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हिंगलगंज: स्वास्थ्य भवन की ओर जा रही आशा कार्यकर्ता को पुलिस ने रोका, थाने के सामने विरोध प्रदर्शन

हिंगलगंज: स्वास्थ्य भवन की ओर जा रही आशा कार्यकर्ता को पुलिस ने रोका, थाने के सामने विरोध प्रदर्शन
Hingalganj Asha Worker Protest: पुलिस ने स्वास्थ्य कार्यकर्ता को रोका, थाने के सामने जोरदार विरोध प्रदर्शन (FB Photo)

पश्चिम बंगाल के हिंगलगंज में आशा कार्यकर्ताओं ने थाने के सामने विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने स्वास्थ्य भवन जा रही कार्यकर्ता चैताली सरदार को रोककर थाने में रखा। इसके विरोध में सैकड़ों स्वास्थ्य कर्मी एकत्र हुए और अपनी साथी को रिहा करने की मांग की। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।

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Asfi Shadab
Asfi Shadab
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हिंगलगंज। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हिंगलगंज इलाके में आज एक बड़ा विवाद सामने आया। यहां आशा कार्यकर्ताओं ने थाने के सामने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन तब शुरू हुआ जब पुलिस ने स्वास्थ्य भवन की ओर जा रही एक आशा कार्यकर्ता को बीच रास्ते में ही रोक दिया और उन्हें थाने में रख लिया। इस घटना से नाराज होकर सैकड़ों स्वास्थ्य कर्मियों ने हिंगलगंज थाने के सामने धरना प्रदर्शन किया और अपनी साथी कार्यकर्ता को तुरंत छोड़ने की मांग की।

आशा कार्यकर्ताओं का स्वास्थ्य भवन अभियान

जानकारी के अनुसार आज हिंगलगंज क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य भवन जाने का कार्यक्रम बनाया था। यह अभियान उनकी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर था। स्वास्थ्य कर्मियों की कई मांगें काफी समय से अधूरी पड़ी हैं और उनकी समस्याओं पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। इसी को लेकर उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मिलने और अपनी बात रखने का फैसला किया था।

इस अभियान के तहत हिंगलगंज की आशा कार्यकर्ताओं में से एक प्रमुख चेहरा चैताली सरदार भी स्वास्थ्य भवन की ओर जा रही थीं। चैताली सरदार स्वास्थ्य कर्मियों के बीच एक मजबूत आवाज मानी जाती हैं और अक्सर वह अपने साथियों की समस्याओं को लेकर आगे आती हैं। लेकिन जब वह अपने गंतव्य की ओर जा रही थीं, तभी रास्ते में पुलिस ने उन्हें रोक दिया।

पुलिस ने क्यों रोका स्वास्थ्य कार्यकर्ता को

हिंगलगंज थाने की पुलिस ने चैताली सरदार को बीच रास्ते में ही रोक लिया और उन्हें थाने में ले गई। पुलिस का कहना था कि वह किसी बड़े विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए यह कदम उठा रही है। हालांकि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह कार्रवाई बिल्कुल गलत और अलोकतांत्रिक है। उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचना चाहती थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया।

पुलिस की इस कार्रवाई की खबर जैसे ही अन्य आशा कार्यकर्ताओं तक पहुंची, वे सभी तुरंत हिंगलगंज थाने की ओर पहुंच गईं। उन्होंने थाने के सामने जमकर नारेबाजी की और अपनी साथी को तुरंत रिहा करने की मांग की। विरोध प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं की संख्या लगातार बढ़ती गई और जल्द ही यह एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया।

थाने के सामने जोरदार विरोध प्रदर्शन

हिंगलगंज थाने के सामने सैकड़ों स्वास्थ्य कार्यकर्ता इकट्ठा हो गए। उन्होंने जोरदार नारेबाजी करते हुए पुलिस की इस कार्रवाई को गलत बताया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार की ओर से स्वास्थ्य कर्मियों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। पहले तो उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता और अब जब वे शांतिपूर्वक अपनी बात रखने जा रही हैं तो उन्हें रोका जा रहा है।

आशा कार्यकर्ता श्यामली कामिला ने कहा कि हम सभी सिर्फ अपने हक की बात कर रही हैं। हम महीनों से काम कर रहे हैं लेकिन हमारी सैलरी समय पर नहीं मिलती। हमारे काम की कोई सुनवाई नहीं होती। जब हमने शांतिपूर्वक स्वास्थ्य भवन जाने की सोची तो पुलिस ने हमारी साथी को पकड़ लिया। यह बिल्कुल गलत है।

वहीं एक अन्य आशा कार्यकर्ता लिपी घोष ने कहा कि हम सरकार की सेवा में लगे हुए हैं। हम गांव-गांव जाकर लोगों की सेवा करते हैं लेकिन जब हमारी बारी आती है तो कोई हमारी नहीं सुनता। चैताली दीदी को बिना किसी कारण रोका गया है। हम तब तक यहां से नहीं हटेंगे जब तक उन्हें छोड़ा नहीं जाता।

आशा कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगें

हिंगलगंज की आशा कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगों में समय पर वेतन, बेहतर काम की स्थिति और सम्मानजनक व्यवहार शामिल है। वे लंबे समय से अपनी इन मांगों को लेकर आवाज उठा रही हैं लेकिन उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।

आशा कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर स्वास्थ्य सेवाएं देती हैं। वे गर्भवती महिलाओं की देखभाल करती हैं, बच्चों का टीकाकरण करवाती हैं और तमाम स्वास्थ्य योजनाओं को जमीन पर उतारने का काम करती हैं। लेकिन इतना सब करने के बावजूद उन्हें न तो सही वेतन मिलता है और न ही काम की सही स्थिति।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

इस पूरे मामले में स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे महीनों से अपनी समस्याएं बता रही हैं लेकिन किसी अधिकारी ने उनकी सुनवाई नहीं की। जब वे खुद जाकर अपनी बात रखने की कोशिश कर रही हैं तो पुलिस का इस्तेमाल करके उन्हें रोका जा रहा है।

स्थानीय लोगों का भी कहना है कि आशा कार्यकर्ताओं के साथ जो व्यवहार हो रहा है वह बिल्कुल गलत है। ये महिलाएं दिन-रात मेहनत करती हैं और गांव के लोगों की सेवा करती हैं। उनकी मांगें बिल्कुल सही हैं और प्रशासन को इन पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

राजनीतिक पहलू

इस घटना को राजनीतिक रंग भी दिया जा रहा है। विपक्षी दलों ने इस मामले को उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि राज्य सरकार स्वास्थ्य कर्मियों की अनदेखी कर रही है और उनकी आवाज को दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। यह लोकतंत्र के खिलाफ है।

हालांकि सत्तारूढ़ पार्टी की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि उन्होंने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया है।

आगे की राह

हिंगलगंज थाने के सामने प्रदर्शन जारी है। आशा कार्यकर्ताओं ने साफ कर दिया है कि जब तक चैताली सरदार को रिहा नहीं किया जाता और उनकी मांगों पर बातचीत नहीं होती, तब तक वे अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगी। स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को जल्द ही कोई ठोस कदम उठाना होगा।

यह घटना एक बार फिर स्वास्थ्य कर्मियों की समस्याओं को सामने लेकर आई है। देश भर में आशा कार्यकर्ता बेहतर सुविधाओं और सम्मान की मांग कर रही हैं। हिंगलगंज की यह घटना इस बड़े मुद्दे का एक हिस्सा है जिस पर सरकार को गंभीरता से सोचना होगा।

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।