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नागपुर ग्रामीण क्षेत्र में बाघ-तेंदुए की चेतावनी देने वाली एआई प्रणाली शुरू, 15 अप्रैल तक 40 गांवों में होगी स्थापित

AI tiger alert system for Nagpur rural: नागपुर ग्रामीण में बाघ-तेंदुए की मौजूदगी पर तुरंत अलर्ट देने वाली एआई प्रणाली शुरू। 15 अप्रैल तक 40 संवेदनशील गांवों में होगी स्थापित।
AI tiger alert system for Nagpur rural: नागपुर ग्रामीण में बाघ-तेंदुए की मौजूदगी पर तुरंत अलर्ट देने वाली एआई प्रणाली शुरू। 15 अप्रैल तक 40 संवेदनशील गांवों में होगी स्थापित। (File photo)

AI tiger alert system for Nagpur rural:नागपुर के पेंच क्षेत्र के आसपास के गांवों में बाघ और तेंदुओं की मौजूदगी का पता लगाने के लिए एआई आधारित चेतावनी प्रणाली शुरू की गई है। इस तकनीक में कैमरे और ध्वनि पहचान प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। इससे वन विभाग और ग्रामीणों को तुरंत सूचना मिलती है। 15 अप्रैल तक 40 संवेदनशील गांवों में इसे लगाने की योजना है।

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पेंच क्षेत्र में बाघ और तेंदुओं की मौजूदगी बताने वाली एआई प्रणाली शुरू

AI tiger alert system for Nagpur rural: नागपुर, 13 मार्च। वन क्षेत्रों से सटे गांवों में बाघ या तेंदुए की मौजूदगी का तत्काल पता लगाकर ग्रामीणों और वन विभाग को सतर्क करने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित प्रणाली नागपुर ग्रामीण क्षेत्र के तीन स्थानों पर शुरू कर दी गई है। इस प्रणाली से अलर्ट मिलने भी शुरू हो गए हैं।

गुरुवार रात देवलापार के पास पिपरिया गांव में दूसरी बार बाघ की मौजूदगी का संकेत इसी प्रणाली से मिला, जिसकी सूचना तुरंत ग्रामीणों और वन विभाग को भेजी गई। पिछले चार दिनों में बाघ और तेंदुए की उपस्थिति के कुल दो अलर्ट मिल चुके हैं। यह प्रणाली अभी खापा और पारशिवनी क्षेत्र में भी लागू की जा रही है।

15 अप्रैल तक 40 गांवों में विस्तार

वन विभाग की सहायता से 40 संवेदनशील स्थानों की पहचान की गई है। 15 अप्रैल तक वन विभाग के वन्यजीव और प्रादेशिक क्षेत्र मिलाकर इन सभी स्थानों पर प्राथमिकता के आधार पर कैमरे लगाए जा रहे हैं।

15 अप्रैल तक 40 संवेदनशील गांवों में लगाए जाएंगे अलर्ट कैमरे

क्यों पड़ी इसकी ज़रूरत

पिछले ढाई से तीन वर्षों में नागपुर ग्रामीण क्षेत्र में बाघ और तेंदुओं के हमलों में करीब 15 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। इन घटनाओं के बाद ग्रामीणों में बार-बार आक्रोश उभरा और कानून-व्यवस्था की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण बनी। इसी समस्या से निपटने के लिए वन विभाग और नागपुर ग्रामीण पुलिस ने मिलकर एआई तकनीक का सहारा लिया।

कैसे काम करती है यह प्रणाली

‘मार्वेल’ संस्था इस एआई प्रणाली को विकसित कर रही है। नागपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक हर्ष पोद्दार इस संस्था के सीईओ भी हैं। इस तकनीक में लगे अत्याधुनिक कैमरे बायो-अकूस्टिक्स (ध्वनि आधारित) और बायो-विजुअल (दृश्य आधारित) — दोनों प्रणालियों से काम करते हैं।

जब बाघ या तेंदुआ आसपास आता है, तो चीतल, सांभर, बंदर और मोर जैसे शाकाहारी जीव विशेष प्रकार की आवाजें निकालते हैं। एआई प्रणाली इन आवाजों को पहचानकर डेटा का विश्लेषण करती है और तुरंत अलर्ट भेजती है। इसके अलावा, यदि कैमरे में किसी वन्यजीव की तस्वीर कैद होती है, तो भी मोबाइल फोन के माध्यम से वन अधिकारियों और ग्रामीणों को चेतावनी भेजी जाती है।

आगे चलकर इस प्रणाली को नवेगांव-नागझिरा और ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व में भी स्थापित करने की योजना है।


रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।