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Jharkhand Cyber Fraud: रांची में साइबर ठगों ने युवक के नाम पर लिया 25 लाख का फर्जी ऋण, बैंक नोटिस से खुला बड़ा जालसाज़ी कांड

Jharkhand Cyber Fraud
Jharkhand Cyber Fraud – रांची में युवक के नाम पर लिया गया 25 लाख का फर्जी लोन, साइबर अपराधियों ने रची गहरी साज़िश (Source: Unsplash)
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Jharkhand Cyber Fraud: साइबर ठगी की नई कहानी: रांची में युवक के नाम पर लिया गया 25 लाख रुपये का लोन

रांची में एक चौंकाने वाला साइबर अपराध सामने आया है, जिसने डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था पर गहरे प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। शहर के हिनू क्षेत्र में रहने वाले एक युवक के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर अज्ञात अपराधियों ने उसके नाम पर 25 लाख रुपये का पर्सनल लोन प्राप्त कर लिया। यह मामला तब प्रकाश में आया जब बैंक की ओर से ईएमआई भुगतान का नोटिस आया और युवक को ठगी की पूरी साज़िश का अहसास हुआ।


पीड़ित को बैंक से आए कॉल ने खोल दी ठगी की परत

पीड़ित अविनाश कुमार ने साइबर थाना, रांची में दर्ज अपनी शिकायत में बताया कि उन्हें हाल ही में एचडीएफसी बैंक की ओर से ईएमआई भुगतान का कॉल आया। उन्होंने जब इस संबंध में बैंक अधिकारियों से संपर्क किया, तो उन्हें बताया गया कि उनके नाम पर जमशेदपुर शाखा से लगभग 24,94,118 रुपये का पर्सनल लोन स्वीकृत किया गया है।

यह सुनते ही अविनाश के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी ऐसा कोई लोन आवेदन नहीं किया, न ही उन्होंने किसी दस्तावेज़ को किसी के साथ साझा किया था।


मोबाइल हैकिंग के ज़रिए की गई पूरी प्रक्रिया

Jharkhand Cyber Fraud: बैंक अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच में बताया कि अपराधियों ने किसी तकनीकी माध्यम से अविनाश के मोबाइल फ़ोन और ईमेल आईडी को हैक कर लिया था। उनके व्यक्तिगत दस्तावेज़, जैसे पैन कार्ड, वोटर आईडी और पता संबंधी जानकारी का इस्तेमाल कर लोन की पूरी प्रक्रिया को बिना किसी ओटीपी सत्यापन के पूरा कर लिया गया।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक परिष्कृत फिशिंग अटैक का उदाहरण है, जिसमें अपराधी नकली वेबसाइट या ईमेल के माध्यम से व्यक्तिगत डेटा चुरा लेते हैं और फिर वित्तीय संस्थानों को गुमराह कर बड़े पैमाने पर ठगी को अंजाम देते हैं।


पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू की, बैंक से मांगी गई तकनीकी जानकारी

साइबर थाना, रांची के अधिकारियों ने बताया कि शिकायत प्राप्त होते ही प्राथमिक जांच आरंभ कर दी गई है। पुलिस ने एचडीएफसी बैंक से संबंधित सभी लेनदेन विवरण, आवेदन प्रक्रिया की डिजिटल ट्रेल और संबंधित IP एड्रेस की जानकारी मांगी है।
जांच दल ने यह भी संकेत दिया है कि अपराधियों ने संभवतः मोबाइल मैलवेयर या क्लोन सिम कार्ड तकनीक का इस्तेमाल किया होगा।


पहचान की सुरक्षा के लिए चेतावनी

इस घटना के बाद साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने आम नागरिकों को सचेत किया है कि वे अपने मोबाइल और ईमेल अकाउंट की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि किसी भी संदिग्ध लिंक या अनजाने कॉल पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
साथ ही, बैंक ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे अपने क्रेडिट रिपोर्ट की नियमित निगरानी करें ताकि किसी भी अनधिकृत लोन या क्रेडिट गतिविधि की जानकारी समय रहते मिल सके।


पीड़ित की मांग — “फर्जी लोन रद्द हो और सिविल स्कोर सुधारा जाए | Jharkhand Cyber Fraud

अविनाश ने अपने आवेदन में पुलिस और बैंक से अनुरोध किया है कि फर्जी लोन को तत्काल रद्द किया जाए और उनके सिविल स्कोर को सुधारने की प्रक्रिया शुरू की जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि भविष्य में उनके नाम और दस्तावेजों का पुनः दुरुपयोग न हो, इसके लिए आवश्यक साइबर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।


बढ़ते साइबर अपराधों ने बढ़ाई चिंता

पिछले कुछ वर्षों में झारखंड, विशेषकर रांची, जमशेदपुर और धनबाद जैसे शहरों में साइबर अपराधों की घटनाएं तेज़ी से बढ़ी हैं। पुलिस का कहना है कि अधिकांश मामलों में अपराधी फर्जी आईडी, हैकिंग और ऑनलाइन ठगी के ज़रिए लोगों को निशाना बना रहे हैं।
राज्य सरकार ने साइबर सुरक्षा अवसंरचना को मजबूत करने के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने की दिशा में कदम उठाए हैं।

रांची की यह घटना न केवल एक व्यक्ति की आर्थिक हानि का उदाहरण है, बल्कि यह इस बात की चेतावनी भी है कि डिजिटल युग में हमारी पहचान कितनी असुरक्षित हो सकती है। आम नागरिकों को अब अपने डेटा की सुरक्षा के प्रति उतना ही सतर्क रहना होगा जितना कि अपने धन के प्रति।

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Asfi Shadab

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