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नागपुर में भाजपा उम्मीदवार को घर में किया बंद, नामांकन वापसी को लेकर हंगामा

Nagpur BJP Candidate Locked By Supporters: नागपुर में भाजपा उम्मीदवार को घर में बंद करने का विवाद
Nagpur BJP Candidate Locked By Supporters: नागपुर में भाजपा उम्मीदवार को घर में बंद करने का विवाद (File Photo)

नागपुर में नगर निगम चुनाव के दौरान भाजपा उम्मीदवार किशन गावंडे को उनके समर्थकों ने घर में बंद कर दिया ताकि वह नामांकन वापस न ले सकें। पार्टी ने वार्ड 13 से गावंडे को हटाकर विजय होले को एकमात्र उम्मीदवार बनाना चाहा था। वरिष्ठ नेताओं की मध्यस्थता के बाद गावंडे ने नामांकन वापस लिया। नागपुर निगम की 151 सीटों पर 15 जनवरी को मतदान होगा।

Updated:

महाराष्ट्र के नागपुर शहर में नगर निकाय चुनावों को लेकर एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी के एक उम्मीदवार को उनके ही समर्थकों ने घर के अंदर बंद कर दिया। यह घटना उस वक्त हुई जब पार्टी ने उन्हें अपना नामांकन वापस लेने को कहा था। नामांकन वापसी की आखिरी तारीख पर हुए इस हंगामे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।

वार्ड 13 से दोहरा उम्मीदवार

भाजपा ने अपने एबी फॉर्म में वार्ड 13 (D) से दो उम्मीदवारों के नाम दाखिल किए थे। इनमें विजय होले और किशन गावंडे शामिल थे। लेकिन बाद में पार्टी ने अपनी रणनीति बदलते हुए किशन गावंडे से चुनावी मैदान से हटने को कहा। इस फैसले का मकसद था कि विजय होले को एकमात्र उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा जाए। लेकिन पार्टी का यह फैसला कई कार्यकर्ताओं को रास नहीं आया।

हजारीपहाड़ इलाके के कार्यकर्ताओं का गुस्सा

वार्ड 13 (D) के अंतर्गत आने वाले हजारीपहाड़ इलाके के भाजपा कार्यकर्ता किशन गावंडे को अपना प्रतिनिधि मानते थे। उन्हें लगता था कि गावंडे उनकी आवाज को बेहतर तरीके से उठा सकते हैं। जब पार्टी ने गावंडे से नामांकन वापस लेने को कहा तो ये कार्यकर्ता भड़क गए। उन्होंने तय किया कि वे किसी भी हाल में गावंडे को नामांकन वापस नहीं लेने देंगे।

समर्थकों ने किया घर में बंद

शुक्रवार को जब किशन गावंडे अपना नामांकन वापस लेने निकलने वाले थे, तभी उनके समर्थक उनके घर पहुंच गए। कार्यकर्ताओं की भीड़ ने गावंडे को घर के अंदर बंद कर दिया। उन्होंने घर के बाहर डटकर नारेबाजी शुरू कर दी। कार्यकर्ताओं का कहना था कि वे गावंडे को किसी भी हाल में निर्वाचन अधिकारी के पास नहीं जाने देंगे। घर के अंदर से गावंडे और बाहर से कार्यकर्ताओं के बीच लंबी बातचीत हुई लेकिन कोई हल नहीं निकला।

वरिष्ठ नेताओं की मध्यस्थता

जब स्थिति बिगड़ती नजर आई तो भाजपा के वरिष्ठ नेता मौके पर पहुंचे। विधान परिषद सदस्य परिणय फुके और अन्य स्थानीय नेता घटनास्थल पर आए। उन्होंने कार्यकर्ताओं को समझाने की कोशिश की। नेताओं ने कार्यकर्ताओं को बताया कि पार्टी का फैसला सोच समझकर लिया गया है और इससे पार्टी की जीत की संभावना मजबूत होगी। काफी मशक्कत के बाद कार्यकर्ता मान गए और गावंडे को घर से बाहर जाने दिया।

गावंडे ने वापस लिया नामांकन

आखिरकार किशन गावंडे निर्वाचन अधिकारी के पास पहुंचे और अपना नामांकन वापस ले लिया। इस घटना के बाद गावंडे ने कहा कि इलाके के भाजपा कार्यकर्ता उन्हें अपना नेता मानते हैं और चाहते थे कि वह चुनाव लड़ें। इसी वजह से वे नाराज हो गए थे। लेकिन उन्होंने पार्टी नेतृत्व के फैसले का सम्मान करते हुए अपना नामांकन वापस ले लिया। गावंडे ने यह भी कहा कि पार्टी का हित सबसे ऊपर है और वह हमेशा पार्टी के फैसले के साथ खड़े रहेंगे।

नागपुर नगर निगम चुनाव की तैयारी

महाराष्ट्र में कुल 29 नगर निकायों के चुनाव 15 जनवरी को होने हैं। इनमें नागपुर महानगरपालिका भी शामिल है। मतगणना अगले दिन यानी 16 जनवरी को की जाएगी। नागपुर नगर निगम में कुल 151 सीटें हैं। इन चुनावों को लेकर सभी राजनीतिक दल पूरी ताकत झोंक रहे हैं। यह चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में अहम माने जा रहे हैं।

विभिन्न दलों की रणनीति

भारतीय जनता पार्टी 143 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। उसकी सहयोगी शिवसेना 8 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार रही है। अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने 90 से अधिक सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं। कांग्रेस ने किसी गठबंधन के बिना सभी 151 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। वहीं शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी 79 सीटों पर अपनी किस्मत आजमा रही है।

चुनावी गणित में बदलाव

नागपुर के इस चुनाव में महायुति और महा विकास आघाडी के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल सकती है। लेकिन कांग्रेस के अलग चुनाव लड़ने के फैसले से चुनावी गणित थोड़ा बदल गया है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे विपक्षी वोट बंटने की आशंका है जो भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

पार्टी अनुशासन का सवाल

इस पूरे प्रकरण ने पार्टी अनुशासन के सवाल को फिर से उठा दिया है। हालांकि आखिरकार गावंडे ने पार्टी के फैसले को माना लेकिन कार्यकर्ताओं की नाराजगी साफ नजर आई। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि स्थानीय इच्छाओं और पार्टी की केंद्रीय रणनीति के बीच संतुलन बनाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है। भाजपा जैसी अनुशासित पार्टी में भी ऐसी घटनाएं होना दिखाता है कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की भावनाएं कितनी मजबूत होती हैं।

आगे की राह

अब नागपुर में 15 जनवरी को होने वाले चुनाव सभी की नजरें अपनी ओर खींचेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि वार्ड 13 (D) में भाजपा का एकमात्र उम्मीदवार विजय होले किस तरह का प्रदर्शन करते हैं। क्या हजारीपहाड़ इलाके के नाराज कार्यकर्ता पूरे मन से उनके लिए काम करेंगे या फिर यह नाराजगी चुनाव परिणाम में दिखाई देगी, यह समय ही बताएगा।

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Asfi Shadab

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