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कोलकाता के मेटियाब्रुज थाने ने दो चोरी के मामलों में आरोपियों को पकड़ा, लाखों के गहने और नकदी बरामद

कोलकाता के मेटियाब्रुज थाने ने दो चोरी के मामलों में आरोपियों को पकड़ा, लाखों के गहने और नकदी बरामद
Metiabruz Police Theft Cases: मेटियाब्रुज पुलिस ने सुलझाए दो बड़े चोरी के मामले, लाखों की संपत्ति बरामद (File Photo)

कोलकाता के मेटियाब्रुज थाने ने पिछले महीने दो बड़ी चोरी के मामलों को सुलझाया। पहले मामले में 65 लाख के सोने के गहने और नकदी की चोरी हुई थी। पुलिस ने तकनीकी सहायता से दो आरोपियों को पकड़ा। दूसरे मामले में 1.92 लाख की चोरी में पति ही चोर निकला। सीडीआर और सीसीटीवी से पुलिस ने मामला सुलझाया।

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Asfi Shadab
Asfi Shadab
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Metiabruz Police Theft Cases: कोलकाता के मेटियाब्रुज थाना क्षेत्र में पिछले महीने हुई दो बड़ी चोरी की घटनाओं को पुलिस ने सफलतापूर्वक सुलझा लिया है। पुलिस ने न केवल आरोपियों को गिरफ्तार किया बल्कि चोरी हुई लाखों रुपये की संपत्ति भी बरामद की है। ये दोनों मामले तकनीकी सहायता और पुलिस की मेहनत का बेहतरीन उदाहरण हैं।

पहला मामला: 65 लाख के सोने के गहनों की चोरी

20 दिसंबर 2025 को मेटियाब्रुज थाने में केस नंबर 222 दर्ज किया गया। यह मामला नाजरा बेगम नाम की 33 वर्षीय महिला की शिकायत पर दर्ज हुआ। नाजरा बेगम अपने पति मोहम्मद मिराज आलम के साथ एकबालपुर इलाके में रहती हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि उनका एक और फ्लैट मेटियाब्रुज के पहाड़पुर रोड पर स्थित एम-122 बिल्डिंग की पांचवीं मंजिल पर है।

इस फ्लैट में कोई नहीं रहता था। नाजरा बेगम ने अपने कीमती सामान को एक गुलाबी रंग के सूटकेस में रखा था। इस सूटकेस में 55 से 65 लाख रुपये के सोने के गहने और 50 हजार रुपये नकद रखे थे। 17 दिसंबर से 20 दिसंबर 2025 के बीच किसी अनजान व्यक्ति ने इस फ्लैट में चोरी कर दी।

चोरों ने कैसे की योजना

जांच में पता चला कि सीईएससी लिमिटेड ने 16 दिसंबर 2025 को बिजली के बिल न भरने की वजह से इस इमारत की बिजली काट दी थी। 19 दिसंबर 2025 को दोबारा बिजली आई। चोरों ने इस स्थिति का फायदा उठाया। उन्होंने खास तरह की चाबियों से ताला और दरवाजे की सिटकिनी खोली। इस तरह उन्होंने कोई सबूत नहीं छोड़ा।

चोर बहुत चालाक थे। वे अपनी पहचान छुपाने के लिए व्हाट्सएप कॉल का इस्तेमाल करते थे। उन्होंने चोरी के समय पांच से ज्यादा गाड़ियां बदलीं ताकि पुलिस उन्हें पकड़ न सके।

पुलिस ने कैसे सुलझाया मामला

मेटियाब्रुज थाने की पुलिस ने बहुत मेहनत से इस मामले की जांच की। तकनीकी सहायता लेकर पुलिस ने आरोपियों की पहचान की। जांच में पता चला कि शबाज अली और साहिल अहमद नाम के दो लोगों ने यह चोरी की थी। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया। उनके बयान के आधार पर सारे चोरी हुए गहने बरामद कर लिए गए। इस मामले की जांच अभी जारी है।

दूसरा मामला: पति ही निकला चोर

11 दिसंबर 2025 को मेटियाब्रुज थाने में केस नंबर 218 दर्ज हुआ। यह मामला सन्नो खान नाम की 33 वर्षीय महिला की शिकायत पर दर्ज हुआ। सन्नो खान अपने पति नजीर खान के साथ मुदियाली रोड खस्सी गली इलाके में रहती हैं।

क्या हुआ था उस दिन

सन्नो खान ने अपनी शिकायत में बताया कि 11 दिसंबर 2025 को दोपहर 12:45 बजे से 2 बजे के बीच किसी ने उनके घर में चोरी की। चोर ने अलमारी के लॉकर से कई कीमती चीजें चुराईं। इनमें 15 ग्राम की सोने की चेन, 7 ग्राम की सोने की बालियों की एक जोड़ी, चांदी के पायल की एक जोड़ी, एक चांदी का गिलास और 1 लाख 92 हजार रुपये नकद शामिल थे।

जांच में हैरान करने वाला खुलासा

पुलिस ने इस मामले की गहन जांच की। सीडीआर और सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई। जांच में जो बात सामने आई वह बहुत हैरान करने वाली थी। पता चला कि खुद सन्नो खान के पति नजीर खान ने ही यह चोरी की थी। पुलिस ने नजीर खान को गिरफ्तार कर लिया।

क्यों नहीं दिखाई गई तस्वीरें

Metiabruz Police Theft Cases: पुलिस ने इन दोनों मामलों को सुलझा लिया है और चोरी का सामान भी बरामद कर लिया है। लेकिन अभी तक बरामद सामान की तस्वीरें सार्वजनिक नहीं की गई हैं। इसकी वजह यह है कि बरामद सामान की टीआई परेड अभी बाकी है। इसलिए पुलिस को तस्वीरें साझा करने में दिक्कत हो रही है।

पुलिस की मेहनत और तकनीक का उपयोग

ये दोनों मामले बताते हैं कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके कितनी मुश्किल मामलों को भी सुलझाया जा सकता है। सीडीआर विश्लेषण, सीसीटीवी फुटेज की जांच और गहन तकनीकी सहायता से पुलिस ने इन मामलों को सुलझाया।

पहले मामले में चोरों ने बहुत सोच समझकर योजना बनाई थी। उन्होंने बिजली कटौती का फायदा उठाया, खास चाबियों का इस्तेमाल किया, व्हाट्सएप कॉल से बात की और कई गाड़ियां बदलीं। फिर भी पुलिस की मेहनत के आगे उनकी एक न चली।

दूसरे मामले में भी तकनीक ने अहम भूमिका निभाई। सीसीटीवी और सीडीआर की मदद से पता चला कि असली अपराधी कौन है। यह मामला इस बात का भी उदाहरण है कि कभी-कभी अपराधी बहुत करीब होता है।

लोगों के लिए सीख

इन दोनों मामलों से लोगों को कई सीख मिलती हैं। खाली फ्लैट में कीमती सामान नहीं रखना चाहिए। अगर रखना ही है तो अच्छी सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए। सीसीटीवी कैमरे लगाने से मदद मिलती है। इसके अलावा अपने घर के सदस्यों पर भी नजर रखना जरूरी है।

मेटियाब्रुज थाने की पुलिस की इस सफलता की सराहना की जानी चाहिए। उन्होंने कम समय में दोनों मामलों को सुलझाया और लोगों की संपत्ति वापस दिलाई। यह काम उनकी मेहनत और समर्पण को दर्शाता है।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।