नागपुर। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने सोमवार को महाराष्ट्र के किसानों और ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत देते हुए घोषणा की कि अब परिवार के सदस्यों के बीच आपसी सहमति से जमीन का बंटवारा करने के लिए तहसीलदार की अनुमति लेना अनिवार्य नहीं होगा। यह नियम सोमवार से प्रभावी हो गया है।
जमीन बंटवारे की प्रक्रिया हुई सरल
अब भाई-बहन या परिवार के किसी भी सदस्य के बीच जमीन का बंटवारा सीधे स्टांप कार्यालय में दर्ज कराया जा सकेगा। इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा — मात्र ₹500 में बंटवारा पत्र का पंजीकरण संभव होगा। पहले यही प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली थी।
महिला आरक्षण पर विपक्ष पर निशाना
मंत्री बावनकुळे ने कहा कि यदि महिला आरक्षण विधेयक लागू होता, तो लगभग 350 महिलाएं लोकसभा में और 170 से अधिक महिलाएं विधानसभाओं में पहुंच सकती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने इस प्रक्रिया में बाधा डाली, जिससे देश की करोड़ों महिलाओं में नाराजगी है और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
अन्य मुद्दों पर मंत्री के बयान
धर्मांतरण विरोधी कानून पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इसे जल्द लागू करने के प्रयास में हैं। सातारा जिला परिषद चुनाव में महायुति के आंतरिक मतभेदों पर मंत्री ने कहा कि एकनाथ शिंदे के बयान के संदर्भ में वे मतभेद सुलझा लिए गए हैं और कोई बड़ा विवाद नहीं है।
पश्चिम बंगाल चुनाव पर उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के हाव-भाव उनकी हार के संकेत दे रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभाओं को मिल रहे समर्थन से भाजपा की जीत का विश्वास है।
कर्मचारी हड़ताल पर उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर विचार कर रही है और उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा। भोंदू खरात संपत्ति मामले में एसआईटी गठित की जा चुकी है और निष्पक्ष जांच जारी है — दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जमीन बंटवारे की नई व्यवस्था के क्रियान्वयन पर राज्य के राजस्व विभाग की नजर रहेगी।
रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र