उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भारतीय चुनाव आयोग ने मंगलवार को विशेष गहन संशोधन के बाद प्रदेश की नई ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है। इस सूची में सबसे बड़ी बात यह है कि कुल 15.44 करोड़ मतदाताओं में से 2.89 करोड़ से अधिक नामों को हटा दिया गया है। यह खबर राज्य की राजनीति में हलचल मचा सकती है क्योंकि आने वाले चुनावों में यह सूची अहम भूमिका निभाएगी।
उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव अधिकारी नवदीप रिनवा ने इस मामले में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि जिन नामों को हटाया गया है, उसके पीछे मुख्य रूप से तीन कारण हैं – मतदाताओं की मृत्यु, स्थायी रूप से दूसरी जगह पलायन, और एक ही व्यक्ति का नाम कई जगह दर्ज होना। इस बड़े बदलाव के बाद अब ड्राफ्ट सूची में 12.55 करोड़ नाम बरकरार रखे गए हैं।
क्यों किया गया इतना बड़ा संशोधन
चुनाव आयोग ने यह कदम मतदाता सूची को साफ-सुथरा और सटीक बनाने के लिए उठाया है। पिछले कुछ सालों में उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में लोगों ने रोजगार और बेहतर जीवन की तलाश में दूसरे राज्यों और शहरों की ओर पलायन किया है। कई मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनके नाम अभी भी सूची में बने हुए थे। साथ ही, कुछ लोगों के नाम एक से अधिक जगहों पर दर्ज थे, जिससे दोहरे मतदान की संभावना बनी हुई थी।
इन सभी समस्याओं को दूर करने के लिए चुनाव आयोग ने विशेष गहन संशोधन की प्रक्रिया शुरू की थी। इस प्रक्रिया में घर-घर जाकर सर्वे किया गया, मतदाताओं की जानकारी को अपडेट किया गया और जो नाम गलत या फर्जी पाए गए, उन्हें हटाने की तैयारी की गई।
दावा और आपत्ति के लिए खुली खिड़की
चुनाव आयोग ने मतदाताओं को राहत देते हुए दावा और आपत्ति दर्ज करने के लिए एक महीने का समय दिया है। यह प्रक्रिया मंगलवार 6 जनवरी 2026 से शुरू हो गई है और 6 फरवरी 2026 तक चलेगी। इस दौरान अगर किसी का नाम गलती से हट गया है या किसी को लगता है कि उसका नाम सूची में होना चाहिए, तो वह अपना दावा दर्ज करा सकता है।
इसी तरह, अगर किसी को लगता है कि कोई नाम गलत तरीके से सूची में शामिल किया गया है, तो वह आपत्ति भी दर्ज करा सकता है। यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक अहम हिस्सा है, जो यह सुनिश्चित करती है कि हर योग्य नागरिक को मतदान का अधिकार मिले और कोई भी अपात्र व्यक्ति वोट न डाल सके।
समय सीमा में मिला था विस्तार
दिलचस्प बात यह है कि यह पूरी प्रक्रिया पहले 11 दिसंबर 2025 तक पूरी होनी थी। लेकिन जब राज्य चुनाव विभाग ने देखा कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हो रहे हैं, तो उन्होंने चुनाव आयोग से 15 दिन का अतिरिक्त समय मांगा। आयोग ने इस मांग को स्वीकार कर लिया और प्रक्रिया को और गहनता से पूरा करने का मौका दिया।
यह फैसला बहुत ही समझदारी भरा था क्योंकि इससे यह सुनिश्चित हो सका कि कोई भी योग्य मतदाता गलती से सूची से बाहर न रह जाए। साथ ही, अधिकारियों को यह भी मौका मिला कि वे हर नाम की पूरी तरह से जांच कर सकें।
मतदाताओं के लिए क्या है जरूरी
जिन लोगों का नाम पुरानी सूची में था, लेकिन नई ड्राफ्ट सूची में नहीं है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। उन्हें तुरंत अपने नजदीकी चुनाव कार्यालय या ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपना दावा दर्ज कराना चाहिए। इसके लिए जरूरी दस्तावेजों में पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र और उम्र का प्रमाण शामिल हैं।
चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि दावा-आपत्ति की प्रक्रिया बिल्कुल सरल और पारदर्शी है। लोग घर बैठे भी ऑनलाइन माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा, हर जिले में विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे जहां लोग जाकर सीधे अपनी समस्या का समाधान पा सकते हैं।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
इस बड़े बदलाव पर राज्य के विभिन्न राजनीतिक दलों की निगाहें टिकी हैं। कुछ दलों ने इसे सकारात्मक कदम बताते हुए कहा है कि इससे फर्जी मतदान पर रोक लगेगी। वहीं, कुछ दलों को डर है कि कहीं सही मतदाताओं के नाम भी न हट गए हों।
विपक्षी दलों ने सरकार से मांग की है कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसी भी योग्य मतदाता को उसके अधिकार से वंचित न किया जाए। उन्होंने कहा है कि वे अपने कार्यकर्ताओं को हर गांव और मोहल्ले में भेजेंगे ताकि लोगों को दावा-आपत्ति की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जा सके।
आगे की राह
अब अगले एक महीने तक दावा-आपत्ति की प्रक्रिया चलेगी। इसके बाद चुनाव आयोग सभी दावों और आपत्तियों की जांच करेगा। जिन दावों को सही पाया जाएगा, उन नामों को सूची में जोड़ा जाएगा। इसी तरह, अगर किसी आपत्ति को सही पाया गया, तो उस नाम को हटा दिया जाएगा।
अंतिम मतदाता सूची फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में जारी होने की संभावना है। यह सूची आने वाले सभी चुनावों के लिए आधार बनेगी। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि हर योग्य नागरिक सुनिश्चित करे कि उसका नाम इस सूची में शामिल है।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में मतदाता सूची का संशोधन कोई आसान काम नहीं है। लेकिन चुनाव आयोग ने जिस गंभीरता और पारदर्शिता से यह काम किया है, वह सराहनीय है। अब यह जिम्मेदारी मतदाताओं की है कि वे सक्रिय रूप से इस प्रक्रिया में भाग लें और अपने लोकतांत्रिक अधिकार को सुरक्षित रखें।