उत्तर प्रदेश में विधान परिषद के 11 सीटों पर होने वाले चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप ने मंगलवार को इन सीटों के लिए अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। इस सूची में कुल 12 लाख से अधिक मतदाता शामिल हैं, जो 5 स्नातक और 6 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में वोट डालने के हकदार होंगे। यह चुनाव इसलिए जरूरी हो गया है क्योंकि इन सीटों के वर्तमान सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को खत्म होने वाला है।
चुनाव की तैयारी और प्रक्रिया
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर इस पूरी प्रक्रिया को शुरू किया गया था। मतदाता सूची तैयार करने के लिए 1 नवंबर 2025 को अहर्ता तिथि तय की गई थी। इस तारीख के आधार पर ही यह तय किया गया कि कौन-कौन इस चुनाव में मतदान करने के योग्य है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि इस प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी तरीके से पूरा किया गया है।
मतदाता सूची को तैयार करने की शुरुआत 30 सितंबर 2025 को एक सार्वजनिक सूचना जारी करके की गई थी। इसके बाद सभी संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता पंजीकरण अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्र की सूची को अपडेट किया। इस दौरान जो भी पात्र नागरिक थे, उन्हें इस सूची में शामिल करने का पूरा मौका दिया गया।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता संख्या
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा मतदाता वाराणसी में हैं। वाराणसी स्नातक क्षेत्र में कुल 2,69,372 मतदाता हैं, जो इस श्रेणी में सबसे अधिक संख्या है। इसके बाद इलाहाबाद-झांसी स्नातक क्षेत्र का नंबर आता है, जहां 2,60,818 मतदाता पंजीकृत हैं।
लखनऊ स्नातक क्षेत्र में 2,11,756 मतदाता हैं। यह राजधानी होने के कारण काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगरा स्नातक क्षेत्र में 1,80,293 मतदाता हैं, जबकि मेरठ स्नातक क्षेत्र में सबसे कम 59,634 मतदाता पंजीकृत हैं।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों का विवरण
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में सबसे अधिक मतदाता गोरखपुर-फैजाबाद में हैं। यहां कुल 52,257 शिक्षक मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं। आगरा शिक्षक क्षेत्र में 51,532 मतदाता हैं, जो दूसरे स्थान पर है।
बरेली-मुरादाबाद शिक्षक क्षेत्र में 46,553 मतदाता हैं। लखनऊ शिक्षक क्षेत्र में 36,217 मतदाता पंजीकृत हैं। मेरठ शिक्षक क्षेत्र में 33,163 और वाराणसी शिक्षक क्षेत्र में 32,549 मतदाता हैं।
मतदाता बनने की शर्तें
निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन की प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 22 और 23 के तहत यह प्रक्रिया संपन्न होगी।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदक को किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री होनी जरूरी है। बिना मान्यता प्राप्त संस्थान से डिग्री रखने वाले लोगों को इस सूची में शामिल नहीं किया जाएगा।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए नियम थोड़े अलग हैं। यहां नाम शामिल करने के लिए व्यक्ति को कम से कम निर्धारित अवधि तक शिक्षण कार्य का अनुभव होना चाहिए। यह अनुभव किसी मान्यता प्राप्त शैक्षिक संस्थान में होना आवश्यक है।
विधान परिषद की अहमियत
उत्तर प्रदेश विधान परिषद राज्य की विधायी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह ऊपरी सदन के रूप में कार्य करती है और विधान सभा द्वारा पारित विधेयकों की समीक्षा करती है। विधान परिषद के सदस्य विभिन्न तरीकों से चुने जाते हैं, जिसमें स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र भी शामिल हैं।
इन चुनावों में केवल शिक्षित वर्ग ही मतदान करता है, इसलिए इन्हें विशेष महत्व दिया जाता है। स्नातक और शिक्षक समुदाय की राय को सीधे तौर पर विधान परिषद में प्रतिनिधित्व मिलता है।
राजनीतिक दलों की तैयारी
अभी वोटर लिस्ट जारी होने के बाद सभी राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। भाजपा, समाजवादी पार्टी, बसपा और कांग्रेस जैसे बड़े दल अपने उम्मीदवारों के चयन में जुट गए हैं। ये चुनाव राज्य की राजनीति में अहम माने जा रहे हैं।
खासकर स्नातक और शिक्षक वर्ग में किसी भी दल का प्रभाव देखना दिलचस्प होगा। पिछले चुनावों में भी इन सीटों पर कड़ा मुकाबला देखा गया था। इस बार भी ऐसी ही उम्मीद की जा रही है।
मतदाताओं के लिए जरूरी जानकारी
जिन लोगों का नाम मतदाता सूची में है, वे संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर जाकर अपना नाम चेक कर सकते हैं। अगर किसी को अपने नाम में कोई गलती दिखती है या नाम नहीं है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकता है।
निर्वाचन आयोग ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे अपना मतदाता पहचान पत्र जरूर बनवा लें। साथ ही, चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद जरूर मतदान करें।
चुनाव की संभावित तारीख
हालांकि अभी तक चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह चुनाव जल्द ही हो सकते हैं। चूंकि मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल दिसंबर 2026 में खत्म हो रहा है, इसलिए चुनाव उससे पहले ही करवाए जाने की संभावना है।
निर्वाचन आयोग चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है। वोटर लिस्ट जारी होना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।