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अब अखबार में समोसा-वड़ा पाव बेचना पड़ सकता है भारी! FSSAI ने जारी की चेतावनी

अब अखबार में समोसा-वड़ा पाव बेचना पड़ सकता है भारी! FSSAI ने जारी की चेतावनी

Newspaper Wrapping Food Ban: अगर आप सड़क किनारे समोसा, पकौड़ी, वड़ा पाव या अन्य स्ट्रीट फूड बेचते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अक्सर देखा जाता है कि दुकानदार गर्मागर्म समोसा या वड़ा पाव अखबार में लपेटकर ग्राहकों को दे देते हैं। लेकिन अब ऐसा करना दुकानदारों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अखबार में खाना परोसने, पैक करने और लपेटने के खिलाफ सख्त निर्देश जारी किए हैं। हाल ही में मुंबई में एक चर्चित वड़ा पाव दुकान द्वारा अखबार में खाद्य पदार्थ परोसने का मामला सामने आया

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दूध में मिलावट पर सख्त हुआ FSSAI, अब दूध बेचने वालों के लिए लाइसेंस अनिवार्य

दूध में मिलावट पर सख्त हुआ FSSAI, अब दूध बेचने वालों के लिए लाइसेंस अनिवार्य

FSSAI License for Milk Sellers: देशभर में दूध और डेयरी उत्पादों में मिलावट की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए अब सख्ती शुरू हो गई है। लोगों की सेहत से जुड़ी इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने बड़ा फैसला लिया है। नए निर्देशों के तहत अब दूध का उत्पादन करने और बेचने वाले अधिकांश लोगों को कारोबार जारी रखने के लिए FSSAI से पंजीकरण या लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। दूध बेचने वालों के लिए लाइसेंस अनिवार्य FSSAI ने इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के फूड सेफ्टी

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FSSAI Ban Sugary ORSL Drinks: दिल्ली हाई कोर्ट ने मीठे ORSL ड्रिंक्स पर लगे प्रतिबंध पर लगाई रोक, कंपनी को मिली अंतरिम राहत

दिल्ली हाई कोर्ट ने मीठे ORSL ड्रिंक्स पर FSSAI के प्रतिबंध पर लगाई रोक, कंपनी को मिली अंतरिम राहत

FSSAI के प्रतिबंध पर दिल्ली हाई कोर्ट की रोक दिल्ली हाई कोर्ट ने FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) द्वारा मीठे ORSL ड्रिंक्स पर लगाए गए प्रतिबंध पर अंतरिम रोक लगा दी है।कोर्ट का यह फैसला उपभोक्ता स्वास्थ्य और औद्योगिक हितों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। यह मामला उस समय चर्चा में आया जब FSSAI ने 14 अक्टूबर 2025 को ‘ORS’ लेबल का प्रयोग मीठे पेयों पर प्रतिबंधित कर दिया था।यह निर्णय बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सिवरांजनी संतोष की आठ वर्ष लंबी मुहिम के बाद लिया गया था, जिन्होंने इन उत्पादों में

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