद्री प्रदूषण नियंत्रण, समुद्री कानून लागू करने, खोज और बचाव कार्य तथा देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में काम करेगा। यह पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण जहाज है जिसमें 70 प्रतिशत से अधिक घरेलू सामग्री का उपयोग किया गया है।

समुद्र प्रताप के कमीशन समारोह में रक्षा मंत्री ने इस जहाज को देश के सामूहिक संकल्प और समुद्री आत्मविश्वास का प्रतीक बताया। श्री सिंह ने जलवायु परिवर्तन के सामने समुद्री जैव विविधता की रक्षा को एक नैतिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि यह जहाज प्रवाल भित्तियों और तटीय समुदायों की सुरक्षा करेगा। मंत्री ने उद्योग जगत से भविष्य की परियोजनाओं में 90 प्रतिशत स्वदेशीकरण का लक्ष्य रखने का आग्रह किया।

गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित यह 114 मीटर लंबा हाइब्रिड प्रदूषण नियंत्रण जहाज आत्मनिर्भर भारत की ताकत का प्रतीक है। यह तेल रिसाव का पता लगाने और उसे साफ करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें आधुनिक स्वीपिंग आर्म्स और डायनामिक पोजिशनिंग तकनीक लगी है।

समुद्र प्रताप की खासियत

समुद्र प्रताप भारतीय तटरक्षक बल का पहला ऐसा जहाज है जो पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से बनाया गया है। इसमें एक हेलीकॉप्टर हैंगर भी है जो इसकी परिचालन क्षमता को काफी बढ़ा देता है। यह जहाज समुद्र में होने वाले तेल रिसाव और अन्य प्रदूषण को रोकने में सक्षम है। इसमें लगी आधुनिक तकनीक की मदद से तेल के फैलाव को जल्दी से नियंत्रित किया जा सकता है।

यह जहाज देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। समुद्री कानून को लागू करने, खोज और बचाव अभियान चलाने तथा समुद्री सीमाओं की निगरानी करने में यह जहाज बेहद उपयोगी साबित होगा। इसकी डायनामिक पोजिशनिंग तकनीक इसे किसी भी मौसम में स्थिर रखने में मदद करती है।

आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक

समुद्र प्रताप आत्मनिर्भर भारत अभियान की एक बड़ी उपलब्धि है। इस जहाज में 70 प्रतिशत से अधिक सामग्री और तकनीक भारत में ही बनाई गई है। गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने इस जहाज को बनाने में अपनी पूरी क्षमता का उपयोग किया है। यह भारतीय रक्षा उद्योग के बढ़ते हुए विकास को दर्शाता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य में इस तरह की परियोजनाओं में 90 प्रतिशत स्वदेशीकरण का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए देश की अपनी क्षमता को और मजबूत बनाना होगा। इससे न केवल देश की सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा

रक्षा मंत्री ने समुद्री जैव विविधता की रक्षा को एक नैतिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में समुद्री पर्यावरण को बचाना बेहद जरूरी है। समुद्र प्रताप इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह जहाज प्रवाल भित्तियों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की सुरक्षा करने में मदद करेगा।

समुद्र में तेल रिसाव से होने वाले प्रदूषण से समुद्री जीवन को काफी नुकसान होता है। यह जहाज ऐसे रिसाव को जल्दी से नियंत्रित करने में सक्षम है। इसमें लगे आधुनिक उपकरण तेल के फैलाव को रोकते हैं और समुद्री पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद करते हैं।

भारतीय तटरक्षक बल की बढ़ती ताकत

समुद्र प्रताप के कमीशन से भारतीय तटरक्षक बल की क्षमता में काफी इजाफा होगा। यह जहाज न केवल प्रदूषण नियंत्रण में मदद करेगा बल्कि समुद्री सुरक्षा के अन्य पहलुओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। तटरक्षक बल देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा करता है और समुद्री अपराधों को रोकता है।

इस जहाज में हेलीकॉप्टर हैंगर होने से इसकी पहुंच काफी बढ़ जाती है। हेलीकॉप्टर की मदद से दूर-दराज के समुद्री क्षेत्रों में भी जल्दी पहुंचा जा सकता है। यह खोज और बचाव अभियानों में बेहद उपयोगी साबित होगा। समुद्र में किसी भी आपात स्थिति में यह जहाज तुरंत मदद पहुंचा सकता है।

तकनीकी उत्कृष्टता

114 मीटर लंबा यह हाइब्रिड जहाज आधुनिक तकनीक का बेहतरीन नमूना है। इसमें लगे स्वीपिंग आर्म्स तेल रिसाव को साफ करने में बेहद प्रभावी हैं। डायनामिक पोजिशनिंग सिस्टम जहाज को समुद्र में एक जगह स्थिर रखने में मदद करता है। यह तकनीक खराब मौसम में भी जहाज को सुरक्षित रखती है।

जहाज में लगे आधुनिक सेंसर और उपकरण तेल रिसाव का जल्दी पता लगाने में मदद करते हैं। इससे प्रदूषण को फैलने से पहले ही नियंत्रित किया जा सकता है। यह जहाज लंबी अवधि तक समुद्र में रहकर काम कर सकता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान

समुद्र प्रताप देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत की समुद्री सीमाएं बहुत लंबी हैं और इनकी निगरानी करना एक बड़ी चुनौती है। यह जहाज विशेष आर्थिक क्षेत्र में गश्त करेगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखेगा।

समुद्री कानून को लागू करने में भी यह जहाज मददगार होगा। अवैध मछली पकड़ने, तस्करी और अन्य समुद्री अपराधों को रोकने में यह प्रभावी भूमिका निभाएगा। इससे देश की समुद्री संपदा की भी रक्षा होगी।

भविष्य की योजनाएं

रक्षा मंत्री ने भविष्य में और अधिक स्वदेशी जहाज बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी रक्षा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बनना होगा। समुद्र प्रताप इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में और भी ऐसे आधुनिक जहाज भारतीय तटरक्षक बल और नौसेना में शामिल होंगे।

गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने इस परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा करके अपनी क्षमता साबित की है। भविष्य में और बड़ी परियोजनाएं भारतीय शिपयार्ड को मिलेंगी। इससे देश का रक्षा उद्योग और मजबूत होगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

समुद्र प्रताप का कमीशन भारत के समुद्री इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह जहाज न केवल समुद्री प्रदूषण से लड़ेगा बल्कि देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा भी करेगा। आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में यह एक मजबूत कदम है।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।