
सतारा एमडी केस में बड़ा खुलासा
Satara MD drugs case: सतारा में एमडी ड्रग्स निर्माण से जुड़े बहुचर्चित मामले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस मामले में सोलापुर सेंट्रल जेल में तैनात एक जेल कांस्टेबल को गिरफ्तार किया गया है, जिस पर आरोप है कि उसने जेल में बंद मुख्य आरोपी को मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की अनुमति देने के बदले रिश्वत ली। गिरफ्तार कांस्टेबल की पहचान बालू चव्हाण के रूप में हुई है, जिसे क्राइम ब्रांच की यूनिट 7 ने हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, चव्हाण ने मुख्य आरोपी फैयाज शेख को जेल के भीतर मोबाइल फोन इस्तेमाल करने में मदद की, जिससे वह बाहर सक्रिय अपने नेटवर्क के संपर्क में बना रहा। जांच में सामने आया है कि आरोपी कांस्टेबल ने डिजिटल माध्यम गूगल पे के जरिए 40 हजार रुपये से अधिक की रकम स्वीकार की। यह रकम फैयाज शेख के रिश्तेदारों द्वारा 5 हजार से 10 हजार रुपये की किश्तों में भेजी गई थी।
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ड्रग नेटवर्क का संचालन
Satara MD drugs case: पुलिस सूत्रों का कहना है कि मोबाइल फोन की मदद से फैयाज शेख जेल में रहते हुए भी ड्रग नेटवर्क का संचालन कर रहा था। उसने इसी माध्यम से अपने साथियों को निर्देश दिए और बाहरी संपर्क बनाए रखा। इस दौरान उसने अपने बेटे फहद शेख से भी बातचीत की, जिसे इस मामले में सह-आरोपी बनाया गया है और वह फिलहाल फरार है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि फहद शेख दुबई से पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा है और वहीं से ड्रग्स की सप्लाई तथा वित्तीय लेन-देन को नियंत्रित कर रहा है। गौरतलब है कि फैयाज शेख पिछले करीब डेढ़ साल से सतारा में उजागर हुई एमडी ड्रग्स निर्माण इकाई के मामले में जेल में बंद है। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि वह जेल के अंदर से ही अवैध गतिविधियों का समन्वय करता रहा। इस मामले में अब तक पुलिस करीब 115 करोड़ रुपये मूल्य की एमडी ड्रग्स और उससे जुड़ी सामग्री जब्त कर चुकी है।

पुलिस को बड़े नेटवर्क के सुराग मिले
Satara MD drugs case: इस पूरे मामले की जांच मुंबई के मुलुंड इलाके से शुरू हुई थी, जहां एमडी ड्रग्स बेचने के आरोप में एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को बड़े नेटवर्क के सुराग मिले। पूछताछ के आधार पर क्राइम ब्रांच की टीम सतारा जिले में स्थित एक फार्महाउस तक पहुंची, जहां अवैध रूप से ड्रग्स का निर्माण किया जा रहा था। इसके बाद मामले ने व्यापक रूप ले लिया और कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। ताजा घटनाक्रम ने जेल सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस तरह से एक बंदी आरोपी जेल के अंदर से ही आपराधिक नेटवर्क को संचालित करता रहा और इसमें जेल कर्मचारी की संलिप्तता सामने आई, उसने पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है। फिलहाल पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है और मामले की जांच जारी है।