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दूध में मिलावट पर सख्त हुआ FSSAI, अब दूध बेचने वालों के लिए लाइसेंस अनिवार्य

दूध में मिलावट पर सख्त हुआ FSSAI, अब दूध बेचने वालों के लिए लाइसेंस अनिवार्य
दूध में मिलावट पर सख्त हुआ FSSAI, अब दूध बेचने वालों के लिए लाइसेंस अनिवार्य (Pic Credit- X @RoshanKrRaii)

दूध और डेयरी उत्पादों में बढ़ती मिलावट को रोकने के लिए FSSAI ने नया नियम लागू किया है। अब डेयरी सहकारी समितियों के सदस्यों को छोड़कर सभी दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के लिए लाइसेंस या पंजीकरण अनिवार्य होगा।

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Dipali Kumari
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FSSAI License for Milk Sellers: देशभर में दूध और डेयरी उत्पादों में मिलावट की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए अब सख्ती शुरू हो गई है। लोगों की सेहत से जुड़ी इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने बड़ा फैसला लिया है। नए निर्देशों के तहत अब दूध का उत्पादन करने और बेचने वाले अधिकांश लोगों को कारोबार जारी रखने के लिए FSSAI से पंजीकरण या लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।

दूध बेचने वालों के लिए लाइसेंस अनिवार्य

FSSAI ने इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के फूड सेफ्टी कमिश्नरों को एडवाइजरी जारी की है। इसमें साफ कहा गया है कि जो दूध उत्पादक या विक्रेता किसी डेयरी सहकारी समिति के सदस्य नहीं हैं, उन्हें अब खाद्य व्यवसाय चलाने के लिए अनिवार्य रूप से पंजीकरण या लाइसेंस लेना होगा।

दरअसल, कई जगहों पर यह पाया गया है कि बड़ी संख्या में दूध उत्पादक और विक्रेता बिना किसी लाइसेंस या पंजीकरण के ही कारोबार कर रहे हैं। इससे दूध की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में FSSAI ने इस पर सख्ती बरतने का फैसला किया है, ताकि उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और शुद्ध दूध पहुंच सके।

दूध चिलर्स का होगा निरीक्षण

इसके साथ ही दूध के भंडारण को लेकर भी नई निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी। दूध चिलर्स का समय-समय पर निरीक्षण किया जाएगा। इन चिलर्स का इस्तेमाल दूध उत्पादक और विक्रेता दूध को सुरक्षित रखने के लिए करते हैं। निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि दूध को सही तापमान पर ही रखा जा रहा है और सभी जरूरी नियमों का पालन हो रहा है।

FSSAI का मानना है कि सही तापमान पर दूध का भंडारण होने से उसके खराब होने की संभावना कम हो जाएगी और उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता का दूध मिल सकेगा। साथ ही इससे मिलावट जैसी समस्याओं पर भी काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी।

नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई

अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि यदि कोई दूध उत्पादक या विक्रेता इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य देशभर में दूध और डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता को बेहतर बनाना और लोगों की सेहत की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।