नागपुर शहर में ठगों की हिम्मत देखिए कि अब वे राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए जैसी संवेदनशील संस्था के अधिकारी बनकर मासूम लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। लेकिन नागपुर क्राइम ब्रांच यूनिट 05 की तेज और चुस्त कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कानून की नजर से कोई भी बच नहीं सकता। क्राइम ब्रांच की टीम ने फर्जी एनआईए अधिकारी बनकर ट्रांसपोर्ट कारोबारी को ठगने की कोशिश करने वाले एक युवक को बुट्टीबोरी के सातगांव इलाके से कार सहित गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई में करीब 3.25 लाख रुपये का मुद्देमाल और कई फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
कैसे हुई ठगी की कोशिश
पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब एक ट्रांसपोर्ट कारोबारी को एक अनजान व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले शख्स ने खुद को बुट्टीबोरी थाने का पुलिस निरीक्षक बताया। उसने कारोबारी से बात करते हुए कुछ ऐसी बातें कहीं जिससे पहले तो कारोबारी को विश्वास हो गया। आरोपी ने पुलिस अधिकारी होने का रोब दिखाते हुए कारोबारी को डराने और गुमराह करने की कोशिश की। लेकिन जब बातचीत आगे बढ़ी तो आरोपी ने अपनी पहचान बदल दी और खुद को एनआईए यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी का अधिकारी बताना शुरू कर दिया।
आरोपी की बातों में कुछ अजीब और संदेहजनक लगा। उसकी बातों में तालमेल नहीं था और उसका व्यवहार भी असामान्य लग रहा था। ट्रांसपोर्ट कारोबारी एक अनुभवी और समझदार व्यक्ति था, इसलिए उसे तुरंत शक हो गया कि कुछ गड़बड़ है। उसने फौरन अपनी समझदारी का परिचय देते हुए क्राइम ब्रांच को पूरी जानकारी दी।

क्राइम ब्रांच की तेज कार्रवाई
फिर जो हुआ वह नागपुर क्राइम ब्रांच की कुशलता और तत्परता का बेहतरीन उदाहरण है। सूचना मिलते ही क्राइम ब्रांच यूनिट 05 की टीम सक्रिय हो गई। टीम ने तुरंत तकनीकी जांच शुरू की और आरोपी के फोन नंबर और उसके ठिकाने का पता लगाना शुरू कर दिया। तकनीकी साधनों की मदद से आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी गई।
जांच में पता चला कि आरोपी एक कार में घूम रहा है और बुट्टीबोरी की तरफ जा रहा है। क्राइम ब्रांच की टीम ने बिना समय गंवाए उस वाहन का पीछा करना शुरू कर दिया। पुलिस टीम ने बड़ी ही चतुराई और सूझबूझ से आरोपी को घेरा और आखिरकार बुट्टीबोरी के सातगांव इलाके से उसे कार सहित गिरफ्तार कर लिया। यह पूरा अभियान बेहद तेजी से और बिना किसी हंगामे के पूरा किया गया।

बड़ी मात्रा में मुद्देमाल बरामद
जब आरोपी को गिरफ्तार किया गया और उसकी तलाशी ली गई तो पुलिस के हाथ बड़ी सफलता लगी। आरोपी के पास से फर्जी एनआईए का पहचान पत्र मिला जो देखने में बिल्कुल असली जैसा लग रहा था। इसके अलावा फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड भी बरामद किए गए। ये सभी दस्तावेज इतनी सफाई से बनाए गए थे कि आम आदमी को धोखा हो सकता था।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आरोपी के पास करीब 3 लाख 25 हजार रुपये की नकदी भी मिली। यह रकम संभवतः पहले की गई ठगी का परिणाम हो सकती है। पुलिस ने यह पूरा मुद्देमाल जब्त कर लिया है और जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी ने पहले भी कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।
यशोधरानगर थाने में मामला दर्ज
गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ यशोधरानगर थाने में औपचारिक रूप से मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज बनाने और सरकारी अधिकारी होने का झूठा दावा करने सहित कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी से पूछताछ जारी है और पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि वह यह सब कितने समय से कर रहा था और उसके साथ कोई और भी इस धंधे में शामिल है या नहीं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपी की पहचान की पुष्टि की जा रही है और उसके पिछले रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। यह देखा जा रहा है कि क्या वह पहले भी किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल रहा है।

ठगों के बदलते तरीके
यह मामला इस बात का संकेत है कि ठग अब और भी चालाक हो गए हैं। वे अब सिर्फ साधारण ठगी नहीं करते बल्कि सरकारी अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल करके लोगों को डराते और ठगते हैं। एनआईए जैसी संवेदनशील संस्था का नाम लेकर लोगों को डराना एक गंभीर अपराध है और यह दर्शाता है कि अपराधी किस हद तक जा सकते हैं।
पुलिस का कहना है कि लोगों को ऐसी कॉल्स से सावधान रहना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी बताकर फोन करे और पैसे या व्यक्तिगत जानकारी मांगे तो तुरंत पुलिस को सूचना देनी चाहिए। किसी भी सरकारी अधिकारी की पहचान की पुष्टि किए बिना उस पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
जनता के लिए सीख
इस घटना से आम जनता को एक बड़ी सीख मिलती है। सबसे पहले तो यह कि अगर कोई अनजान व्यक्ति फोन पर खुद को पुलिस या किसी अन्य सरकारी विभाग का अधिकारी बताए तो तुरंत सतर्क हो जाएं। दूसरा, अगर कोई संदेह हो तो बिना देर किए पुलिस को सूचना दें। तीसरा, कभी भी किसी अनजान व्यक्ति को अपनी व्यक्तिगत जानकारी या बैंक विवरण न दें।
इस मामले में ट्रांसपोर्ट कारोबारी की समझदारी और सूझबूझ की तारीफ करनी होगी। उसने तुरंत पुलिस को सूचना देकर न सिर्फ खुद को बचाया बल्कि एक खतरनाक अपराधी को पकड़वाने में भी मदद की। अगर वह डर जाता या आरोपी की बातों में आ जाता तो शायद आज यह खबर कुछ और होती।
पुलिस की मुस्तैदी की तारीफ
नागपुर क्राइम ब्रांच यूनिट 05 की इस कार्रवाई की जितनी तारीफ की जाए कम है। टीम ने बेहद तेजी से काम करते हुए तकनीकी जांच और वाहन पीछा करके आरोपी को गिरफ्तार किया। यह दर्शाता है कि नागपुर पुलिस हर तरह के अपराध पर नजर रखे हुए है और जनता की सुरक्षा के लिए हमेशा तैयार है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में जनता का सहयोग बेहद जरूरी है। अगर लोग समय पर सूचना दें तो पुलिस आसानी से अपराधियों को पकड़ सकती है। इस मामले में भी फिर्यादी की तुरंत सूचना देने से ही सफलता मिली।
पुलिस आगे की जांच में यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी के और कितने शिकार हैं और क्या इस ठगी के धंधे में कोई और भी शामिल है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी। फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और उससे पूछताछ जारी है।